Mayawati: मायावती बोलीं- दलितों व उपेक्षितों में भी स्वार्थी लोगों की कमी नहीं है
मायावती ने कहा कि कुछ जातिवादी ताकतें साजिश के तहत बसपा को कमजोर कर रही हैं। ये लोग बसपा का वोट काट रहे हैं।
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट के जरिए कहा है कि दलित व उपेक्षितो में भी स्वार्थी लोगों की कमी नहीं है। जिसमें मेरे कुछ रिश्तेदार भी शामिल हैं। एक ऐसा है जो मेरी गैर हाजरी में मेरे दिल्ली निवास पर सीबीआई छापे के बाद परिवार सहित चला गया।
उन्होंने कहा कि तब से ही छोटा भाई आनंद सरकारी नौकरी छोड़कर परिवार के साथ मेरी सेवा में पार्टी के कार्य में लगा है। जबकि इन स्वार्थी किस्म के लोगों ने खासकर बामसेफ, डीएस 4 आदि के नाम पर अनेक प्रकार के कागजी संगठन बनाए हुए हैं। जो सामाजिक चेतना पैदा करने की आड़ में अपना स्वार्थ सिद्धि कर रहे हैं और अब यही कार्य बीएसपी में कुछ निष्क्रिय लोग भी दूसरे तरीकों से कर रहे हैं।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस प्रकार से बसपा को कमजोर करने के लिए जातिवादी शक्तियां पर्दे के पीछे से यह सब षड्यंत्र कर रही हैं। साथ ही उनसे कागजी पार्टियां बनवा कर चुनाव में दलितों में शोषितों का वोट बांटने की कोशिश करती हैं। ऐसे में पार्टी व मूवमेंट के हित में सभी से सावधान रहने की अपील है।
1. दलित व उपेक्षितों में भी स्वार्थी लोगों की कमी नहीं है, जिसमें मेरे कुछ रिश्तेदार भी हैं व एक ऐसा है जो मेरी गैरहाजिरी में मेरे दिल्ली निवास पर CBI छापे के बाद परिवार सहित चला गया, तबसे ही छोटा भाई आनन्द सरकारी नौकरी छोड़कर परिवार के साथ मेरी सेवा व पार्टी कार्य में लगा है।
— Mayawati (@Mayawati) July 17, 2022
2.जबकि इन स्वार्थी किस्म के लोगों ने खासकर बामसेफ व डीएस4 आदि के नाम पर अनेकों प्रकार के कागजी संगठन बनाए हुए हैं जो सामाजिक चेतना पैदा करने की आड़ में अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं और अब यही कार्य बीएसपी में कुछ निष्क्रिय हुए लोग भी दूसरे तरीके से कर रहे हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण।
— Mayawati (@Mayawati) July 17, 2022
3. इस प्रकार से बीएसपी को कमजोर करने हेतु जातिवादी शक्तियाँ यहाँ पर्दे के पीछे से यह सब षडयन्त्र करती रहती हैं। साथ ही, उनसे कागजी पार्टियाँ बनवाकर चुनाव में दलित व शोषितों का वोट बांटने की घातक कोशिश करती हैं। ऐसे में पार्टी व मूवमेन्ट के हित में इन सभी से सावधान रहने की अपील।
— Mayawati (@Mayawati) July 17, 2022
बसपा के लिए यूपी विधानसभा चुनाव बेहद निराशाजनक रहे हैं। 2007 में पूर्ण बहुमत से प्रदेश में सत्ता में आने वाली पार्टी का प्रदेश अब सिर्फ एक ही विधायक है।