{"_id":"6518db6db573eefaaf0bddb3","slug":"lucknow-notice-to-rahul-gandhi-in-case-of-remarks-on-savarkar-hearing-to-be-held-on-november-1-2023-10-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ: फिर विवादों में राहुल गांधी, सावरकर पर टिप्पणी के मामले में नोटिस, एक नवंबर को होगी सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ: फिर विवादों में राहुल गांधी, सावरकर पर टिप्पणी के मामले में नोटिस, एक नवंबर को होगी सुनवाई
Sun, 01 Oct 2023 10:19 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 01 Oct 2023 10:19 AM IST
सार
याचिकाकर्ता नृपेंद्र पांडेय ने एमपी/एमएलए के विशेष एसीजेएम अम्बरीष कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किए जाने की मांग वाली अर्जी दी थी।
विज्ञापन
राहुल गांधी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा वीर सावरकर पर की गई टिप्पणी के खिलाफ दाखिल परिवाद को खारिज किए जाने के निचली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को जिला जज अश्विनी कुमार त्रिपाठी ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने निगरानी याचिका पर सुनवाई के लिए राहुल गांधी को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई के लिए एक नवंबर की तारीख तय की है। साथ ही पत्रावली को सुनवाई के लिए एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश की कोर्ट मे स्थानांतरित कर दिया है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - सुप्रीम कोर्ट में बोली योगी सरकार: अतीक अहमद हत्याकांड में पुलिस की नहीं थी कोई गलती, ना ही विकास दुबे केस में
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - फंस रहा है कांग्रेस-सपा गठबंधन?: लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ने का फीडबैक लेगी कांग्रेस, फिर तय होगी रणनीति
याचिकाकर्ता नृपेंद्र पांडेय ने एमपी/एमएलए के विशेष एसीजेएम अम्बरीष कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किए जाने की मांग वाली अर्जी दी थी। इसमें आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सावरकर के खिलाफ 17 नवंबर 2022 को अकोला महाराष्ट्र में जानबूझकर टिप्पणी की थी। राहुल गांधी ने देश के समस्त स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है।
राहुल गांधी ने निरंतर अंग्रेजों का पेंशनर, अंग्रेजों का नौकर, मददगार, अपनी रिहाई के लिए माफी मांगने वाला बताकर अनेकों दोषारोपण किया। निचली अदालत ने पहले इस अर्जी को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया, लेकिन बाद में परिवाद को क्षेत्राधिकार के बाहर का बताते हुए खारिज कर दिया था। निचली कोर्ट के इसी आदेश को निगरानी याचिका के जरिये चुनौती दी गई है।