मायावती ने बताया, वह और उनकी पार्टी अखिलेश को क्यों कहती हैं ‘बबुआ’
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भाषण की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा, आज सातवें चरण का प्रचार कुछ समय बाद बंद हो जाएगा। अभी तक जिन छह चरणों का मतदान हो चुका है उसकी रिपोर्ट बड़ी उत्साहवर्धक है। सातवें चरण का वोट पड़ने के बाद इसकी भी ऐसी रिपोर्ट बढ़ने वाली है। उन्होंने कहा, एडवांस से बता देना चाहती हूं कि बीएसपी की अकेली ही पूर्ण बहुमत की सरकार बनने वाली है। अब बीजेपी और सपा-कांग्रेस गठबंधन दूसरे, तीसरे नंबर की लड़ाई कर रहे हैं।
मायावती ने कहा, बीजेपी को पता चल गया कि उनका सरकार बनाने का सपना चकनाचूर हो गया। ये सन 2019 के लोकसभा चुनाव को जोड़कर चल रहे थे कि पूर्ण बहुमत मिलेगा और लोकसभा चुनाव में यही मुद्दा लेकर जाएंगे। अब बीएसपी की वजह से इनका सपना टूट गया। इसलिए बीजेपी को लगा कि जितने नोट बटोरने हैं बटोर लें। उन्होंने इसीलिए चुनाव के बीच में सिलेंडर का दाम बढ़ा दिया।
गुरु चेले कर रहे हैं नाटकबाजी
मायावती ने कहा, इनकी काम कम और बाते ज्यादा करने के आचरण की वजह से जनता ने इन्हें गली-कूचों की धूल चटा दी। ये अपनी विफलताओं से ध्यान बंटाने के लिए कहते घूम रहे हैं कि वह गरीब विरोधी नहीं हैं जबकि इनकी सरकार का चाल, चरित्र और चेहरा गरीब विरोधी और धन्नासेठों का हितकारी रहा है।
ये कहते हैं कि इन्होंने खुद गरीबी के कष्ट को झेला है और वह गरीबों का दर्द भी समझते हैं अगर ऐसा ही है तो इन्होंने नोटबंदी का अपरिपक्व फैसला लेकर देश के करोड़ों लोगों को कंगाल और बेरोजगार क्यों बना दिया? इसके अलावा गरीबी का कष्ट झेलने का मतलब ये नहीं होता है कि जनता को नोटबंदी में फंसाकर खुद आत्मसंतुष्टि प्राप्त करें। नरेंद्र मोदी खुद को ईमानदार और पूरे देश को भ्रष्टाचारी दिखाना चाहते हैं ये इनके अहंकारी रवैये को दर्शाता है। ये अपनी हर चुनावी जनसभा में बताते हैं कि देश को बाबुओं ने लूटा है लेकिन खुद लोकतंत्र जैसी संस्था को स्थापित करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे क्योंकि इनको भी पता है कि लोकपाल का पहला शिकार इनकी सरकार ही हो सकती है।
बीजेपी के लोग चला रहे स्लाटर हाउस
उन्होंने बीजेपी शासित राज्यों में इसे बंद क्यों नहीं करवाया है। मायावती ने कहा, इन्होंने त्योहारों को भी राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जबकि मैंने अपनी हुकूमतों में कभी कोई भेदभाव नहीं किया। ये लोग गांव-गांव में श्मशान और कब्रिस्तान बनाने की बात कर रहे हैं इसकी आड़ में भी इन्होंने घिनौनी राजनीति करने की कोशिश की है। दूसरे-तीसरे नंबर पर आने के लिए भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन को रोड शो करने पड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री जनता को माईबाप और खुद को गोद लिया बेटा बताकर खूब नाटकबाजी कर रही है लेकिन जनता बहकावे में आने वाली नहीं है। आजादी के बाद पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने ऐसी नाटकबाजी की है। लोग ये सारी नाटकबाजी देख रही है।
बसपा सुप्रीमो ने सपा पर भी निशाना साधा और कहा, पांच साल में इनका काम कम अपराध ज्यादा बोलता है। ये लोग भी नाटकबाजी में कम नहीं इन्होंने भी बीजेपी का जूठा खाया हुआ है। ये दोनों मिले हुए हैं। सपा के पास बताने के लिए कुछ नहीं था क्योंकि जनता उनसे लॉ एंड ऑर्डर का जवाब चाहती थी पर ये काम ही बताती रही वो भी नहीं बोल रहा था। मुलायम सिंह जब रक्षामंत्री थे तो हमेशा चाइना-चाइना रटते रहते थे अब उनका बबुआ हर जगह पत्थर-पत्थर करता रहता है जबकि उसने खुद अपने घर में महंगा विदेशी पत्थर लगवा रखा है। सपा का बबुआ हर जगह बसपा के सिंबल का प्रचार करता रहता है। अखिलेश हर जगह कहते हैं, जो हाथी खड़ा है वो खड़ा रहता है जो बैठा है बैठा रहता है...ऐसी बातें तो बबुआ ही कर सकता है। हाथी पत्थर का है तो बैठा ही रहेगा ये बात तो एक बच्चा भी जानता है जबकि सपा का बबुआ की बच्चों का बाप होकर ये बात रटता रहता है इसीलिए हमलोग उसे बबुआ कहते हैं।