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मिल्कीपुर उपचुनाव: नया नहीं है अवधेश के खिलाफ पासी उम्मीदवार का प्रयोग, इस तरह आठ बार तोड़ा है चक्रव्यूह

Sun, 19 Jan 2025 11:31 AM IST
रोहित मिश्र सतीश पाठक, अमर उजाला अयोध्या
सतीश पाठक, अमर उजाला अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 19 Jan 2025 11:31 AM IST
सार

Milkipur by-election: मिल्कीपुर उपचुनाव में भाजपा ने अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद के सामने पासी जाति के व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया है। यह अवधेश के खिलाफ कोई पहला प्रयोग नहीं है। 

 

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Milkipur by-election: The use of Pasi candidate against Awadhesh is not new, in this way the Chakravyuh has be
मिल्कीपुर उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मिल्कीपुर उपचुनाव में पासी कार्ड से भाजपा उत्साहित जरूर है, लेकिन अवधेश प्रसाद के खिलाफ अन्य दलों का यह कोई पहला प्रयोग नहीं है। वर्ष 1985 से सोहावल व मिल्कीपुर में हुए विधानसभा चुनावों में आठ बार भाजपा व अन्य विपक्षी दलों ने अवधेश प्रसाद के खिलाफ पासी फैक्टर ही अपनाया लेकिन सफलता नहीं मिली।

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सपा सांसद अवधेश प्रसाद 1974 से अब तक 13 विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इनमें उन्हें नौ बार सफलता मिली है। सात बार वह जिले की सोहावल विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं, जबकि तीन चुनाव वह मिल्कीपुर सीट से लड़े हैं, जिसमें दो बार उन्हें जीत मिली है। पिछले इन सभी चुनावों पर नजर डालें तो लगभग हर बार प्रमुख दलों ने उनके सामने पासी समाज के ही उम्मीदवार को उतारा है। इसमें आठ बार उन्होंने प्रमुख दलों की चाल नाकामयाब की है।
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पहला चुनाव कांग्रेस से हारे थे अवधेश

Milkipur by-election: The use of Pasi candidate against Awadhesh is not new, in this way the Chakravyuh has be
अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद - फोटो : ANI

पहला चुनाव अवधेश प्रसाद 1974 में लड़े और कांग्रेस के हुबराज कोरी से हार गए। 1977 का अगला चुनाव वह जनता पार्टी से लड़े और हुबराज को हराकर पहली बार विधायक बने। 1980 का अगला चुनाव वह पासी समाज के माधव प्रसाद से हार गए, लेकिन 1985 व 1989 में उन्होंने माधव प्रसाद समेत कई अन्य को हराया। 1991 में राम लहर के दौरान पासी समाज के रामू प्रियदर्शी भाजपा से लड़े और अवधेश प्रसाद को हरा दिया। इसके बाद 1993, 1996, 2002 व 2007 में वह लगातार विधायक बने। इस दौरान 1993 से 2002 तक भाजपा से रामू प्रियदर्शी ही चुनाव लड़े और हारते गए। 2007 में पार्टी ने पासी समाज की ही ऊषा रावत पर दांव लगाया तो रामू प्रियदर्शी बसपा से चुनाव लड़े, फिर भी सभी को हार का सामना करना पड़ा।

2012 में सुरक्षित सीट मिल्कीपुर बनी तो अवधेश प्रसाद वहां से चुनाव लड़े। इस दौरान भाजपा से रामू प्रियदर्शी ही चुनाव लड़े और हारे। 2017 में भाजपा ने पासी समाज के ही गोरखनाथ बाबा पर दांव लगाया और वह जीत गए, लेकिन 2022 में वह फिर से हार गए। पिछले इन्हीं रिकॉर्ड के कारण सपाई उत्साहित दिख रहे हैं। जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव ने कहा कि भाजपा जान-बूझकर इसकी ब्रांडिंग कर रही है। उनके पास कोई अन्य मुद्दा नहीं बचा है। सभी जाति-धर्म का सपा को समर्थन है।

सपा ने की मिल्कीपुर के तीन थानाध्यक्षों को हटाने की मांग

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अवधेश प्रसाद। - फोटो : amar ujala

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देकर मांग की है कि मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव में थाना इनायतनगर के थानाध्यक्ष देवेंद्र पाण्डेय, थाना कुमारगंज के थानाध्यक्ष अमरजीत सिंह, थाना खण्डासा के थानाध्यक्ष संदीप सिंह को तत्काल प्रभाव से अयोध्या से बाहर स्थानांतरित किया जाए व सपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, ग्राम प्रधानों पर दर्ज एफआईआर निरस्त की जाए। श्यामलाल पाल ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र के तीनों थानाध्यक्ष चुनाव की घोषणा होने बाद से अब तक सपा के एक दर्जन से अधिक निर्दोष पदाधिकारियों, सेक्टर प्रभारियों, कार्यकर्ताओं, ग्राम प्रधानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर भय का माहौल बना रहे हैं।

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