आजम खान को बड़ा झटका: ईडी ने जौहर यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ की संपत्ति की अटैच, बाजार कीमत 1170 करोड़
प्रवर्तन निदेशालय ने रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। इनकी बाजार कीमत करीब 1170 करोड़ रुपये बताई गई है। यह कार्रवाई आजम खान और जौहर ट्रस्ट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत हुई है। मामले में आगे की जांच जारी है।
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। 28 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि इनकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 1170 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान और अन्य के खिलाफ चल रही जांच के तहत की गई है।
किसानों की जमीन पर कब्जे के आरोपों से शुरू हुई जांच
ईडी के मुताबिक, रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की गई थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि जबरन कब्जे में ली गई। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के अनुसार, सिंहानखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ में फैले शत्रु संपत्ति के 45 भूखंडों पर भी कथित तौर पर अवैध कब्जा किया गया था। ईडी ने बताया कि शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने जिला प्रशासन के माध्यम से इस जमीन का कब्जा वापस ले लिया है।
सरकारी धन और निर्माण सामग्री के दुरुपयोग का आरोप
जांच में ईडी ने दावा किया कि सार्वजनिक कार्यों के लिए निर्धारित धन विश्वविद्यालय परिसर में खर्च किया गया। सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों से ट्रस्ट को दान के रूप में रकम वापस मिलने के मामले भी सामने आए। ईडी के अनुसार, करीब 186 करोड़ रुपये के लोक निर्माण विभाग के ठेके हासिल करने वाली एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने स्वीकार किया कि ठेका राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में लगाया गया था। एक अन्य फर्म के साझेदारों ने भी ट्रस्ट को 40 लाख रुपये दान देने की बात स्वीकार की।
ईडी ने यह जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस से साझा की थी। इसके आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को अजीमनगर थाने में आजम खान, ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।
सरकारी धन से बने निर्माण को निजी संपत्ति बनाने का आरोप
ईडी की जांच में विश्वविद्यालय परिसर में विधायक और विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये के काम कराए जाने की बात भी सामने आई। इसके अलावा, विश्वविद्यालय परिसर में पंडाल, ओबीसी बालक छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से 23.41 करोड़ रुपये की मंजूरी दिए जाने का उल्लेख है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वर्ष 2015 में पंडाल निर्माण के लिए स्वीकृत 12.16 करोड़ रुपये की राशि से जुड़े शासनादेश में संपत्ति का स्वामित्व संस्कृति विभाग के पास रहने और इसे राज्य सरकार के उपयोग के लिए मुफ्त उपलब्ध कराने की शर्त थी। ईडी का आरोप है कि वर्ष 2016 में इन शर्तों में बदलाव कर पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय को दे दिया गया और राज्य सरकार के उपयोग की शर्त हटा दी गई।
निर्माण लागत और घोषित खर्च में बड़ा अंतर
ईडी के अनुसार, जिला मूल्यांकन अधिकारी की 10 नवंबर 2023 की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई। जमीन की कीमत 4.63 करोड़ रुपये जोड़ने पर कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये हुई।
इसके मुकाबले ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया था। ईडी ने इसमें से 12.29 करोड़ रुपये के दान को गैर-वास्तविक बताते हुए वास्तविक खर्च 66.03 करोड़ रुपये माना। जमीन और भवनों की लागत में से वैध स्रोतों से समझाई गई 72.63 करोड़ रुपये की रकम घटाने के बाद 426.46 करोड़ रुपये की राशि को ईडी ने कथित अपराध से अर्जित आय माना।
इसी आधार पर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। ईडी ने बताया कि इससे पहले 19 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय और उससे जुड़े परिसरों पर तलाशी भी ली गई थी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और आपत्तिजनक बताए गए दस्तावेज जब्त किए गए। मामले में आगे की जांच जारी है।