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लखनऊ : अभी नही हो रही सफाई कर्मियों की भर्ती, आउटसोर्सिंग से ही चलेगा काम, बिना बजट अभी नही रखे जाएंगे हटाए गए कर्मचारी

Sun, 10 Apr 2022 08:51 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 10 Apr 2022 08:51 PM IST
सार

मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए निगम प्रशासन नियमित तो दूर की बात कार्यदायी से तैनात रहे उन तीन हजार सफाई कर्मचारियों को भी वापस नही लेगा जो बजट संकट केचलते बीते माह हटाए गए थे।

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Lucknow: Recruitment of cleaning workers is not happening now, work will be done only by outsourcing, without budget, the removed employees will not be kept
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

सफाई कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार उठाई जा रही मांग के बाद भी नगर निगम में फिलहाल सफाई कर्मियों के खाली पद भरे जाने के आसार नही है। मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए निगम प्रशासन नियमित तो दूर की बात कार्यदायी से तैनात रहे उन तीन हजार सफाई कर्मचारियों को भी वापस नही लेगा जो बजट संकट के चलते बीते माह हटाए गए थे।

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नगर निगम में करीब 10 हजार सफाई कर्मियों की जरूरत आबादी केमानक के हिसाब से है मगर दो हजार ही नियमित सफाई कर्मी ही हैं। कमी को पूरा करने केलिए आउटसोर्सिंग से काम चलाया जा रहा है। जिससे खर्च भी कम आ रहा है। ऐसे में नगर निगम में जल्द नियमित नियुक्ति होने के आसार नही है। नगर निगम प्रशासन का मानना है दस हजार की आबादी पर 28 सफाई कर्मी का नियम है। उस हिसाब से नियमित और कार्यदायी की संख्या को मिलाकर सफाई कर्मी पूरे हैं।
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नियमित सफाई कर्मियों की भर्ती को लेकर शासन से ही आदेश जारी होना है। उसको लेकर भी अभी कोई आसार दिखाई नही दे रहे हैं क्योंकि राज्य वित्त में जिस तरह से कटौती बढ़ी है उससे मौजूदा कर्मचारियों को ही वेतन-पेंशन देने में निगम प्रशासन को संकट का सामना करना पड़ रहा है। जानकार कहते हैं कि नियमित भर्ती के लिए शासन को राज्य वित्त में कटौती को बंद करके उसे और बढ़ृाना पड़ेगा। जिसके आसार फिलहाल दिखाई नही दे रहे हैं।
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नियमित पर आ रहा पांच गुना अधिक खर्च
नगर निगम में करीब दो हजार नियमित सफाई कर्मचारी हैं। जिनके वेतन व अन्य देयकों पर हर महीने करीब 18 करोड़ रुपए का खर्च है। वहीं कार्यदायी से जो करीब 8000 सफाई कर्मी तैनात हैं उन पर हर महीने करीब 10 करोड़ रुपए खर्च आ रहा है। चूंकि मानक के तहत नियमति और कार्यदायी से तैनात कर्मचारियों को मिलाकर संख्या पूरी है। ऐसे में अब जो तीन हजार कार्यदायी कर्मचारी हटाए गए थे उनको भी प्रशासन अब रखने केपक्ष मे नही है।

कर्मचारी लगातार उठा रहे मांग
सफाई कर्मचारी नेता नरेश बाल्मीकि, अशोक बाल्मीकि, राजेंद्र बाल्मीकि और राज्य सफाई कर्मचारी आयोग केसदस्य श्यामलाल बाल्मीकि लगातार सफाई कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने की मांग केसाथ ही ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग उठा रहे हैं। बीती पांच अप्रैल को नगर निगम मुख्यालय सफाई कर्मचारियेां ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया में सफाई कर्मचरियों केसंयुक्त मोर्चा ने यह मांगें रखी थीं मगर उस पर अब तक हुआ कुछ नही।


सफाई कर्मचारी संगठनों की जो मांग है उसको लेकर विचार किया गया। कार्यदायी केजो कर्मचारी बजट की कमी से हटाए गए उनको तभी फिर से रखा जा सकता है जब शासन से बजट बढ़ जाए। नियमित, कार्यदायी और संविदा मिलाकर 11 हजार से अधिक कर्मचारी हैं। ऐसे में आबादी केहिसाब से सफाई कर्मचारी रखने का जो प्रावधान है वह पूरा हो रहा है। ऐेसे में और कर्मचारी रखने की अभी जरूरत भी नही है।
अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त

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