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लोहिया संस्थान में कूल्ड रेडियोफ्रिक्वेंसी तकनीक से इलाज शुरू
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डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में शनिवार को विभिन्न प्रकार के दर्द से जूझते मरीजों का कूल्ड रेडियोफ्रिक्वेंसी तकनीक से इलाज शुरू हो गया है। पहले दो दिन इलाज मुफ्त रखा गया।
इसके लाभार्थियों का चयन ओपीडी में आए मरीजों से पहले ही कर लिया गया था। इस तकनीक के लिए पेन मेडिसिन विभाग में एक मशीन भी लगाई गई है।
एनेस्थीसियोलॉजी, क्रिटिकल केयर एंड पेन मेडिसिन विभाग की ओर से आयोजित होने वाली कार्यशाला में शनिवार को इसका सीधा प्रसारण किया गया।
इससे पहले संस्थान की निदेशक डॉ. सोनिया नित्यानंद ने यह तकनीक शुरू करने पर विभाग को बधाई दी। विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक मालवीय के अनुसार इस तकनीक के उपयोग से पेन मैनेजमेंट के मामले में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे।
पेन मेडिसिन टीम के प्रो. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि लंबे समय से होने वाले सिरदर्द, घुटने के दर्द, गले की नसों में दर्द, पैरों की नसों में दर्द, रीढ़ की हड्डी के दर्द का इस तकनीक से इलाज किया जा सकता है।
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संस्थान में करीब 50 लाख रुपये की लागत से कूल्ड रेडियोफ्रिक्वेंसी मशीन लगाई गई है। इसके माध्यम से अन्य संस्थान के डॉक्टरों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।
शनिवार को कई मरीजों पर इसके प्रयोग का सीधा प्रसारण भी किया गया। डॉ. शिवानी रस्तोगी ने बताया कि कोल्ड रेडियोफ्रिक्वेंसी विधि से इलाज में 40 से 50 हजार रुपये का खर्च आता है।
जबकि निजी संस्थानों में यह खर्च डेढ़ लाख रुपये तक होता है। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि विभाग में इसी साल से फेलोशिप की शुरुआत भी की जा रही है। इसके तहत हर साल दो सीट होंगी। कार्यशाला का समापन रविवार को होगा।
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इसके लाभार्थियों का चयन ओपीडी में आए मरीजों से पहले ही कर लिया गया था। इस तकनीक के लिए पेन मेडिसिन विभाग में एक मशीन भी लगाई गई है।
एनेस्थीसियोलॉजी, क्रिटिकल केयर एंड पेन मेडिसिन विभाग की ओर से आयोजित होने वाली कार्यशाला में शनिवार को इसका सीधा प्रसारण किया गया।
इससे पहले संस्थान की निदेशक डॉ. सोनिया नित्यानंद ने यह तकनीक शुरू करने पर विभाग को बधाई दी। विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक मालवीय के अनुसार इस तकनीक के उपयोग से पेन मैनेजमेंट के मामले में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे।
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पेन मेडिसिन टीम के प्रो. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि लंबे समय से होने वाले सिरदर्द, घुटने के दर्द, गले की नसों में दर्द, पैरों की नसों में दर्द, रीढ़ की हड्डी के दर्द का इस तकनीक से इलाज किया जा सकता है।
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संस्थान में करीब 50 लाख रुपये की लागत से कूल्ड रेडियोफ्रिक्वेंसी मशीन लगाई गई है। इसके माध्यम से अन्य संस्थान के डॉक्टरों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।
शनिवार को कई मरीजों पर इसके प्रयोग का सीधा प्रसारण भी किया गया। डॉ. शिवानी रस्तोगी ने बताया कि कोल्ड रेडियोफ्रिक्वेंसी विधि से इलाज में 40 से 50 हजार रुपये का खर्च आता है।
जबकि निजी संस्थानों में यह खर्च डेढ़ लाख रुपये तक होता है। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि विभाग में इसी साल से फेलोशिप की शुरुआत भी की जा रही है। इसके तहत हर साल दो सीट होंगी। कार्यशाला का समापन रविवार को होगा।