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होशियारी की हरियाली से प्रदूषण घटाने की तैयारी, निगरानी केंद्रों के पास मिनी अर्बन फॉरेस्ट बनाएंगे
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अतुल भारद्वाज
राजधानी में निगरानी केंद्रों के आसपास हरियाली बढ़ाकर वायु प्रदूषण को घटाने का तरीका अधिकारियों ने निकाला है। इसके लिए निगरानी केंद्रों के आसपास दो किमी. के दायरे में पार्कों व खुली जगहों में मियावाकी पद्धति से मिनी अर्बन फॉरेस्ट विकसित किया जाएगा।
शुरूआत में दो सबसे अधिक प्रदूषित इलाके अलीगंज और तालकटोरा के आसपास सात जगहों पर ऐसे मिनी अर्बन फॉरेस्ट बनाए जाएंगे। वहीं, जिम्मेदार विभाग ट्रैफिक जाम, निर्माण साइटों पर धूल, औद्योगिक इकाइयों के उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं लगा पा रहे हैं।
यूपीपीसीबी और वन विभाग की संयुक्त योजना में सतत निगरानी केंद्रों के आसपास हरियाली बढ़ाए जाने पर काम होना है।
इसके लिए लंबे समय से सबसे अधिक प्रदूषण वाले इलाकों लालबाग, तालकटोरा, अलीगंज, गोमतीनगर के आसपास ऐसी जगहों को चिह्नित किया जाना था, जहां मियावाकी पद्धति के तहत पौधरोपण किया जा सके।
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वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मियावाकी पद्धति में जहां पौधे तेजी से पेड़ बन जाते हैं। वहीं, 100 वर्गमी से लेकर 900 वर्गमी क्षेत्र तक में योजनाबद्ध तरीके से पौधरोपण होता है, जिससे जंगल की तरह विकास न्यूनतम वक्त में हो जाए।
नगर निगम से सहमति मिलने के बाद तालकटोरा और अलीगंज क्षेत्र के पार्कों को तय कर लिया गया है। मिनी अर्बन फॉरेस्ट के चारो ओर तारों की बैरीकेड भी की जाएगी। डीएफ ओ डॉ. रवि कुमार सिंह ने इसके लिए आदेश भी जारी कर दिया है।
वहीं, लालबाग में दयानिधान पार्क में भूमिगत पार्किंग होने से मियावाकी पद्धति का उपयोग नहीं किया जा सकता है। क्योंकि इस पद्धति में पांच फीट तक खोदाई के बाद पौधों को लगाने के लिए मिट्टी को तैयार करना पड़ता है। ऐसे में लालबाग क्षेत्र में नए इलाके तलाशे जा रहे हैं।
पहले की होशियारी पड़ चुकी है भारी
यूपीपीसीबी और वन विभाग की इससे पहले इसी तरह के दूसरे फॉर्मूला से शहर का औसत एक्यूआई कम करने की होशियारी भारी पड़ चुकी है। इसकी वजह यह है कि कुकरैल और बीबीएयू परिसर में इसलिए निगरानी केंद्र लगाए गए ताकि हरियाली से प्रदूषण कम रहेगा। कुछ दिन तक यहां फायदा औसत एक्यूआई को कम करने में मिला। अब दिवाली के बाद स्मॉग बढ़ते ही इन दोनों निगरानी केंद्र पर एक्यूआई बढ़ा हुआ मिल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा बीबीएयू के पास सेतु निगम के आरओबी के निर्माण कार्य होने से है। वहीं, कुकरैल वन क्षेत्र निचले क्षेत्र में है। ऐसे में यहां धूल के कण हवा के साथ जमा होने में मदद मिलती है। इसने कुकरैल में एक्यूआई बढ़ा दिया। यूपीपीसीबी ने इसी साल उक्त दोनों निगरानी केंद्र शुरू किए हैं।
यहां बनाए जाने मिनी अर्बन फॉरेस्ट
मेंहदी खेड़ा, आलमनगर में भूखंड 354/44 के सामने पार्क - 700 पौधे
किंग्स बैंकट हॉल, एफ ब्लॉक राजाजीपुरम के सामने पार्क - 700 पौधे
आर लॉन पार्क, तालकटोरा - 700 पौधे
आलमनगर अंडरपास पार्क, राजाजीपुरम - 350 पौधे
शिवनगर, खदरा, त्रिवेणीनगर के पार्क - 1400 पौधे
एमएस 51 सेक्टर डी अलीगंज के सामने पार्क - 2100 पौधे
सेक्टर ओ तिवारी ट्यूटोरियल, अलीगंज के सामने पार्क - 3150 पौधे
निगरानी केंद्रों के आसपास ही हरियाली बढ़ाने की वजह वायु प्रदूषण को कम करना नहीं है। असल में जहां प्रदूषण बढ़ा हुआ मिल रहा है। वहां हरियाली बढ़ाना एक्शन प्लान में शामिल है। निगरानी केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई जानी है। जहां भी अर्बन मिनी फॉरेस्ट के लिए जगह मिलेगी। वहां इन्हें विकसित किया जाएगा। यह प्रक्रिया नियमित रूप से मिलेगी। इससे पूरे शहर में ही वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
