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अब लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े राजकीय व एडेड कॉलेजों के स्नातक शिक्षक भी करा सकेंग पीएचडी
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लखनऊ। अब लखनऊ विश्वविद्यालय के राजकीय और एडेड महाविद्यालयों के सभी नियमित शिक्षक भी पीएचडी करा सकेंगे। शनिवार रात संपन्न हुई लविवि की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया।
पिछले काफी समय से इन महाविद्यालयों के स्नातक के शिक्षक पीएचडी कराने की मांग कर रहे थे। अभी तक केवल पीजी के शिक्षकों को ही अनुमति थी। इस निर्णय के बाद स्नातक के शिक्षकों में भी खुशी की लहर है।
इसके अलावा बैठक में डीलिट, डीएससी व एलएलडी को संचालित करने की भी मंजूरी दे दी गई। पीएचडी के बाद पढ़ाई जारी रखने वालों को लाभ मिलेगा। अभी इसमें सीटें तय नहीं हैं। इसका ऑर्डिनेंस तैयार हो चुका है। कुछ शंकाएं थीं जिनको बैठक में दूर कर लिया गया है। राजभवन को ऑर्डिनेंस भेजकर पास करा लिया जाएगा। वहीं जून 2021 तक जिन पीएचडी के छात्रों ने थीसिस जमा नहीं कराई उनको एक और अवसर देते हुए दिसंबर तक जमा करने का मौका दिय गया है। कोरोना के चलते छात्र हित को देखते हुए उनको यह अवसर दिया गया। न्यूनतम समान पाठ्यक्रम को लेकर बैठक में काफी गर्मा-गर्मी रही।
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इन मुद्दों व प्रस्तावों पर भी लिया गया निर्णय
- न्यूनतम समान पाठ्यक्रम से संबंधित शासनादेश 13 जुलाई के अनुसार पुनर्विचार करने के लिए संकाय परिषदों को भेजना।
- कला संकाय के दो विभागों संस्कृत और दर्शनशास्त्र में पीएचडी के लिए छात्रों का पुर्नआवंटन।
- कला, विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षा, कला एवं शिल्प, आईएमएस, ओएनजीसी केंद्रके संकाय परिषद एवं बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा संस्तुत पाठ्यक्रमों पर अनुमोदन।
- इंजीनियरिंग संकाय के बीसीए में सीट संख्या 60 से 120 करना।
- बीटेक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को मंजूरी।
- इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेस में डी फार्मा और बीफार्मा पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी।
- पीएचडी में ऑनलाइन वाइवा वायस के संबंध में निर्णय के लिए संकायाध्यक्षों को अधिकृत करने का निर्णय।
- अभिनव गुप्प्त संस्थान में नयी शैक्षिक गतिविधियों की रूपरेखा और संकाय के रूप में उच्चीकरण के शासन के पत्र को अनुमोदन देना।
- इंस्टीट्यूट ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल इनर्जी को प्रशासन योजना का अनुमोदन देना।
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पिछले काफी समय से इन महाविद्यालयों के स्नातक के शिक्षक पीएचडी कराने की मांग कर रहे थे। अभी तक केवल पीजी के शिक्षकों को ही अनुमति थी। इस निर्णय के बाद स्नातक के शिक्षकों में भी खुशी की लहर है।
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इसके अलावा बैठक में डीलिट, डीएससी व एलएलडी को संचालित करने की भी मंजूरी दे दी गई। पीएचडी के बाद पढ़ाई जारी रखने वालों को लाभ मिलेगा। अभी इसमें सीटें तय नहीं हैं। इसका ऑर्डिनेंस तैयार हो चुका है। कुछ शंकाएं थीं जिनको बैठक में दूर कर लिया गया है। राजभवन को ऑर्डिनेंस भेजकर पास करा लिया जाएगा। वहीं जून 2021 तक जिन पीएचडी के छात्रों ने थीसिस जमा नहीं कराई उनको एक और अवसर देते हुए दिसंबर तक जमा करने का मौका दिय गया है। कोरोना के चलते छात्र हित को देखते हुए उनको यह अवसर दिया गया। न्यूनतम समान पाठ्यक्रम को लेकर बैठक में काफी गर्मा-गर्मी रही।
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इन मुद्दों व प्रस्तावों पर भी लिया गया निर्णय
- न्यूनतम समान पाठ्यक्रम से संबंधित शासनादेश 13 जुलाई के अनुसार पुनर्विचार करने के लिए संकाय परिषदों को भेजना।
- कला संकाय के दो विभागों संस्कृत और दर्शनशास्त्र में पीएचडी के लिए छात्रों का पुर्नआवंटन।
- कला, विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षा, कला एवं शिल्प, आईएमएस, ओएनजीसी केंद्रके संकाय परिषद एवं बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा संस्तुत पाठ्यक्रमों पर अनुमोदन।
- इंजीनियरिंग संकाय के बीसीए में सीट संख्या 60 से 120 करना।
- बीटेक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को मंजूरी।
- इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेस में डी फार्मा और बीफार्मा पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी।
- पीएचडी में ऑनलाइन वाइवा वायस के संबंध में निर्णय के लिए संकायाध्यक्षों को अधिकृत करने का निर्णय।
- अभिनव गुप्प्त संस्थान में नयी शैक्षिक गतिविधियों की रूपरेखा और संकाय के रूप में उच्चीकरण के शासन के पत्र को अनुमोदन देना।
- इंस्टीट्यूट ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल इनर्जी को प्रशासन योजना का अनुमोदन देना।