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Lucknow News: लविवि के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह निलंबित
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में बीएससी अंतिम वर्ष की छात्रा को पेपर लीक कराने का प्रलोभन देकर अशोभनीय बातें करने के मामले में विवि प्रशासन ने आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को निलंबित कर दिया है। कुलपति प्रो. जेपी सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कार्यपरिषद की आपात बैठक में पेश तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय अनुशासन समिति की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया। अमर उजाला ने दो दिन पूर्व ही निलंबन की संभावना जता दी थी।
अनुशासन समिति ने वायरल ऑडियो क्लिप्स, लिखित व मौखिक शिकायतों तथा आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की ओर से जुटाए तथ्यों की जांच के बाद अंतरिम रिपोर्ट में शिक्षक के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप सही पाए। रिपोर्ट में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने का प्रलोभन देकर छात्रा के यौन शोषण का प्रयास, गोपनीय परीक्षा सूचना साझा करने की बात स्वीकार करना, अनैतिक आचरण से विश्वविद्यालय की साख को क्षति पहुंचाना तथा विशाखा गाइडलाइंस और यूजीसी विनियम 2015 के तहत कार्यस्थल पर यौन व मानसिक उत्पीड़न जैसे आरोप शामिल हैं।
कार्यपरिषद ने निर्णय पर मुहर लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं की सुरक्षा और परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य सुरक्षित और निष्पक्ष शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है। विश्वविद्यालय ने आरोपी शिक्षक को आरोप पत्र जारी करते हुए 15 दिन में लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। तय समय में संतोषजनक जवाब न मिलने पर सेवा समाप्ति सहित कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
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अनुशासन समिति ने वायरल ऑडियो क्लिप्स, लिखित व मौखिक शिकायतों तथा आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की ओर से जुटाए तथ्यों की जांच के बाद अंतरिम रिपोर्ट में शिक्षक के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप सही पाए। रिपोर्ट में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने का प्रलोभन देकर छात्रा के यौन शोषण का प्रयास, गोपनीय परीक्षा सूचना साझा करने की बात स्वीकार करना, अनैतिक आचरण से विश्वविद्यालय की साख को क्षति पहुंचाना तथा विशाखा गाइडलाइंस और यूजीसी विनियम 2015 के तहत कार्यस्थल पर यौन व मानसिक उत्पीड़न जैसे आरोप शामिल हैं।
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कार्यपरिषद ने निर्णय पर मुहर लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं की सुरक्षा और परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य सुरक्षित और निष्पक्ष शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है। विश्वविद्यालय ने आरोपी शिक्षक को आरोप पत्र जारी करते हुए 15 दिन में लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। तय समय में संतोषजनक जवाब न मिलने पर सेवा समाप्ति सहित कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
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