‘मर्दानगी’ के फेर में नहीं करा रहे नसबंदी
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आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन पुरुषों की ‘मर्दानगी’ परिवार नियोजन के
सालाना हेल्थ सर्वेक्षण के मुताबिक, लखनऊ के केवल 0.3 प्रतिशत लोग ही नसबंदी का माध्यम चुन रहे हैं।
परिवार
नियोजन के ये खतरनाक हालात राजधानी समेत पूरे यूपी में हैं।
परिवार नियोजन
की स्थिति को लेकर कराए गए सर्वेक्षण के मुताबिक लोगों में मर्दानगी के
साथ यह भी भ्रम होता है कि वे कोई मेहनत का काम नहीं कर पाएंगे।
जनसंख्या पहुंची 46 लाख
स्वास्थ्य
विभाग के जागरूकता के लिए उठाए गए कदम भी यहां नाकाफी ही रहे। यही वजह रही
कि लखनऊ में 37.1 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिनके तीन या ज्यादा बच्चे हैं।
जनगणना 2011 के मुताबिक, लखनऊ जिले की जनसंख्या 46 लाख के करीब पहुंच चुकी
है।
विशेषज्ञों की मानें तो इन हालात में
2030 तक रहने के लिए जगह नहीं बचेगी। डिस्ट्रिक्ट हेल्थ लेवल सर्वे की
रिपोर्ट के मुताबिक, तीन साल पहले लखनऊ में पुरुष नसबंदी का आंकड़ा 0.5
प्रतिशत था।
पिछले महीने जारी एनुअल हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में यह आंकड़ा
गिरा है। नए सर्वेक्षण की रिपोर्ट बताती है कि अब पुरुष नसबंदी का आंकड़ा
0.3 प्रतिशत ही रह गया।
वहीं महिलाओं में नसबंदी का प्रतिशत 17.3 है।
डीएलएसएस की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 18.9 प्रतिशत था।
परिवार कल्याण विभाग
से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि तमाम कोशिशों के बाद भी लोगों
के मन से भ्रांतियां निकलने का नाम नहीं ले रहीं हैं। पुरुष नसबंदी के लिए
एक प्रभावी योजना नहीं होना भी एक बड़ी वजह है।