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‘साहब बेटा बहू पीटते हैं, खाना भी नहीं देते, जिंदगी से छुटकारा चाहता हूं’

Fri, 11 Aug 2017 11:39 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 11 Aug 2017 11:39 AM IST
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man tortured by son and daughter in law
पीड़‌ित राम कुमार
साहेब, क्या बताएं...। बेटा और बहू मकान अपने नाम करवाना चाहते थे। नहीं किया तो खफा हो गए। जीना मुहाल कर दिया। बहू के इशारे पर बेटा मारता-पीटता था। अब सहन नहीं होता, इसलिए घर छोड़ दूसरों के लिए शरण लेने को भटकता रहा। मित्रों और रिश्तेदारों ने समझाया तो उन्हें भी अपमानित कर भगा दिया। इस पीड़ा भरी जिंदगी से छुटकारा चाहता हूं। नालायक बेटे-बहू को दंड दिलाई एडीएम साहेब। 
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जिस पिता ने अंगुली पकड़ चलना सिखाया, जिसके बेहतर भविष्य के लिए अपनी पूरी उम्र गुजार दी। जिसे पढ़ाया-लिखाया, सिर ऊंचा कर जीना सिखाया, शादी कर घर बसाया। 
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उसी बेटे और उसकी पत्नी ने बुढ़ापे में पिता का सहारा बनने के बजाय, उन्हें घर से निकाल दिया। वह भी सिर्फ इसलिए कि पिता ने मकान उनके नाम नहीं किया। मारपीट पर उतारू बेटे-बहू से त्रस्त पीड़ित पिता राम कुमार गौतम (70) ने घर छोड़ दिया। 
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बीते दिनों बुजुर्ग ने ‘अमर उजाला में भरण पोषण अधिनियम ’ से जुड़ी खबर पढ़ी। इसके बाद कलेक्ट्रेट में एडीएम वित्त व राजस्व शत्रुघ्न सिंह से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई। 

एडीएम एफआर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बुर्जुग पिता की लिखित शिकायत के आधार पर पूरा मामला भरण पोषण अधिनियम के तहत दर्ज कर इसकी जांच एसडीएम सदर अमित कुमार को सौंपी है। राम कुमार गौतम दस साल पहले एचएएल से सेवानिवृत्त हुए थे। 

सी-73 हरिहरनगर इंदिरा नगर में अपनी मेहनत से 2600 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाए गए घर में रहने वाले बुर्जुग के तीन बच्चे हैं। दो लड़कियों की शादी हो जाने के बाद वह अपने बेटे दीप राज गौतम के साथ इंदिरा नगर स्थित मकान में रह रहे थे। 

संवेदनहीनता : शराब पीकर मारता, खाना भी नहीं देता

man tortured by son and daughter in law
डेमो प‌िक
बुजुर्ग ने बताया कि बीते छह महीने से दीप राज मकान की रजिस्ट्री अपने नाम किए जाने का दबाव बना रहा था। वह आवास विकास में संविदा पर कार्यरत है। 

आए दिन शराब पीता है और बहू के साथ मिलकर मारता है। खाना तक नहीं देता। लड़की दामाद ने जब इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहा तो उन्हें भी बेइज्जत कर बीच में न पड़ने की धमकी दी। 

दहशत : दोनों मिलकर मुझे मार डालना चाहते हैं 
पिता ने आरोप लगाया कि दोनों मिलकर मुझे मार कर मकान हथियाने तक का ताना बाना बुनने लगे हैं। शिकायत सुनाते हुए फफक पड़े बुर्जुग पिता को एडीएम एफआर ने ढांढस बंधा कर इस मामले में त्वरित जांच कराने व न्याय दिलाने का भरोसा दिलाकर भेजा। 

प्रावधान : बुजुर्गों को सताया तो जाना पड़ सकता है जेल

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डेमो इमेज - फोटो : Internet
भरण पोषण अधिनियम के तहत पारिवारिक हिंसा व उत्पीड़न से त्रस्त व सताए जाने वाले बुर्जुगों व दिव्यांगों को राहत दिलाने का प्रावधान है। 
  • लिखित शिकायत के बाद संबंधित एसडीएम के समक्ष दर्ज होगा मामला
  • 24 से 48 घंटे में राजस्व कर्मियों की सहायता से कराई जाएगी पुष्टि
  • फिर दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर होगा बातचीत से समाधान का 
  • उत्पीड़न सिद्ध होने पर दर्ज होगा आरोपी के खिलाफ मुकदमा
  • तीन माह में एसडीएम सुनवाई कर निस्तारण कराएंगे सुनिश्चित
  •  एक्ट के तहत दस हजार तक जुर्माना व तीन माह जेल की सजा का प्रावधान
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