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मदरसों को अनुदान का बदलेगा नियम

Wed, 12 Feb 2014 09:00 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 12 Feb 2014 09:00 AM IST
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madarsa will get grant under new rules

प्रदेश सरकार मदरसों को अनुदान देने के नियमों में फेरबदल करने जा रही है।

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इसके लिए नई नियमावली बनाई जा रही है। इसमें विभागीय मंत्री को अनुदान देने का अंतिम अधिकार दिया जा रहा है।

नई नियमावली के पास होने के बाद प्रत्येक मामले को कैबिनेट में ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मौजूदा समय मदरसों को अनुदान देने की प्रक्रिया काफी जटिल है।

इससे मदरसों को अनुदान देने में काफी समय लग जाता है। सबसे पहले जिला स्तर पर फॉर्म जमा होते हैं। इसके बाद यह निदेशालय आते हैं।

निदेशक स्तर से आवेदन पत्रों की जांच पड़ताल होती है। इसमें यह देखा जाता है कि आवेदन नियमानुसार है या नहीं। इसके बाद निदेशक अपनी संस्तुति शासन भेजते हैं।
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शासन स्तर पर प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण की अध्यक्षता में बनी राज्य समिति में अनुदान का निर्णय होता है।

इसके बाद इसे कैबिनेट भेजा जाता है। सरकार अब इस नियमावली में बदलाव करने जा रही है।

नई नियमावली हाल ही में माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा संस्कृत विद्यालयों को अनुदान देने के बनाई गई नियमावली जैसी ही होगी।

संस्कृत विद्यालयो के लिए मंडल व प्रदेश स्तर पर दो समितियां बनाई गई हैं। लेकिन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग दो के बजाय तीन समितियां बनाने पर विचार कर रहा है।
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इसमें मंडल, निदेशालय व शासन स्तर पर तीन समितियां बनाई जा सकती हैं। यह प्रस्ताव शीघ्र कैबिनेट में लाया जाएगा।

नियमावली पास होने के बाद मदरसों को अनुदान देने के लिए कमेटी निर्णय करेगी। इसके बाद अंतिम फैसला अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री का होगा। मंत्री के अनुमोदन से ही मदरसों को अनुदान मिल सकेगा।

सरकार ने की थी 150 मदरसों को अनुदान देने की घोषणा
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार बनाने के साथ ही प्रदेश के 150 मदरसों को अनुदान देने की घोषणा की थी। बाद में वित्त विभाग ने मुख्यमंत्री की घोषणा दो वित्तीय वर्षों में पूरा करने की बात कही।

वर्तमान वित्तीय वर्ष 2013-14 में 75 मदरसों को व अगले वित्तीय वर्ष में भी 75 मदरसों को अनुदान देने का निर्णय लिया गया।

फिर भी मदरसे अनुदानित नहीं हो सके हैं। अनुदान के लिए जो आवेदन आए हैं उनकी जांच के बाद उन्हें शासन के पास भेज दिया गया है। लेकिन अब नियमावली में बदलाव के बाद मदरसों को अनुदान मिलने की उम्मीद है।


अनुदान से 50 लाख सालाना का आता है बोझ
अनुदान मिलने के बाद मदरसों को 12 शिक्षकों (आलिया के लिए चार, फौकानिया के लिए तीन व तहतानिया के लिए पांच) के अलावा प्रधानाचार्य व दो कर्मचारियों के पद स्वीकृत हो जाते हैं। इससे सरकार पर प्रति मदरसा करीब 50 लाख रुपये सालाना का बोझ आता है।

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