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MGNREGA: 10 लाख मनरेगा श्रमिकों का भुगतान अटका, महंगाई में समय से मजदूरी न मिलने से श्रमिक परेशान

Mon, 16 May 2022 12:01 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 16 May 2022 12:01 AM IST
सार

मनरेगा के तहत श्रमिकों का भुगतान न होने से अमृत सरोवर के निर्माण पर असर पड़ेगा। वहीं, महंगाई के दौर में मजदूरी न मिलने से श्रमिक परेशान हैं।

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mgnrega employees did not get their salary in Uttar Pradesh.
फाइल फोटो - फोटो : PTI

विस्तार

उत्तर प्रदेश के करीब दस लाख मनरेगा श्रमिकों का भुगतान अटका है। वहीं, निर्माण सामग्री के 1800 करोड़ रुपये बकाया होने से ग्राम पंचायतों के स्थायी निर्माण कार्य भी ठप हो गए हैं। महंगाई के दौर में समय से मजदूरी नहीं मिलने के कारण श्रमिक परेशान हैं।

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ग्रामीण इलाकों में मनरेगा स्थानीय स्तर पर रोजगार देने और गांवों से पलायन रोकने का बड़ा माध्यम है। कोरोना में लॉकडाउन के दौरान अन्य राज्यों से लौटकर गांव आए लोगों को मनरेगा ने ही रोजगार दिया था। प्रदेश के गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर जैसे जिलों को छोड़ दें तो अधिकांश जिलों में तालाब खोदाई, बरसाती पानी की निकासी के लिए नाला, खड़ंजा, चक और संपर्क मार्ग निर्माण, पीएम व सीएम आवास, खेत की मेड़बंदी और समतलीकरण जैसे कार्य कराए गए। मनरेगा में सौ दिन काम करने के बाद भी श्रमिकों को तीन चार महीने से मजदूरी नहीं मिली है।
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मनरेगा में अभी 17 लाख 9 हजार से अधिक श्रमिक नियोजित हैं। इन्हें 213 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। नियमानुसार 15 दिन के अंदर इन्हें मजदूरी मिलनी चाहिए, लेकिन इन्हें तीन-चार महीने से भुगतान नहीं हुआ है। एक-एक परिवार का 20 से 21 हजार रुपये बकाया है। श्रमिक आए दिन ग्राम सचिवालय में संपर्क करते हैं, लेकिन जल्द बजट मिलने का आश्वासन लेकर लौटा दिया जाता है।
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स्थायी निर्माण कार्य हो रहे ठप
मनरेगा में कुल बजट का 40 प्रतिशत निर्माण सामग्री मद में आवंटित होता है। आठ महीने से केंद्र ने भी इस मद में प्रदेश को बजट जारी नहीं किया है। ऐसे में ग्राम पंचायतों की ओर से खरीदी गई बालू, मौरंग, गिट्टी, पत्थर, सीमेंट, सरिया और टाइल्स का 1800 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं दूसरी तरफ आजादी के अमृत महोत्सव के तहत प्रदेश में 5600 अमृत सरोवर की खोदाई मनरेगा से होनी है। एक अधिकारी ने बताया कि श्रमिकों का भुगतान नहीं होने से यह कार्य प्रभावित हो सकता है।

संविदा कर्मियों को भी नहीं मिला मानदेय

मनरेगा में ग्राम रोजगार सहायक, परियोजना अधिकारी, तकनीकी सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर, लेखाकार सहित अन्य करीब 40 हजार से अधिक संविदा कर्मियों को भी तीन महीने से मानदेय नहीं मिला है। मनरेगा कर्मचारी महासंघ के संयोजक भूपेश सिंह का कहना है कि मानदेय नहीं मिलने से संविदा कर्मियों को घर खर्च समेत कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

जल्द होगा भुगतान
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान जल्द कराने के लिए कहा गया है। निर्माण सामग्री का बजट भी जल्द जारी कराने का प्रयास है।

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