कासगंज हिंसा का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, यूपी सरकार ने केंद्र को सौंपी रिपोर्ट
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कासगंज सांप्रदायिक हिंसा के मुख्य आरोपी माने जा रहे तीन भाइयों में से एक सलीम को एसटीएफ ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को अब उसके भाइयों वसीम जावेद और नसीम की तलाश है। सलीम पर मुख्य केस तिरंगा यात्रा में हुए विवाद के बाद अभिषेक गुप्ता उर्फ चंदन की हत्या का है।
उधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट भी केंद्र को भेज दी है। रिपोर्ट में कानून व्यवस्था को लेकर पैदा हुई स्थिति, मौजूदा स्थिति और कार्रवाई के बारे में बताया गया है।
अलीगढ़ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक संजीव गुप्ता ने बताया कि 22 वर्षीय कॉलेज छात्र चंदन गुप्ता की हत्या के मुख्य आरोपी सलीम के घर से पिस्तौल और बम बरामद किए गए थे। हत्या मामले में 18 लोग नामजद कराए गए हैं। इनमें से 13 फरार चल रहे हैं। चंदन को गोली तहसील रोड पर छत से मारी गई थी। वहीं पर वसीम का मकान है।
एडीजी जोन अजय आनंद ने सलीम की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। लेकिन उससे की गई पूछताछ का ब्योरा नहीं दिया। उधर हिंसा के दौरान घायल हुए लखीमपुर खीरी के अकरम ने 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
इन मुद्दों पर फोकस कर रही है राज्य सरकार
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार इस बात का पता लगा रही है कि यह घटना स्थानीय हालात का स्वाभाविक नतीजा था या इसके पीछे कोई सोची समझी योजना थी। राज्य सरकार ने रिपोर्ट में उन हालात का भी जिक्र किया है, जिनमें चंदन गुप्ता मारा गया।
कासगंज में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। अभी अधिकारियों को कासगंज में ही कैंप करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार इस घटना की जांच सभी पहलुओं से कर रही है। सूत्रों के मुताबिक गृहमंत्री राजनाथ सिंह प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर संसद में बयान दे सकते हैं।
कई और अफसरों पर गिरेगी गाज
गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में कई मौकों पर पुलिस की लापरवाही बताई गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ और अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। यह बात भी सामने आई है कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने भी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई।
सूत्रों की मानें तो दो मामलों में पुलिस की कमजोरी रही है। हिंसा को काबू करने में ढिलाई बरती गई और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी हुई। अब भी कई आरोपी फरार हैं। हालांकि रिपोर्ट में लापरवाही पर कोई टिप्पणी नहीं है।