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एक अप्रैल को सजेगा ‘मूर्खिस्तान का दरबार’

Mon, 25 Mar 2019 01:40 AM IST
sahaj sahaj न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: sahaj sahaj Updated Mon, 25 Mar 2019 01:40 AM IST
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‘meeting of fools’ will be held on 1 april
हंसना - फोटो : self
एक अप्रैल को मूर्खिस्तान का दरबार रवीन्द्रालय में सजेगा। रंगभारती की ओर से होने वाले इस ‘घोंघा बसंत’ सम्मेलन में हास्य-व्यंग्य कवि कमलेश द्विवेदी को बेढब बनारसी सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। सम्मेलन में मूर्खिस्तान के प्रधानमंत्री गर्दभराज मुख्य अतिथि होंगे। देश-प्रदेश केमशहूर हास्य कवि अपनी रचनाओं से ठहाके लगवाएंगे।
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आयोजक पत्रकार श्याम कुमार ने बताया कि पिछले 58 वर्षों से मूर्ख दिवस पर ‘घोंघा बसंत सम्मेलन’ कराया जा रहा है। मंच पर गंधर्व विवाह व मूर्ख रत्न भी प्रदान किए जाएंगे। बताया,1961 में इलाहाबाद के परी भवन में देश का पहला हास्य कवि सम्मेलन कराया गया था, जिसके बाद से यह आयोजन अनवरत रूप से हो रहा है। हास्य कवियों के साथ टीवी कलाकार भी इसमें शामिल होते रहे हैं। सम्मेलन में गदर्भराज को सम्मानित करने केबाद चुनी हुई शख्सियतों को मूर्ख रत्न प्रदान किया जाता है। काका हाथरसी, फिराक गोरखपुरी, कृष्ण मनोहर सक्सेना, सुमित्रानंदन पंत, हरिवंश राय बच्चन, माधवी वर्मा जैसी हस्तियां इस सम्मेलन से जुड़ी रही हैं।
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हास्य के पीछे छिपे दर्द को समझिए
पत्रकार श्याम कुमार ने बताया कि हास्य-कवि सम्मेलन कराने का एकमात्र उद्देश्य है, लोगों की तनाव भरी जिंदगी में कुछ खुशनुमा पलों से जोड़ना। हास्य केपीछे भी दर्द होता है, लेकिन उस दर्द को हर आदमी नहीं देख पाता।
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अनूठे प्रयोगों की है लैब
रंगभारती द्वारा कराए जाने वाला हास्य कवि सम्मेलन अनूठे प्रयोगों की लैब है। यहां एक ओर घोंघा बसंत सम्मेलन है तो दूसरी ओर गदहा सम्मेलन है, जो रोचकता से भरा हुआ है। यह अपने तरह का पहला आयोजन है, जहां गदहों को मंच पर मुख्य अतिथि बनाया जाता है। उपहार में झाड़ू, जूतों की माला, पत्तल के जयमाल और भोंपू दिए जाते हैं। गंधर्व विवाह व देश की नामचीन चर्चित हस्ती को मूर्ख रत्न प्रदान किए जाते हैं। तोंद व मूछ प्रतियोगिताएं भी होती रही हैं।


घोंघा, पोंगा, उल्लू, ढपोरशंख...
यह बात स्पष्ट है कि घोंघा बसंत सम्मेलन, एकलौता ऐसा आयोजन नहीं है, जहां मूर्खों को सम्मानित किया जाता है। इसी तरह कानपुर में गदहा सम्मेलन कराया जाता है। जबकि इससे पहले नैनीताल में पोंगा सम्मेलन, गोरखपुर में ढपोरशंख सम्मेलन और बरेली में गंवार सम्मेलन और हाथरस में उल्लू सम्मेलन कराए जाते रहे हैं। आज भी लोग इन कार्यक्रमों की डिमांड करते हैं।
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