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बीते दस सालों में हुआ काफी सुधार, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे ने साफ की तस्वीर
Tue, 09 Apr 2019 10:14 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Tue, 09 Apr 2019 10:14 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
स्वास्थ्य सेवाओं में बीते 10 सालों में काफी सुधार हुआ है। खासतौर से गर्भवस्था के दौरान गर्भवती की जांच के आंकड़े सुधरे हैं। संस्थागत प्रसव में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके अलावा बच्चों के सर्म्पूण टीकाकरण के लिए भी माता-पिता जागरूक हुए हैं। लेकिन 2005-06 में हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस)-3 और 2015-16 में एनएफएचएस-4 के आंकड़ों की तुलना करें तो तस्वीर बहुत अच्छी नहीं दिखती।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) 4 के अनुसार गर्भावस्था के दौरान गर्भवती की चार बार जरूरी जांच के आंकड़ों में भी काफी सुधार आया है लेकिन ये अभी भी मात्र 51.2 फीसदी है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 44.8 फीसदी और शहरी में 66.4 फीसदी गर्भवती का एंटी नेटल चेकअप (एएनसी) हुआ। जबकि एनएफएचएस-3 में एएनसी जांच मात्र 37 फीसदी थी।
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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) 4 के अनुसार गर्भावस्था के दौरान गर्भवती की चार बार जरूरी जांच के आंकड़ों में भी काफी सुधार आया है लेकिन ये अभी भी मात्र 51.2 फीसदी है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 44.8 फीसदी और शहरी में 66.4 फीसदी गर्भवती का एंटी नेटल चेकअप (एएनसी) हुआ। जबकि एनएफएचएस-3 में एएनसी जांच मात्र 37 फीसदी थी।
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इसी तरह संस्थागत प्रसव 38.7 फीसदी से बढ़कर दोगुना 78.9 फीसदी हो गया है। इसमें शहरी क्षेत्र में 88.7 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में 75.1 फीसदी प्रसव किसी न किसी चिकित्सा केंद्र पर हुए। आंकड़ों में सबसे खराब ये दिखा की अभी भी 4.3 फीसदी प्रसव घर पर ही हो रही है। लेकिन इसमें अच्छी बात ये रही कि प्रसव प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी ने कराया था।
एनफएचएस-4 में एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की संख्या में भी बहुत सुधार देखने को नहीं मिला है। 15 से 49 साल की 50.3 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी मिली है। इनका हीमोग्लोबिन 11 से कम पाया गया।
एनफएचएस-4 में एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की संख्या में भी बहुत सुधार देखने को नहीं मिला है। 15 से 49 साल की 50.3 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी मिली है। इनका हीमोग्लोबिन 11 से कम पाया गया।
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बच्चों के टीकाकरण में भी सुधार
एनएफएचएस-4 के आंकड़ों में सम्पूपर्ण टीकाकरण में सुधार दिखा है लेकिन ये भी मात्र 62 फीसदी है जो कि एनएफएचएस-3 में 43.5 फीसदी था। ये आंकडे़ 12 से 23 महीने के बच्चों के हैं। जिन्हें बीसीजी, मीजल्स, पोलियो और डीपीटी की तीन खुराक दी गई है। 6 से 59 माह के 58.4 फीसदी बच्चों में भी खून की कमी पाई गई। 10 साल पहले ये आंकड़ा 69.4 फीसदी था।