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क्लैट की मेरिट में राजधानी के मेधावियों का दबदबा
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क्लैट की मेरिट में लखनऊ के मेधावियों का दबदबा
देश के 22 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए आयोजित कॉमन लॉ ऐडमिशन टेस्ट (क्लैट) 2020 का परिणाम सोमवार शाम को जारी हो गया। आशीष शर्मा ने ऑल इंडिया 57वीं रैंक हासिल कर राजधानी का मान बढ़ाया है। काफी संख्या में राजधानी के मेधावियों ने क्लैट की ऑल इंडिया मेरिट में अपनी जगह पक्की कर सफलता का स्वाद चखा है। मेधावियों ने पढ़ाई पर फोकस को अपनी सफलता का मंत्र बताया।
सभी विषयों पर करें फोकस
सीएमएस अलीगंज से 94 प्रतिशत अंक के साथ मैंने इंटर उत्तीर्ण किया। उसके बाद मुझे लगा कि मैं विधि क्षेत्र में अपना कॅरिअर बना सकता हूं। इसके बाद कई न्यूजपेपर पढ़कर नोट्स बनाए। कोचिंग के नोट्स को भी रोजाना पढ़ता था। अपने रीडिंग और राइटिंग स्किल्स को जितना हो सके उतना बढ़ाया। जमकर अभ्यास किया और जितने हो सके उतने मॉक टेस्ट दिया। दूसरे छात्रों के लिए भी मेरी सलाह है कि वे रोजाना सभी विषयों पर फोकस करें। पिता सुधीर शर्मा जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में इंजीनियर हैं और मां शशि बाला शर्मा गृहणी।
- आशीष शर्मा, रैंक 57
जितना हो सके करें रीडिंग
पहले मैंने इंजीनियर बनने की ठानी। 2018 में मोंटफोर्ट इंटर कॉलेज से इंटर करने के बाद मैंने जेईई एडवांस क्लीयर किया और जोधपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला ले लिया। उसके बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं देश दुनिया से कट गया हूं। तब मैंने कॉलेज छोड़कर क्लैट की तैयारी की। जितना हो सके उतनी रीडिंग की। दूसरे छात्रों को भी मेरी यही सलाह है कि वे जमकर रीडिंग करें। न्यूज पेपर से नोट्स बनाए, बाकी मैटेरियल कोचिंग से लिए। मॉक टेस्ट का जमकर अभ्यास किया। बाकी छात्रों को मेरी सलाह है कि वे सभी विषयों पर बराबर फोकस करें। पिता आरपी शुक्ला हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं।
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-देवांश शुक्ला, रैंक 71
सेट किया था रोज का टारगेट
मुझे मानवाधिकार में बहुत रुचि है। मैं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और महिलाओं के अधिकारों के लिए इस क्षेत्र में जाना चाहती हूं। कानून ही एक ऐसा क्षेत्र है, जिसके माध्यम से आप दूसरों को उनका हक दिला सकते हैं। क्लैट के लिए मैंने एक साल तक तैयारी की। इस बार क्लैट का पैटर्न बदला हुआ था। उसके लिए रीडिंग स्किल्स को तराशा। हर दिन का मैंने पढ़ाई का टारगेट सेट कर रखा था, उसी के हिसाब से पढ़ती थी। मेरे भैया और भाभी भी विधि क्षेत्र में हैं। उनसे काफी मदद मिली। जो छात्र क्लैट की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए मेरी सलाह है कि वे रेगुलर मॉक टेस्ट देते रहे। सवाल हल करते रहें ताकि अभ्यास होता रहे।
- अवंतिका कालरा, रैंक 84
मॉक टेस्ट है बहुत जरूरी
मैं शुरू से डॉक्टर बनना चाहती थी। इंटर में विज्ञान भी लिया और आरएलबी से 92 प्रतिशत अंक से इंटर पास किया। लेकिन स्कूल के समय में भाषण, वाद विवाद आदि प्रतियोगिताओं में मैं बहुत बेहतर प्रदर्शन करती थी। कई लोगों की सलाह पर मैंने क्लैट की परीक्षा दी। इंटर करने के बाद मैंने एक साल ड्रॉप कर अच्छी तरह तैयारी की। रोजाना कई न्यूजपेपर पढ़ें, मॉक टेस्ट दिए और रीडिंग और राइटिंग पर ज्यादा जोर दिया। मैंने दिल्ली राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के टेस्ट में ऑल इंडिया 17वीं रैंक हासिल की है। पिता राजेश तिवारी निजी कंपनी में अधिकारी हैं और मां पूनम तिवारी गृहिणी हैं।
- आरुषि तिवारी, रैंक 85
इंजीनियर बनने का था मन लेकिन क्लैट को चुना
मूलत: मैं फैजाबाद का रहने वाला हूं। लखनऊ में रहकर मैंने क्लैट की तैयारी की। इंटर मैंने देहरादून से किया है। पहले मैं जेईई की तैयारी कर रहा था। लेकिन इंटर करने के बाद मेरा मन बदल गया। फिर मैंने क्लैट की तैयारी शुरू की। समय प्रबंधन के साथ सभी विषयों पर बराबर फोकस किया। जो छात्र क्लैट की तैयारी करना चाहते हैं उनको मेरी मेरी सलाह है कि वे फोकस होकर पढ़ाई करें। बेसिक क्लीयर करें और रीडिंग व राइटिंग स्किल्स को मजबूत करें। मॉक टेस्ट देना बहुत जरूरी है। पिता राधेश्याम शर्मा बिजली विभाग में कार्यरत हैं जबकि मां बीनू शर्मा गृहिणी हैं।
