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लखनऊ : तय कार्यक्रम पर सुपरटेक को टावर ढहाने का काम करना होगा पूरा, सभी संबंधित विभागों से दिलाई गई एनओसी
Sat, 05 Mar 2022 02:43 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sat, 05 Mar 2022 02:43 PM IST
सार
नोएडा का चर्चित सुपरटेक-ईमाराल्ड मामला करीब 10 वर्ष पुराना है। ग्रुप हाउसिंग भूखंड संख्या-जीएच-4, सेक्टर-93 ए, नोएडा का आवंटन और मानचित्र स्वीकृति वर्ष 2004 से वर्ष 2012 के बीच की गई।
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सुपरटेक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नोएडा में सुपरटेक को निर्धारित कार्यक्रम के तहत अपने अवैध टावर ढहाने होंगे। इसके लिए शासन ने सभी संबंधित विभागों से एनओसी दिलवा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अपने 4 फरवरी के आदेश में किसी तरह के बदलाव से इनकार कर दिया है।
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नोएडा का चर्चित सुपरटेक-ईमाराल्ड मामला करीब 10 वर्ष पुराना है। ग्रुप हाउसिंग भूखंड संख्या-जीएच-4, सेक्टर-93 ए, नोएडा का आवंटन और मानचित्र स्वीकृति वर्ष 2004 से वर्ष 2012 के बीच की गई। 54815 वर्ग मीटर भूखंड पर निर्माण के लिए मानचित्र को स्वीकृति वर्ष 2005, 2006, 2009 और 2012 में दी गई। इस प्रकरण में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में याचिका दायर की थी।
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इसमें कहा गया था कि बनाए गए टावरों के बीच नियमानुसार न्यूनतम दूरी नहीं छोड़ी गई। अप्रैल 2014 में उच्च न्यायालय, इलाहाबाद ने टावर संख्या टी-16 व टी-17 को ध्वस्त करने का आदेश दिया। अपील पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने भी 31 अगस्त 2021 के अपने आदेश में कहा कि टावर संख्या टी-16 और टी-17 को तीन माह में सुपरटेक के व्यय पर ध्वस्त किया जाए और आवंटियों की धनराशि दो माह में 12 फीसदी ब्याज सहित वापस की जाए।
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तब से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लगातार किसी न किसी रूप में बना है। प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि ध्वस्तीकरण का काम पूरा करने के लिए प्रदूषण, विस्फोटक और अग्निशमन समेत करीब 12 विभागों ने एनओसी दे दी है। ध्वस्तीकरण का काम शुरू भी हो चुका है। इस पर 28 फरवरी को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि ध्वस्तीकरण के कार्यक्रम का सख्ती से पालन किया जाए। नोएडा अगली तारीख के सूचीबद्ध होने से पहले अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट दे। साथ ही कहा कि इस मामले में उसके 4 फरवरी के आदेश में संशोधन के लिए कोई उचित आधार नहीं है। इसलिए संशोधन संबंधी याचिका को खारिज किया जाता है। शासन के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि इस प्रकरण पर पूरी तरह से नजर है, ताकि ध्वस्तीकरण में किसी वजह से देरी का बहाना न मिल सके।