- डॉ. राम करन, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी
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राजधानी में निगरानी केंद्रों के आसपास हरियाली बढ़ाकर वायु प्रदूषण को घटाने का तरीका अधिकारियों ने निकाला है। इसके लिए निगरानी केंद्रों के आसपास दो किमी. के दायरे में पार्कों व खुली जगहों में मियावाकी पद्धति से मिनी अर्बन फॉरेस्ट विकसित किया जाएगा।
शुरूआत में दो सबसे अधिक प्रदूषित इलाके अलीगंज और तालकटोरा के आसपास सात जगहों पर ऐसे मिनी अर्बन फॉरेस्ट बनाए जाएंगे। वहीं, जिम्मेदार विभाग ट्रैफिक जाम, निर्माण साइटों पर धूल, औद्योगिक इकाइयों के उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं लगा पा रहे हैं।
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यूपीपीसीबी और वन विभाग की संयुक्त योजना में सतत निगरानी केंद्रों के आसपास हरियाली बढ़ाए जाने पर काम होना है।
इसके लिए लंबे समय से सबसे अधिक प्रदूषण वाले इलाकों लालबाग, तालकटोरा, अलीगंज, गोमतीनगर के आसपास ऐसी जगहों को चिह्नित किया जाना था, जहां मियावाकी पद्धति के तहत पौधरोपण किया जा सके।
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वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मियावाकी पद्धति में जहां पौधे तेजी से पेड़ बन जाते हैं। वहीं, 100 वर्गमी से लेकर 900 वर्गमी क्षेत्र तक में योजनाबद्ध तरीके से पौधरोपण होता है, जिससे जंगल की तरह विकास न्यूनतम वक्त में हो जाए।
नगर निगम से सहमति मिलने के बाद तालकटोरा और अलीगंज क्षेत्र के पार्कों को तय कर लिया गया है। मिनी अर्बन फॉरेस्ट के चारो ओर तारों की बैरीकेड भी की जाएगी। डीएफ ओ डॉ. रवि कुमार सिंह ने इसके लिए आदेश भी जारी कर दिया है।
वहीं, लालबाग में दयानिधान पार्क में भूमिगत पार्किंग होने से मियावाकी पद्धति का उपयोग नहीं किया जा सकता है। क्योंकि इस पद्धति में पांच फीट तक खोदाई के बाद पौधों को लगाने के लिए मिट्टी को तैयार करना पड़ता है। ऐसे में लालबाग क्षेत्र में नए इलाके तलाशे जा रहे हैं।
पहले की होशियारी पड़ चुकी है भारी
यूपीपीसीबी और वन विभाग की इससे पहले इसी तरह के दूसरे फॉर्मूला से शहर का औसत एक्यूआई कम करने की होशियारी भारी पड़ चुकी है। इसकी वजह यह है कि कुकरैल और बीबीएयू परिसर में इसलिए निगरानी केंद्र लगाए गए ताकि हरियाली से प्रदूषण कम रहेगा। कुछ दिन तक यहां फायदा औसत एक्यूआई को कम करने में मिला। अब दिवाली के बाद स्मॉग बढ़ते ही इन दोनों निगरानी केंद्र पर एक्यूआई बढ़ा हुआ मिल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा बीबीएयू के पास सेतु निगम के आरओबी के निर्माण कार्य होने से है। वहीं, कुकरैल वन क्षेत्र निचले क्षेत्र में है। ऐसे में यहां धूल के कण हवा के साथ जमा होने में मदद मिलती है। इसने कुकरैल में एक्यूआई बढ़ा दिया। यूपीपीसीबी ने इसी साल उक्त दोनों निगरानी केंद्र शुरू किए हैं।
यहां बनाए जाने मिनी अर्बन फॉरेस्ट
मेंहदी खेड़ा, आलमनगर में भूखंड 354/44 के सामने पार्क - 700 पौधे
किंग्स बैंकट हॉल, एफ ब्लॉक राजाजीपुरम के सामने पार्क - 700 पौधे
आर लॉन पार्क, तालकटोरा - 700 पौधे
आलमनगर अंडरपास पार्क, राजाजीपुरम - 350 पौधे
शिवनगर, खदरा, त्रिवेणीनगर के पार्क - 1400 पौधे
एमएस 51 सेक्टर डी अलीगंज के सामने पार्क - 2100 पौधे
सेक्टर ओ तिवारी ट्यूटोरियल, अलीगंज के सामने पार्क - 3150 पौधे
निगरानी केंद्रों के आसपास ही हरियाली बढ़ाने की वजह वायु प्रदूषण को कम करना नहीं है। असल में जहां प्रदूषण बढ़ा हुआ मिल रहा है। वहां हरियाली बढ़ाना एक्शन प्लान में शामिल है। निगरानी केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई जानी है। जहां भी अर्बन मिनी फॉरेस्ट के लिए जगह मिलेगी। वहां इन्हें विकसित किया जाएगा। यह प्रक्रिया नियमित रूप से मिलेगी। इससे पूरे शहर में ही वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
- डॉ. राम करन, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी