अब डीएनए से होगी जवानों की पहचान
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किसी बड़े आतंकी ऑपरेशन या फिर युद्घ के समय भारी गोलीबारी के बीच शहीद हुए जवानों की पहचान अब आसानी से हो सकेगी।
भारतीय सेना अपने जवानों का डीएनए बैंक बनाएगी। इस डीएनए बैंक में जवानों के डीएनए व नमूने सुरक्षित रखे जाएंगे।
जिनकी मदद से भविष्य में अज्ञात जवानों की पहचान आसानी से की जा सकेगी।
पुणे में तैयार हो रहे इस डीएनए बैंक का पायलट प्रोजेक्ट सफल हो गया है। सेना इसे एक बड़ी सफलता के रूप में देख रही है।
पहचान करना होगा आसान
पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब चरणबद्व तरीके से जवानों और अधिकारियों के डीएनए इस बैंक में सुरक्षित रखने की तैयारी शुरू हो गयी है।
आतंकी हमलों, युद्घ के समय होने वाले बम विस्फोट से कई बार शहीद हुए जवानों का शरीर बुरी तरह नष्ट हो जाता है।
साथ ही वायु सेना के जहाजों के क्षतिग्रस्त होने के कारण आग लगने जैसी घटना के बाद शहीदों की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है। सेना में शामिल जवानों में कोई बाहरी व्यक्ति शामिल होकर छावनियों ने न घूम सके, इसके लिए भी डीएनए बैंक मददगार साबित होगा।
दो साल पहले सेना के विशेषज्ञों ने डीएनए बैंक बनाने की दिशा में काम शुरू किया था। इसके लिए पुणे में एक भवन बनाने के साथ डीएनए बैंक में नमूने सुरक्षित रखने के लिए उपकरण तक रखे गए।
कई चरणों में होगा काम
पिछले दिनों सेना के कुछ जवानों के नमूने डीएनए बैंक में सुरक्षित किये थे।
डीएनए बैंक में रखे नमूनो और उससे संबंधित जवानों का मिलान किया गया तो वह सही निकले। नमूनो से जवानों की पहचान हो गयी।
अब सेना अपने जवानों और सैन्य अधिकारियों का डीएनए बैंक में नमूना सुरक्षित रखने के लिए कई चरणों में काम करेगी।
इसके लिए प्रशिक्षण रेजीमेंट और फील्ड एरिया में तैनात इंफेंट्री यूनिटों को पहले शामिल किया जाएगा। तीन साल में सेना अपने सभी जवानों का डीएनए बैंक तैयार कर लेगी
हाईटेक होगी सेना
डीएनए बैंक तैयार करने केसाथ भारतीय सेना विश्व की चुनिंदा फौज में शामिल हो जाएगी जिसके पास अपने जवानों का ब्यौरा हर पल एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।
मध्य कमान मुख्यालय के करीब डेढ़ लाख और लखनऊ फील्ड एरिया के 15 हजार से अधिक जवानों का डाटा डीएनए बैंक में सुरक्षित हो सकेगा।