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Lucknow News: दिव्यांगों के लिए मध्यस्थता केंद्र अब भूतल पर
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कैसरबाग स्थित पारिवारिक न्यायालय।
लखनऊ। कैसरबाग स्थित पारिवारिक न्यायालय के वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) केंद्र में दिव्यांगों को अब न्याय के लिए सीढ़ियां नहीं चढ़नी पड़ेंगी। अमर उजाला में 29 नवंबर से प्रकाशित खबरों के बाद आखिरकार न्यायालय प्रशासन ने संज्ञान लिया है और दिव्यांगों के लिए भूतल पर मध्यस्थता केंद्र की व्यवस्था कर दी है।
अब तक सभी मामलों की सुनवाई प्रथम तल पर होती थी, जिससे व्हीलचेयर पर आने वाले दिव्यांगों को इंतजार और अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। अमर उजाला की ओर से उठाए गए इस मुद्दे का असर अब एडीआर सेंटर में साफ दिखाई देने लगा है।
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश एवं विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मीनाक्षी सोनकर ने बताया कि दिव्यांगों के लिए भूतल पर विशेष कक्ष चिह्नित कर दिया गया है। अब जितने भी दिव्यांगों से जुड़े मामले आएंगे, उनकी सुनवाई नीचे ही की जाएगी। इससे किसी को अनावश्यक परेशानी नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि रैंप की व्यवस्था जल्द कराई जाएगी और केंद्र में मौजूद अन्य अव्यवस्थाओं को भी दूर किया जाएगा।
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गौरतलब है कि रैंप की मांग को लेकर आवाज उठाने वाली दिव्यांग पीड़िता जॉली मोहन की सुनवाई भी पिछले शुक्रवार को भूतल पर ही कराई गई थी।
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रैंप अब भी नदारद, सीढ़ियां बनीं बाधा
हालांकि, व्यवस्था में सुधार के बावजूद रैंप की अनुपलब्धता अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है। पीड़िता जॉली मोहन का कहना है कि भूतल पर मध्यस्थता केंद्र की शुरुआत स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन कक्ष तक पहुंचने के लिए अब भी तीन सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं, जिन्हें व्हीलचेयर से पार करना संभव नहीं है। उन्होंने मांग की है कि जब तक स्थायी रैंप का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक अस्थायी तौर पर लकड़ी का रैंप उपलब्ध कराया जाए, ताकि दिव्यांगजन बिना किसी सहारे के न्यायालय परिसर में आ-जा सकें।
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अब तक सभी मामलों की सुनवाई प्रथम तल पर होती थी, जिससे व्हीलचेयर पर आने वाले दिव्यांगों को इंतजार और अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। अमर उजाला की ओर से उठाए गए इस मुद्दे का असर अब एडीआर सेंटर में साफ दिखाई देने लगा है।
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अतिरिक्त जिला न्यायाधीश एवं विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मीनाक्षी सोनकर ने बताया कि दिव्यांगों के लिए भूतल पर विशेष कक्ष चिह्नित कर दिया गया है। अब जितने भी दिव्यांगों से जुड़े मामले आएंगे, उनकी सुनवाई नीचे ही की जाएगी। इससे किसी को अनावश्यक परेशानी नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि रैंप की व्यवस्था जल्द कराई जाएगी और केंद्र में मौजूद अन्य अव्यवस्थाओं को भी दूर किया जाएगा।
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गौरतलब है कि रैंप की मांग को लेकर आवाज उठाने वाली दिव्यांग पीड़िता जॉली मोहन की सुनवाई भी पिछले शुक्रवार को भूतल पर ही कराई गई थी।
रैंप अब भी नदारद, सीढ़ियां बनीं बाधा
हालांकि, व्यवस्था में सुधार के बावजूद रैंप की अनुपलब्धता अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है। पीड़िता जॉली मोहन का कहना है कि भूतल पर मध्यस्थता केंद्र की शुरुआत स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन कक्ष तक पहुंचने के लिए अब भी तीन सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं, जिन्हें व्हीलचेयर से पार करना संभव नहीं है। उन्होंने मांग की है कि जब तक स्थायी रैंप का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक अस्थायी तौर पर लकड़ी का रैंप उपलब्ध कराया जाए, ताकि दिव्यांगजन बिना किसी सहारे के न्यायालय परिसर में आ-जा सकें।