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UP: हटाए गए तदर्थ लिपिकों को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने नियमितीकरण के पुनर्विचार का दिया आदेश
Tue, 02 Dec 2025 09:26 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 02 Dec 2025 09:26 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने हटाए गए तदर्थ लिपिकों के लिए नियमितीकरण पर पुनर्विचार का आदेश दिया है। वहीं, सेवा से हटाने के आई जी निबंधन के आदेश को रद्द कर दिया।
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- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
लखनऊ हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से वर्ष 2006 में स्टैंप एवं निबंधन विभाग से हटाए गए तदर्थ लिपिकों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने इन्हें सेवा से हटाने के आई जी निबंधन के आदेश को किया रद् कर दिया है और उनके नियमितिकरण पर पुनर्विचार का आदेश विभागीय अफसरों को दिया है।
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न्यायमूर्ति इरशाद अली की एकल पीठ ने मंगलवार को यह अहम फैसला हटाए गए प्रह्लाद सिंह समेत 20 तदर्थ लिपिकों की छह याचिकाओं को मंजूर करके दिया। याचिकाओं में पंजीकरण महानिरीक्षक के 28 फरवरी 2006 के आदेश को चुनौती दी गई थी। इसमें याचियों के नियमितीकरण मामले पर गौर करके खारिज कर दिया गया था। साथ ही यह कहते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं कि विभाग में अब उनकी जरूरत नहीं है।
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याचियों के अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार बाजपेई का कहना था कि याचीगण दशकों से संविदा पर तदर्थ लिपिकों के रूप में कार्यरत थे। ऐसे में उनके नियमितीकरण पर विचार किया जाना चाहिए था। उधर, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता कुलदीप पति त्रिपाठी ने याचिकाओं का विरोध किया।
कोर्ट ने कहा कि मामले में याचीगण एक दशक से अधिक कार्यरत रहे हैं। ऐसे में उनका मामला पूरी तरह से एक नजीर और समूह ग के पदों पर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण कानून के प्रावधानों के तहत आता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आई जी निबंधन के 28 फरवरी 2006 के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही विभागीय अफसरों को इस फैसले की टिप्पणियों के प्रकाश में याचियों के नियमितीकरण पर तीन सप्ताह में पुनः विचार करने का आदेश दिया।