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Lucknow News: डेंगू की स्वदेशी जांच किट की सफलता बताई, तीन सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मानित
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शिक्षकों को कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने किया सम्मानित, साथ में मौजूद पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी।
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के जैवरसायन विभाग में पूर्व छात्र संघ (एएडीबी) की ओर से पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। इसमें पद्मश्री डॉ. नवीन खन्ना ने भारत में विकसित स्वदेशी डेंगू जांच किट की सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और रामनाथ कोविंद के प्रोत्साहन तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन से देश में स्वदेशी जांच किट विकसित करने का अभियान आगे बढ़ा। आज भारतीय जांच किट दुनिया के कई देशों में भेजी जा रही हैं।
कार्यक्रम में विभाग के तीन सेवानिवृत्त शिक्षकों प्रो. जीजी सानवाल, प्रो. प्रकाश चंद्र मिश्रा और प्रो. मिथिलेश कुमार मिश्रा को 'रेणु और नरेंद्र टुटेजा बायोरत्न लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया। वहीं, आईसीजीईबी नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. नवीन खन्ना को 'प्रो. जीजी सानवाल ओरेशन अवार्ड' प्रदान किया गया।
'प्रो. एसके अग्रवाल बेस्ट पेपर अवार्ड' अमेरिका की स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी में पोस्टडॉक्टरल फेलो डॉ. सना अख्तर उस्मानी को मिला। उनके शोध में कैंडिडा एल्बिकेंस यीस्ट में आयरन और वसा चयापचय के बदलावों का एंटीफंगल दवाओं के असर से संबंध सामने आया है।
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मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने शोध एवं नवाचार और पूर्व छात्र नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया। एएडीबी अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी समेत कई पूर्व छात्रों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
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कार्यक्रम में विभाग के तीन सेवानिवृत्त शिक्षकों प्रो. जीजी सानवाल, प्रो. प्रकाश चंद्र मिश्रा और प्रो. मिथिलेश कुमार मिश्रा को 'रेणु और नरेंद्र टुटेजा बायोरत्न लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया। वहीं, आईसीजीईबी नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. नवीन खन्ना को 'प्रो. जीजी सानवाल ओरेशन अवार्ड' प्रदान किया गया।
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'प्रो. एसके अग्रवाल बेस्ट पेपर अवार्ड' अमेरिका की स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी में पोस्टडॉक्टरल फेलो डॉ. सना अख्तर उस्मानी को मिला। उनके शोध में कैंडिडा एल्बिकेंस यीस्ट में आयरन और वसा चयापचय के बदलावों का एंटीफंगल दवाओं के असर से संबंध सामने आया है।
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मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने शोध एवं नवाचार और पूर्व छात्र नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया। एएडीबी अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी समेत कई पूर्व छात्रों ने भी अपने अनुभव साझा किए।