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Lucknow News: नवग्रहों की आभा व ऊर्जा में दमकेगा लविवि
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कुलपति प्रो. मनुका खन्ना और विभागाध्यक्ष प्रो. गौरी सक्सेना के मार्गदर्शन में ‘नवग्रह वाटिका’ क
लखनऊ। कल्पना कीजिए एक ऐसी बगिया की... जहां हर पौधा केवल हरियाली नहीं, बल्कि किसी ग्रह की ऊर्जा का दूत हो। जहां धरती पर विज्ञान, संस्कृति और ज्योतिष एक साथ सांस लेते हों। यह अनोखी पहल लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में साकार हुई है... ‘नवग्रह वाटिका’ के रूप में। यहां सूर्य की चमक मदार के फूलों में झिलमिलाती है, चंद्र की शीतलता पलाश की पंखुड़ियों पर उतरती है, और ग्रहों की आभा से पूरा परिसर दमक उठता है...।
बृहस्पतिवार को यहां कुलपति प्रो. मनुका खन्ना और विभागाध्यक्ष प्रो. गौरी सक्सेना के मार्गदर्शन में ‘नवग्रह वाटिका’ का शुभारंभ हुआ। कुलपति ने कहा कि यह नवग्रह वाटिका हमारी धरती और अंतरिक्ष के बीच संवाद का सेतु बनेगी। प्रकृति, ग्रह और मानव जीवन का रहस्यमय संबंध यहां जीवंत दिखाई देगा। विभागाध्यक्ष प्रो. गौरी सक्सेना ने इसे छात्रों के लिए लिविंग क्लासरूम बताया, जहां वे पौधों और ग्रहों के वैज्ञानिक व सांस्कृतिक आयामों को प्रत्यक्ष अनुभव कर सकेंगे।
ज्योतिषीय प्रभाव के आधार पर पाैधों का चयन
इस विशेष वाटिका में नौ ग्रहों से जुड़े पौधे लगाए गए हैं। सूर्य की तेजस्विता लिए मदार (लाल), चंद्र की शीतलता संग पलाश (सफेद), मंगल की ऊर्जा से दमकता खैर (लाल), बुध की बुद्धिमत्ता का प्रतीक अपामार्ग (हरा), बृहस्पति की दिव्यता से भरा पीपल (पीला), शुक्र की कोमलता दर्शाता गूलर (सफेद), शनि की गंभीरता समेटे शमी (काला), राहु की रहस्यमयी छाया में दूब (धूसर) और केतु की तपस्या को दर्शाती कुशा (धूसर)। इन पौधों का चयन उनके रंग, दिशा और ज्योतिषीय प्रभाव के आधार पर किया गया है। जब सूर्य की किरणें इन पर पड़ती हैं, तो ऐसा लगता है मानो ब्रह्मांड की ऊर्जाएं विश्वविद्यालय परिसर में एक नया जीवन-संगीत रच रही हों।
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बृहस्पतिवार को यहां कुलपति प्रो. मनुका खन्ना और विभागाध्यक्ष प्रो. गौरी सक्सेना के मार्गदर्शन में ‘नवग्रह वाटिका’ का शुभारंभ हुआ। कुलपति ने कहा कि यह नवग्रह वाटिका हमारी धरती और अंतरिक्ष के बीच संवाद का सेतु बनेगी। प्रकृति, ग्रह और मानव जीवन का रहस्यमय संबंध यहां जीवंत दिखाई देगा। विभागाध्यक्ष प्रो. गौरी सक्सेना ने इसे छात्रों के लिए लिविंग क्लासरूम बताया, जहां वे पौधों और ग्रहों के वैज्ञानिक व सांस्कृतिक आयामों को प्रत्यक्ष अनुभव कर सकेंगे।
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ज्योतिषीय प्रभाव के आधार पर पाैधों का चयन
इस विशेष वाटिका में नौ ग्रहों से जुड़े पौधे लगाए गए हैं। सूर्य की तेजस्विता लिए मदार (लाल), चंद्र की शीतलता संग पलाश (सफेद), मंगल की ऊर्जा से दमकता खैर (लाल), बुध की बुद्धिमत्ता का प्रतीक अपामार्ग (हरा), बृहस्पति की दिव्यता से भरा पीपल (पीला), शुक्र की कोमलता दर्शाता गूलर (सफेद), शनि की गंभीरता समेटे शमी (काला), राहु की रहस्यमयी छाया में दूब (धूसर) और केतु की तपस्या को दर्शाती कुशा (धूसर)। इन पौधों का चयन उनके रंग, दिशा और ज्योतिषीय प्रभाव के आधार पर किया गया है। जब सूर्य की किरणें इन पर पड़ती हैं, तो ऐसा लगता है मानो ब्रह्मांड की ऊर्जाएं विश्वविद्यालय परिसर में एक नया जीवन-संगीत रच रही हों।

कुलपति प्रो. मनुका खन्ना और विभागाध्यक्ष प्रो. गौरी सक्सेना के मार्गदर्शन में ‘नवग्रह वाटिका’ क
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