चीनी मिल बिक्री घोटाला: नौकरशाहों का कुबूलनामा बन सकता है माया की मुसीबत
चीनी मिल बिक्री घोटाले में सीबीआई की रफ्तार बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए आने वाले दिनों में मुसीबत पैदा कर सकती है। मायावती के करीबी अफसरों में शुमार पूर्व नौकरशाह नेतराम और विनय प्रिय दुबे के ठिकानों पर छापे कम से कम इसी ओर इशारा कर रहे हैं। अब देखना यह है कि सीबीआई पूर्व नौकरशाहों से कितनी पूछताछ करती है और इन नौकरशाहों के कुबूलनामे में और किन-किन लोगों की गर्दन फंसती है।
मायावती शासनकाल में नेतराम का रुतबा अहम हुआ करता था। वह प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री भी रहे और बतौर मुख्यमंत्री मायावती के निर्देशों को अमली जामा पहनाने में उनकी अहम भूमिका रहती थी। नेतराम के कद का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मायावती शासनकाल में उनसे मिलने के लिए कैबिनेट मंत्रियों को भी समय लेकर आना होता था।
मायावती के शासनकाल में वह मुख्यमंत्री कार्यालय पंचम तल के सबसे ताकतवर अफसर रहे। वह प्रमुख सचिव और फिर अपर कैबिनेट सचिव की हैसियत से तैनात रहे। इससे पहले वह आबकारी, कृषि, खाद्य एवं रसद और गन्ना जैसे महत्वपूर्ण विभागों के शीर्षस्थ अधिकारी रहे।
मायावती के सत्ता से बेदखल होने के बाद अखिलेश यादव ने उन्हें महत्वहीन विभागों में तैनाती दे दी। 2014 में नेतराम रिटायर हो गए। हाल ही हुए लोकसभा चुनाव में चर्चा थी कि वह बसपा के टिकट पर लडे़ंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
मायावती पहले ही दे चुकी हैं सफाई
चीनी मिल बिक्री घोटाले से संबंधित आरोपों पर मायावती शुरू से ही सफाई देती रही हैं। जब सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी, उस समय मायावती ने बयान जारी कर कहा था कि चीनी मिलों को बेचने का निर्णय कैबिनेट का था। तत्कालीन गन्ना मंत्री ने जो प्रस्ताव भेजा था, उसे कैबिनेट ने पास किया था।
आयकर ने भी कसा था शिकंजा
गत मार्च में आयकर विभाग ने भी नेतराम के ठिकानों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज, लग्जरी गाड़ियां और करोड़ों की संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए थे। आयकर अधिकारियों ने नेतराम एवं उनकी बेटी पूनम के दो बैंक अकाउंट व दो लॉकर्स को सील कर दिया था। नेतराम की मुंबई की एक कंपनी पर हुई कार्रवाई के दौरान कनेक्शन पाए जाने पर आयकर विभाग ने यह कार्रवाई की थी।