- देवांश भट्ट, रैंक 87
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देश के 22 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए आयोजित कॉमन लॉ ऐडमिशन टेस्ट (क्लैट) 2020 का परिणाम सोमवार शाम को जारी हो गया। आशीष शर्मा ने ऑल इंडिया 57वीं रैंक हासिल कर राजधानी का मान बढ़ाया है। काफी संख्या में राजधानी के मेधावियों ने क्लैट की ऑल इंडिया मेरिट में अपनी जगह पक्की कर सफलता का स्वाद चखा है। मेधावियों ने पढ़ाई पर फोकस को अपनी सफलता का मंत्र बताया।
सभी विषयों पर करें फोकस
सीएमएस अलीगंज से 94 प्रतिशत अंक के साथ मैंने इंटर उत्तीर्ण किया। उसके बाद मुझे लगा कि मैं विधि क्षेत्र में अपना कॅरिअर बना सकता हूं। इसके बाद कई न्यूजपेपर पढ़कर नोट्स बनाए। कोचिंग के नोट्स को भी रोजाना पढ़ता था। अपने रीडिंग और राइटिंग स्किल्स को जितना हो सके उतना बढ़ाया। जमकर अभ्यास किया और जितने हो सके उतने मॉक टेस्ट दिया। दूसरे छात्रों के लिए भी मेरी सलाह है कि वे रोजाना सभी विषयों पर फोकस करें। पिता सुधीर शर्मा जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में इंजीनियर हैं और मां शशि बाला शर्मा गृहणी।
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- आशीष शर्मा, रैंक 57
जितना हो सके करें रीडिंग
पहले मैंने इंजीनियर बनने की ठानी। 2018 में मोंटफोर्ट इंटर कॉलेज से इंटर करने के बाद मैंने जेईई एडवांस क्लीयर किया और जोधपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला ले लिया। उसके बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं देश दुनिया से कट गया हूं। तब मैंने कॉलेज छोड़कर क्लैट की तैयारी की। जितना हो सके उतनी रीडिंग की। दूसरे छात्रों को भी मेरी यही सलाह है कि वे जमकर रीडिंग करें। न्यूज पेपर से नोट्स बनाए, बाकी मैटेरियल कोचिंग से लिए। मॉक टेस्ट का जमकर अभ्यास किया। बाकी छात्रों को मेरी सलाह है कि वे सभी विषयों पर बराबर फोकस करें। पिता आरपी शुक्ला हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं।
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-देवांश शुक्ला, रैंक 71
सेट किया था रोज का टारगेट
मुझे मानवाधिकार में बहुत रुचि है। मैं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और महिलाओं के अधिकारों के लिए इस क्षेत्र में जाना चाहती हूं। कानून ही एक ऐसा क्षेत्र है, जिसके माध्यम से आप दूसरों को उनका हक दिला सकते हैं। क्लैट के लिए मैंने एक साल तक तैयारी की। इस बार क्लैट का पैटर्न बदला हुआ था। उसके लिए रीडिंग स्किल्स को तराशा। हर दिन का मैंने पढ़ाई का टारगेट सेट कर रखा था, उसी के हिसाब से पढ़ती थी। मेरे भैया और भाभी भी विधि क्षेत्र में हैं। उनसे काफी मदद मिली। जो छात्र क्लैट की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए मेरी सलाह है कि वे रेगुलर मॉक टेस्ट देते रहे। सवाल हल करते रहें ताकि अभ्यास होता रहे।
- अवंतिका कालरा, रैंक 84
मॉक टेस्ट है बहुत जरूरी
मैं शुरू से डॉक्टर बनना चाहती थी। इंटर में विज्ञान भी लिया और आरएलबी से 92 प्रतिशत अंक से इंटर पास किया। लेकिन स्कूल के समय में भाषण, वाद विवाद आदि प्रतियोगिताओं में मैं बहुत बेहतर प्रदर्शन करती थी। कई लोगों की सलाह पर मैंने क्लैट की परीक्षा दी। इंटर करने के बाद मैंने एक साल ड्रॉप कर अच्छी तरह तैयारी की। रोजाना कई न्यूजपेपर पढ़ें, मॉक टेस्ट दिए और रीडिंग और राइटिंग पर ज्यादा जोर दिया। मैंने दिल्ली राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के टेस्ट में ऑल इंडिया 17वीं रैंक हासिल की है। पिता राजेश तिवारी निजी कंपनी में अधिकारी हैं और मां पूनम तिवारी गृहिणी हैं।
- आरुषि तिवारी, रैंक 85
इंजीनियर बनने का था मन लेकिन क्लैट को चुना
मूलत: मैं फैजाबाद का रहने वाला हूं। लखनऊ में रहकर मैंने क्लैट की तैयारी की। इंटर मैंने देहरादून से किया है। पहले मैं जेईई की तैयारी कर रहा था। लेकिन इंटर करने के बाद मेरा मन बदल गया। फिर मैंने क्लैट की तैयारी शुरू की। समय प्रबंधन के साथ सभी विषयों पर बराबर फोकस किया। जो छात्र क्लैट की तैयारी करना चाहते हैं उनको मेरी मेरी सलाह है कि वे फोकस होकर पढ़ाई करें। बेसिक क्लीयर करें और रीडिंग व राइटिंग स्किल्स को मजबूत करें। मॉक टेस्ट देना बहुत जरूरी है। पिता राधेश्याम शर्मा बिजली विभाग में कार्यरत हैं जबकि मां बीनू शर्मा गृहिणी हैं।
- देवांश भट्ट, रैंक 87