माया का फेरबदल जारी, नए सेनापतियों को जिम्मेदारी
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव में हार की समीक्षा करते हुए भारी फेरबदल करते हुए संगठन में नए चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियां दी हैं।
दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी जारी रही ओवरहॉलिंग में उन्होंने आठ मंडलों में पार्टी प्रत्याशियों की हार की समीक्षा की। इन मंडलों के तीन जोन बनाकर उनमें 13 कोऑर्डिनेटरों की नियुक्ति कर उन्हें बसपा का जनाधार बढ़ाने का जिम्मा सौंपा है।
मायावती ने कोऑर्डिनेटरों, लोकसभा और विधानसभा का चुनाव लड़े प्रत्याशियों, जिलाध्यक्षों व जिला प्रभारियों के साथ मंडलवार हार के कारणों की समीक्षा की।
ध्रुवीकरण रहा हार का कारण
अधिकांश ने बताया कि दलित वोट आमतौर पर बसपा के साथ रहा, लेकिन मुस्लिम, ब्राह्मण और पिछड़ी जातियों के वोट बिखर गए। कई जगह धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण हुआ।
अधिकांश सीटों पर सपा मुस्लिम वोटों का बंटवारा करने में सफल रही। मायावती ने चुनावी नतीजों से निराश न होने के लिए कहा। उन्होंने मिशनरी भावना से काम करने और सर्व समाज को पार्टी से जोड़ने के निर्देश दिए।
कहा कि लोकसभा चुनाव में बसपा 34 सीटों पर नंबर दो रही। 20 प्रतिशत वोट शेयर के साथ बसपा देश का तीसरा प्रमुख राष्ट्रीय दल है। उन्होंने चुनावी हार के लिए विपक्षी दलों की अंदरूनी मिलीभगत को जिम्मेदार माना।
ये हैं नए सेनापति
बसपा सुप्रीमो ने आजमगढ़, मिर्जापुर और वाराणसी मंडलों का एक जोन बनाया है। इसके कोऑर्डिनेटर एमएलसी विजय प्रताप, एमएलसी डॉ. रामकुमार कुरील और एमएलसी वीरेंद्र सिंह चौहान नियुक्त किए गए हैं।
देवापाटन, बस्ती और गोरखपुर मंडल का जोन बनाकर रामसूरत चौधरी, सुधीर कुमार भारती, राजाराम गौतम, लालजी वर्मा और एमएलसी अतहर खां को कोऑर्डिनेटर बनाया है। अलीगढ़ और आगरा मंडल का अलग जोन बनाया गया है।
इसमें सूरज सिंह, एमएलसी सुनील कुमार चित्तौड़, एमएलसी प्रताप सिंह बघेल, रणधीर कश्यप और संघ रतन सेठी को कोऑर्डिनेटर का दायित्व दिया गया है। इनमें कई चेहरे नए हैं। बसपा अध्यक्ष ने हर जिले में 12-12 लोकसभा प्रभारियों की भी नियुक्ति की है।
सर्व समाज को जोड़ने के लिए लोकसभा प्रभारियों में दलित, पिछड़ा वर्ग, अपर कास्ट व अल्पसंख्यकों को भागीदारी दी गई है। जोन कोऑर्डिनेटरों को जिला, विधानसभा, सेक्टर व बूथ स्तर तक के संगठन के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ये किए परिवर्तन
कल शुरू हुए सम्मेलन में उन्होने संगठन के मौजूदा ढांचे को पूरी तरह खत्म करने का ऐलान किया गया।
बुधवार को बसपा अध्यक्ष ने भंग संगठन के कोआर्डिनेटरों, लोकसभा व विधानसभा का चुनाव लड़े प्रत्याशियों, जिलाध्यक्षों व जिला प्रभारियों के साथ हार के कारणों की मंडल स्तरीय विस्तृत समीक्षा शुरू की जो कि आज भी जारी रही।
उन्होने कल बुधवार को लखनऊ, फैजाबाद, इलाहाबाद, कानपुर, चित्रकूट व झांसी मंडल की समीक्षा की थी।
आमतौर पर यह बात सामने आ रही है कि पार्टी में जिम्मेदार भूमिका में रहे कई नेताओं ने नेतृत्व को जमीनी हालात की सही जानकारी नहीं दी। वे हवा का रुख भांपने में नाकाम रहे, जो कि पार्टी की हार की मुख्य वजह बना।
इन्हें भी दी गई जिम्मेदारी
बसपा सुप्रीमो ने कल लखनऊ, फैजाबाद व इलाहाबाद मंडल के जिलों को मिलाकर पहला जोन गठित किया। पूर्व मंत्री आरके चौधरी, निवर्तमान कोआर्डिनेटर अखिलेश अंबेडकर व एमएलसी आरएस कुशवाहा को संयुक्त रूप से इस जोन का कोआर्डिनेटर नियुक्त किया।
वहीं कानपुर, चित्रकूट व झांसी मंडल को मिलाकर दूसरा जोन बनाया। एमएलसी तिलकचंद अहिरवार, कमलेश भारती और एमएलसी नौशाद अली को इस जोन का कोआर्डिनेटर बनाया।
मायावती ने अपने स्तर से ही हर जिले में 12-12 लोकसभा प्रभारियों की भी नियुक्ति की है। इसमें सर्वसमाज को जोड़ने की मजबूत पहल करते हुए रणनीति के तहत दलित, पिछड़ा वर्ग, अपर कास्ट, अल्पसंख्यकों को भागीदारी दी।
नव नियुक्त जोन कोआर्डिनेटरों को जिला, विधानसभा, सेक्टर व बूथ स्तर तक के संगठन के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा यह बात भी तय हो गई है कि विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी अब कोआर्डिनेटर की भूमिका में नहीं रहेंगे। वह विधानसभा संयोजक के रूप में काम करेंगे।