आखिरकार मुलायम के गढ़ पहुंचे मोदी के शेर
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गुजरात से यूपी आए एशियाई बब्बर शेरों को गुपचुप तरीके से इटावा भेज दिया गया।
सेंट्रल जू अथॉरिटी से हरी झंडी मिलते ही लखनऊ जू में रखे गए मनन और कुंवरी को बृहस्पतिवार देर शाम सफारी के लिए लेकर टीम रवाना हो गई।
शेरों की रवानगी बेहद गोपनीय रखी गई। मनन और कुंवरी को सफारी के ब्रीडिंग सेंटर में उतारा जाएगा। जहां शुरुआती दिन उन्हें माहौल में ढालने के लिए अलग-अलग रखा जाएगा।
ये है सियासी वजह
आनन-फानन में शेरों की रवानगी के पीछे सियासी वजहें भी मानी जा रही हैं। तर्क दिया जा रहा है कि मैनपुरी में लोकसभा चुनाव के मतदान 24 अप्रैल को होने हैं।
वहां से खुद सपा सुप्रीमो चुनाव लड़ रहे हैं। लॉयन सफारी सपा सुप्रीमो का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। शेरों को उतारे जाने में देरी को लेकर सवाल उठने लगे थे, ऐसे में यह निर्णय लिया गया।
वहीं सूत्रों का कहना है कि शेरों को लेकर जिस तरह से कई महीनों से मोदी और सीएम अखिलेश यादव में जुबानी जंग चल रही थी, गुपचुप रवानगी के पीछे प्रमुख वजह है।
जू प्रशासन और विभाग के आला अफसर देर रात तक चुप्पी साधे रहे। जंतु उद्यान राज्यमंत्री डॉ. एसपी यादव तक को अफसरों ने इसकी जानकारी नहीं दी।
मोदी-अखिलेश के बीच चल रहा है ‘लॉयन वॉर’
गुजरात से आए शेरों को लेकर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव में खूब ‘लॉयन वॉर’ चल रहा है।
कभी नरेंद्र मोदी अखिलेश सरकार पर तंज कसते हुए कहते हैं कि यूपी में भले ही मूलभूत सुविधाओं के लिए लोग तरस रहे हैं लेकिन प्रदेश के मुखिया को बब्बर शेर ही दिखाई दिए।
वहीं सीएम अखिलेश यादव भी इस बात को लेकर मोदी पर पलटवार करते रहे हैं। हाल ही में अखिलेश ने कहा था, मोदी हमेशा यूपी को शेर दिए जाने की बात करते हैं, तो हमने भी तो उन्हें लकड़बग्घा दिया है।
8 साल का सपना
वर्ष 2006 में मुलायम सिंह यादव ने इटावा लॉयन सफारी प्रोजेक्ट को तैयार कराया था। लेकिन सरकार बदल जाने से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।
2012 में सपा सरकार आई तो फिर से इसमें तेजी आई और इटावा में 350 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में सफारी आकार लेने लगी।
इसके लिए पहले चरण में 5 अप्रैल 2013 को हैदराबाद जू से दो एशियाई बब्बर शेर लक्ष्मी-विष्णु लाए गए जिन्हें कानपुर जू में रखा गया।
उसके दो दिन बाद 7 अप्रैल को राजकोट जू से एक्सचेंज के तहत दो और बब्बर शेर हीर-मोजकब कुबेर लखनऊ जू पहुंचे।
21 दिसंबर 2013 को गुजरात के शक्करबाग जू से 4 और एशियाई बब्बर शेर कुंवरी, मनन, वीगो और करिश्मा का इंतजाम किया गया।
लेकिन सफारी में निर्माण कार्यों के बाद सीजेडए की हरी झंडी नहीं मिलने से शेरों को उतारे जाने में देरी हुई।