{"_id":"5d87d4f88ebc3e93d76c491e","slug":"m-phil-session-may-be-zero-once-again-lucknow-news-lko483008283","type":"story","status":"publish","title_hn":"शून्य होगा लविवि में एमफिल का सत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शून्य होगा लविवि में एमफिल का सत्र
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एमफिल के लिए यह सत्र भी होगा शून्य
लविवि ने दाखिले के लिए मांगा सिर्फ पीएचडी की सीटों का ब्योरा
लखनऊ विश्वविद्यालय ने जैसे-तैसे पीएचडी सीटों का ब्योरा मांगने की शुरुआत कर दी। इसके बावजूद एमफिल पाठ्यक्रम के आवेदन फॉर्म का अभी तक पता नहीं है। विवि इनके संचालन पर सीधा जवाब नहीं दे रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि लगातार चौथे साल विवि में एमफिल का सत्र शून्य हो जाएगा। पीएचडी में दाखिला न मिलने पर अभ्यर्थी एमफिल में दाखिला ले लेते थे। कोर्स में दाखिला न होने की वजह से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर रहा है।
यूजीसी के नये अध्यादेश में एमफिल की सीट संख्या शिक्षक संख्या के हिसाब से तय होनी हैं। नई गाइडलाइन के अनुसार एक प्रोफेसर एक समय में 3 एमफिल शोधार्थियों का गाइड बन सकता है। इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर एक समय में 2 और असिस्टेंट प्रोफेसर सिर्फ एक एमफिल विद्यार्थी का गाइड बन सकता है। अभी तक एमफिल के हर पाठ्यक्रम में 30-30 सीटें ही होती हैं। इसलिए दाखिले की प्रक्रिया शुरू करने से पहले विवि को इनकी सीट भी तय करनी है। विवि को पीएचडी के साथ ही एमफिल की सीट संख्या भी मांगनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में अब सत्र शून्य होना ही एकमात्र विकल्प है।
आठ विभागों में एमफिल की सीटें
लविवि में सिर्फ कला संकाय के आठ विभागों में ही एमफिल पाठ्यक्रम का संचालन होता है। इन विभागों में हिंदी, अंग्रेजी, लोक प्रशासन, शारीरिक शिक्षा, एआईएच, समाजकार्य, दर्शनशास्त्र और समाजशास्त्र विभाग शामिल हैं। इनमें से सिर्फ हिंदी में चलने वाला एमफिल पाठ्यक्रम रेग्यूलर है। बाकी सभी पाठ्यक्रम वित्तविहीन हैं। इसलिए इनमें निर्धारित सीट संख्या के मुकाबले 60 फीसदी से कम दाखिले होने पर पाठ्यक्रम का संचालन नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
एमफिल पर कुछ कहना मुश्किल
पीएचडी के दाखिले जल्दी करना प्राथमिकता है। इसलिए इसकी सीट का ब्योरा मांगा गया है। एमफिल पर कोई फैसला नहीं किया गया है। इस पर कुछ भी कहना मुश्किल है।
- प्रो. एनके पांडेय,
प्रवक्ता, लविवि
विज्ञापन
लविवि ने दाखिले के लिए मांगा सिर्फ पीएचडी की सीटों का ब्योरा
लखनऊ विश्वविद्यालय ने जैसे-तैसे पीएचडी सीटों का ब्योरा मांगने की शुरुआत कर दी। इसके बावजूद एमफिल पाठ्यक्रम के आवेदन फॉर्म का अभी तक पता नहीं है। विवि इनके संचालन पर सीधा जवाब नहीं दे रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि लगातार चौथे साल विवि में एमफिल का सत्र शून्य हो जाएगा। पीएचडी में दाखिला न मिलने पर अभ्यर्थी एमफिल में दाखिला ले लेते थे। कोर्स में दाखिला न होने की वजह से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर रहा है।
यूजीसी के नये अध्यादेश में एमफिल की सीट संख्या शिक्षक संख्या के हिसाब से तय होनी हैं। नई गाइडलाइन के अनुसार एक प्रोफेसर एक समय में 3 एमफिल शोधार्थियों का गाइड बन सकता है। इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर एक समय में 2 और असिस्टेंट प्रोफेसर सिर्फ एक एमफिल विद्यार्थी का गाइड बन सकता है। अभी तक एमफिल के हर पाठ्यक्रम में 30-30 सीटें ही होती हैं। इसलिए दाखिले की प्रक्रिया शुरू करने से पहले विवि को इनकी सीट भी तय करनी है। विवि को पीएचडी के साथ ही एमफिल की सीट संख्या भी मांगनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में अब सत्र शून्य होना ही एकमात्र विकल्प है।
विज्ञापन
आठ विभागों में एमफिल की सीटें
लविवि में सिर्फ कला संकाय के आठ विभागों में ही एमफिल पाठ्यक्रम का संचालन होता है। इन विभागों में हिंदी, अंग्रेजी, लोक प्रशासन, शारीरिक शिक्षा, एआईएच, समाजकार्य, दर्शनशास्त्र और समाजशास्त्र विभाग शामिल हैं। इनमें से सिर्फ हिंदी में चलने वाला एमफिल पाठ्यक्रम रेग्यूलर है। बाकी सभी पाठ्यक्रम वित्तविहीन हैं। इसलिए इनमें निर्धारित सीट संख्या के मुकाबले 60 फीसदी से कम दाखिले होने पर पाठ्यक्रम का संचालन नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
एमफिल पर कुछ कहना मुश्किल
पीएचडी के दाखिले जल्दी करना प्राथमिकता है। इसलिए इसकी सीट का ब्योरा मांगा गया है। एमफिल पर कोई फैसला नहीं किया गया है। इस पर कुछ भी कहना मुश्किल है।
- प्रो. एनके पांडेय,
प्रवक्ता, लविवि