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इस 'प्लान' से माया जीतेंगी आखिरी चरण का चुनाव!

Sun, 11 May 2014 11:29 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 11 May 2014 11:29 AM IST
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mayawati has special strategy to win many seats in purvanchal

सूबे में लोस चुनाव के अंतिम चरण में सोमवार को 18 सीटों पर मतदान होना है।

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पिछले चुनाव में बसपा की जीती कुल 20 सीटों में 5 यहीं से थी।

इस बार पार्टी ने इस संख्या को बढ़ाने के लिए न सिर्फ अपने तीन मौजूदा सांसदों का पत्ता काटा बल्कि विधानसभा चुनाव हारे कई मंत्रियों व मौजूदा विधायकों पर दांव लगाया है।

सांप्रदायिक व जातीय ध्रुवीकरण की तमाम कोशिशों के बीच पूर्वांचल में बसपा को अपनी साख बचाए रखने की चुनौती है।

सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले का है सहारा

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बसपा ने 15वीं लोस चुनाव में पूर्वांचल की सलेमपुर, देवरिया, लालगंज, जौनपुर व घोसी सीटें जीती थी। इस बार इनमें सलेमपुर, देवरिया और जौनपुर के मौजूदा सांसदों का टिकट काट दिया गया।

पार्टी ने इन सीटों को बचाने व नई सीटें बढ़ाने के लिए जिन नए चेहरों को मौका दिया, उनमें ज्यादातर कड़ी लड़ाई में हैं।
चुनाव प्रचार थमने तक मुस्लिम वोटरों का मिजाज सपा और बसपा दोनों के लिए ही उलझन पैदा किए हुए है।

वाराणसी छोड़कर कहीं बसपा की ओर मन बनाता नजर आ रहा है तो कहीं सपा की ओर। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के रोड शो के बाद वाराणसी में जरूर कांग्रेस के साथ जाने की गुंजाइश है।

पर, बसपा नेता इस क्षेत्र में अपने मजबूत दलित वोट बैंक के साथ टिकट वितरण में अपनाए गए सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को घर-घर पहुंचकर समझाने में लगे हैं।

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आखिरी चरण के माया ने बदली रणनीति

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बसपा प्रत्याशियों के प्रचार की रणनीति इस क्षेत्र में पिछले चरण के चुनावों से बदली हुई है।

मुस्लिम परिवारों को यह जोर देकर बताया जा रहा है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह उनके वोटों के लिए जरूर लंबी-लंबी बातें कर रहे हैं। लेकिन पूर्वांचल की इन 18 सीटों पर एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया।

दूसरा, आजमगढ़ जैसी मुस्लिम बहुल सीट पर बसपा ने स्थानीय विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को मौका दिया है तो डुमरियागंज में पूर्व सांसद मो. मुकीम को उतारा है। देवरिया जैसी सीट पर अपने मौजूदा सांसद को घर बैठाकर मुस्लिम प्रत्याशी उतारा।

पार्टी के प्रचार में जुटे लोग यह भी समझा रहे हैं कि सपा मुखिया न सिर्फ आजमगढ़ के एक मुस्लिम को सांसद न बनने देने के लिए खुद चुनाव लड़ रहे हैं बल्कि अपनी दूसरी पत्नी की बेटे के लिए चुनाव बाद एक सीट खाली करने के लिए पहुंचे हैं।

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सपा सरकार के डर से नहीं खुल रहे मुस्लिम वोटर

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आजमगढ़ में बसपा प्रत्याशी के प्रचार में लगे पार्टी के एक वरिष्ठ कोआर्डिनेटर कहते हैं कि मुसलमानों को समझने में देर नहीं लग रही कि उनकी हितैषी बसपा है या सपा।

सरकार की डर से वे खुलकर जरूर सामने नहीं आ रहे लेकिन उनका वोट किसके साथ रहा 16 मई को पता चल जाएगा। यहां दलित वोटरों के साथ जुड़कर मुस्लिम मतदाता बसपा को वोट कर मोदी का विजय रथ रोक देंगे।

इस कोआर्डिनेटर की मानें तो बसपा आजमगढ़ और डुमरियागंज सहित कम से कम सात सीटों पर चौंकाने वाली नतीजे देगी।

इन तमाम दावे के बावजूद पूर्वांचल में वाराणसी से भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और आजमगढ़ से सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के चुनाव लड़ने से कुछ सीटों पर चुनावी मुकाबला भाजपा और सपा के बीच सीधे होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।

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