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विभागीय जांच से बचने का शॉर्टकट नहीं है अनिवार्य सेवानिवृत्ति : हाईकोर्ट
Thu, 25 Apr 2019 01:12 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Thu, 25 Apr 2019 01:12 AM IST
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Lucknow High Court
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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सेवा संबंधी एक अहम फैसले में कहा कि कोई भी विभाग किसी भी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच से बचने के शॉर्टकट के रूप में उसकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश नहीं दे सकता है। कोर्ट ने 14 जून 2018 के याची के अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को अवांछित करार देते हुए रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने यह अहम आदेश वन विभाग के कर्मचारी अरुण कुमार की याचिका को मंजूर करते हुए दिया। याची ने विभाग के प्रमुख सचिव के 14 जून 2018 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत उसे अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति दे दी गई थी।
याची के वकील का कहना था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश कानून की मंशा के मुताबिक नहीं है, क्योंकि याची के सेवा संबंधी रिकॉर्ड को ठीक से जांचे-परखे बगैर उसके खिलाफ विभागीय जांच से बचने के लिए यह आदेश पारित किया गया है।
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न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने यह अहम आदेश वन विभाग के कर्मचारी अरुण कुमार की याचिका को मंजूर करते हुए दिया। याची ने विभाग के प्रमुख सचिव के 14 जून 2018 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत उसे अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति दे दी गई थी।
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याची के वकील का कहना था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश कानून की मंशा के मुताबिक नहीं है, क्योंकि याची के सेवा संबंधी रिकॉर्ड को ठीक से जांचे-परखे बगैर उसके खिलाफ विभागीय जांच से बचने के लिए यह आदेश पारित किया गया है।
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उधर, सरकारी वकील का कहना था कि याची के अनिवार्य सेवानिवृति के आदेश में कोई कमी या अवैधानिकता नहीं है क्योंकि यह स्क्रीनिंग समिति की संतुष्टि के बाद पारित किया गया है।
अदालत ने एक नजीर के हवाले से विधि व्यवस्था देते हुए कहा कि किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच से बचने के शॉर्टकट के रूप में उसकी सेवानिवृत्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता है। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने याची की सेवा संबंधी लाभों के साथ उसे सेवा में बहाल किए जाने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा, चूंकि प्रमुख सचिव याची के खिलाफ जांच करवाकर पूरी करना चाहते थे, ऐसे में उसके खिलाफ विभागीय जांच की कार्रवाई कानून के मुताबिक की जा सकती है और इसे जल्द पूरी करके अगर कोई अंतिम आदेश पारित किया जाए तो उसमें कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।
अदालत ने एक नजीर के हवाले से विधि व्यवस्था देते हुए कहा कि किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच से बचने के शॉर्टकट के रूप में उसकी सेवानिवृत्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता है। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने याची की सेवा संबंधी लाभों के साथ उसे सेवा में बहाल किए जाने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा, चूंकि प्रमुख सचिव याची के खिलाफ जांच करवाकर पूरी करना चाहते थे, ऐसे में उसके खिलाफ विभागीय जांच की कार्रवाई कानून के मुताबिक की जा सकती है और इसे जल्द पूरी करके अगर कोई अंतिम आदेश पारित किया जाए तो उसमें कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।