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लविविः कैस प्रमोशन के लिए आईक्यूएसी का गठन जरूरी, वीसी ने दिया निर्देश
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लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने सहयुक्त कॉलेजों से स्पष्ट कहा है कि सभी कॉलेजों में कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (कैस) के तहत प्रमोशन होने चाहिए।
किंतु इसके लिए कॉलेजों में इंटरनल क्वॉलिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) का होना जरूरी है। इसका गठन यूजीसी के नियमों के तहत होना चाहिए।
यही नहीं, विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी निदेशक से संबंधित प्राचार्य उसको वेरीफाई भी कराएंगे। इससे नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
लविवि के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बृहस्पतिवार को कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ हुई बैठक में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इसके तहत विवि में अब तक लगभग 150 शिक्षकों की प्रोन्नति की जा चुकी है। वहीं कॉलेजों के शिक्षकों को पीएचडी कराने के मामले में उन्होंने कहा कि कॉलेज शिक्षक कम से कम खुद पीएचडी किए हुए हों।
पीएचडी के ऑर्डिनेंस में संशोधन हो चुका है। पूर्व में केवल पीजी कॉलेज के शिक्षक ही पीएचडी करा सकते थे।
लेकिन अब यूजी कॉलेज के शिक्षक भी पीएचडी करा सकते हैं। इसके लिए ऑर्डिनेंस के तहत उनकी अर्हता होनी चाहिए। ऑर्डिनेंस विवि की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
कॉलेजों के शिक्षक इसके तहत अप्लाई कर सकते हैं। सभी आवेदन संबंधित विभागाध्यक्षों के पास भेजे जाएंगे। माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय पीएचडी के अर्ह शिक्षकों के आवेदन की तिथि भी बढ़ाएगा।
उन्होंने कॉलेजों नैक तथा एनआईआरएफ में आवेदन करने को भी कहा। साथ ही विवि की केंद्रीयकृत प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया।
बैठक में लखनऊ के अलावा सीतापुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई और रायबरेली के सहायता प्राप्त और राजकीय कालेज के प्राचार्यों और डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. पूनम टंडन, प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी, डीन ऐकडेमिक्स प्रो. राकेश चंद्रा, डीन एडमिशन प्रो. वीके शर्मा, डीन कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल प्रो. अवधेश त्रिपाठी, प्रवेश समन्वयक प्रो. पंकज माथुर, सह समन्वयक प्रवेश संजय मेधावी एवं अनित्य गौरव, कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक विद्यानंद त्रिपाठी ने शिरकत की।
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विद्यार्थियों का डेटा विवि वेबसाइट पर
प्रो. राय ने कॉलेजों को बताया कि उनके छात्र-छात्राओं का पूरा डेटा प्रवेश के बाद विवि की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। उन्होंने कॉलेजों में साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश दिए। साथ ही महिला शौचालयों में सेनेटरी नैपकिन के लिए वेंडिंग मशीन की व्यवस्था करने को कहा। विवि कालेजों को इसकी सुविधा उपलब्ध भी करा सकता है। विवि की तरह कॉलेज भी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने वाली योजनाएं शुरू करे।
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किंतु इसके लिए कॉलेजों में इंटरनल क्वॉलिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) का होना जरूरी है। इसका गठन यूजीसी के नियमों के तहत होना चाहिए।
यही नहीं, विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी निदेशक से संबंधित प्राचार्य उसको वेरीफाई भी कराएंगे। इससे नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
लविवि के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बृहस्पतिवार को कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ हुई बैठक में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इसके तहत विवि में अब तक लगभग 150 शिक्षकों की प्रोन्नति की जा चुकी है। वहीं कॉलेजों के शिक्षकों को पीएचडी कराने के मामले में उन्होंने कहा कि कॉलेज शिक्षक कम से कम खुद पीएचडी किए हुए हों।
पीएचडी के ऑर्डिनेंस में संशोधन हो चुका है। पूर्व में केवल पीजी कॉलेज के शिक्षक ही पीएचडी करा सकते थे।
लेकिन अब यूजी कॉलेज के शिक्षक भी पीएचडी करा सकते हैं। इसके लिए ऑर्डिनेंस के तहत उनकी अर्हता होनी चाहिए। ऑर्डिनेंस विवि की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
कॉलेजों के शिक्षक इसके तहत अप्लाई कर सकते हैं। सभी आवेदन संबंधित विभागाध्यक्षों के पास भेजे जाएंगे। माना जा रहा है कि विश्वविद्यालय पीएचडी के अर्ह शिक्षकों के आवेदन की तिथि भी बढ़ाएगा।
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उन्होंने कॉलेजों नैक तथा एनआईआरएफ में आवेदन करने को भी कहा। साथ ही विवि की केंद्रीयकृत प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया।
बैठक में लखनऊ के अलावा सीतापुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई और रायबरेली के सहायता प्राप्त और राजकीय कालेज के प्राचार्यों और डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. पूनम टंडन, प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी, डीन ऐकडेमिक्स प्रो. राकेश चंद्रा, डीन एडमिशन प्रो. वीके शर्मा, डीन कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल प्रो. अवधेश त्रिपाठी, प्रवेश समन्वयक प्रो. पंकज माथुर, सह समन्वयक प्रवेश संजय मेधावी एवं अनित्य गौरव, कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक विद्यानंद त्रिपाठी ने शिरकत की।
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विद्यार्थियों का डेटा विवि वेबसाइट पर
प्रो. राय ने कॉलेजों को बताया कि उनके छात्र-छात्राओं का पूरा डेटा प्रवेश के बाद विवि की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। उन्होंने कॉलेजों में साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश दिए। साथ ही महिला शौचालयों में सेनेटरी नैपकिन के लिए वेंडिंग मशीन की व्यवस्था करने को कहा। विवि कालेजों को इसकी सुविधा उपलब्ध भी करा सकता है। विवि की तरह कॉलेज भी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने वाली योजनाएं शुरू करे।