'मक्का-मदीना को निशाना बना रहे इस्लाम के दुश्मन'
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मजलिस-ए-ताहफ्फुजे नामूसे सहाबा की ओर से बुधवार को ताहफ्फुजे हरम कॉन्फ्रेंस में प्रदेश भर से जुटे उलमा ने सऊदी हुकूमत के विरोध को हरमैन-शरीफैन (मक्का-मदीना) को खत्म करने की साजिश करार दिया।
वहीं यमन, इराक, लीबिया और लेबनान केहालात के लिए ईरान को जिम्मेदार बताते हुए उसे दहशतगर्दों का मददगार बताया। कॉन्फ्रेंस में इस्लामी मुल्कों के खिलाफ ईरानी कार्रवाइयों की निंदा, दहशतगर्दी को खत्म करने और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को खत्म करने की साजिश के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए गए।
रकाबगंज स्थित दारुल मुबल्लिगीन के हाता शौकत अली में आयोजित कॉन्फ्रेंस में नदवा के प्रधानाचार्य मौलाना सईदुर्रहमान आजमी नदवी ने कहा कि इस्लाम विरोधी ताकतें मक्का और मदीना को नुकसान पहुंचाने के लिए खुद को मुसलमान कहलाने वाले लोगों को हथियार बना रही हैं, ताकि उन पर इस्लाम विरोधी होने का इल्जाम न लगे।
दुनिया में बढ़ रहे आतंकवाद से पहुंच रहा है नुकसान
जमीयत उलेमाए हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना अशहद रशीदी ने कहा कि आतंकवादी दुनिया के मुल्कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में कोई मुल्क किसी को दहशतगर्दी की सजा देता है तो उसका विरोध करना दहशतगर्दी को बढ़ावा देना है।
ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की रिपोर्टों को आम करना जरूरी हो गया है।
कॉन्फ्रेंस का संचालन दारुल मुबल्लिगीन के अध्यापक कारी सिद्दीक ने किया। मौलाना मतीनुल हक ओसामा कानपुरी, मौलाना कफील अशरफ, मौलाना अनवार जामई, मौलाना आफताब आलम, मौलाना साजिद मजाहिरी, मौलाना अब्दुल अजीम फारूकी ने भी विचार रखे।आखिर में दारुल उलूम देवबंद के प्रधानाचार्य मौलाना अबुल कासमी नोमानी ने देश-दुनिया में अमन व खुशहाली की दुआ कराई।