फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Lucknow News: While fixing the bail amount, the trial court should consider the status of the prisoner

Lucknow News : जमानत राशि तय करते वक्त बंदी की सामाजिक और अर्थिक स्थिति हैसियत पर गौर करें ट्रायल कोर्ट

Tue, 04 Apr 2023 09:41 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 04 Apr 2023 09:41 PM IST
सार

कहा कि अपराधिक मामलों में समुचित जमानतनामों की जरुरत से भी इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में ट्रायल कोर्ट जमानत राशि तय करते समय बंदी की हैसियत पर अवश्य गौर करें।

विज्ञापन
Lucknow News: While fixing the bail amount, the trial court should consider the status of the prisoner
लखनऊ हाईकोर्ट

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आपराधिक मामलों में बंदियों की जमानत मंजूर होने के बाद जमानतनामे दाखिल न कर पाने से जेल में रहने के मुद्दे का गंभीरता से संज्ञान लिया है। जमानत मंजूर होने के बाद भी जमानतनामे दाखिल न कर पाने से जेल में रहने की विवशता को कोर्ट ने आरोपी की व्यक्तिगत आजादी से जोड़कर देखने पर जोर दिया।

विज्ञापन


कहा कि अपराधिक मामलों में समुचित जमानतनामों की जरूरत से भी इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में ट्रायल कोर्ट जमानत राशि तय करते समय बंदी की हैसियत पर अवश्य गौर करें। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकल पीठ ने बाराबंकी के एक फौजदारी मामले में आरोपी अरविंद सिंह की याचिका को मंजूर करते हुए सुनाया।
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि जमानत राशि निर्धारित करते समय ट्रायल कोर्ट को बंदी की सामाजिक और अर्थिक स्थिति पर भी गौर करना चाहिए। कोर्ट ने न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (जेटीआरआई),लखनऊ को भी इन मुद्दों पर शोध करने के लिए कहा। इस मामले में याची का कहना था कि छह केसों में उसकी जमानत मंजूर हुई है लेकिन वह अलग अलग जमानत नामे दाखिल कर पाने में असमर्थ है। ट्रायल कोर्ट ने हर केस के लिए अलग जमानत राशि निर्धारित की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने इस अहम मुद्दे पर विस्तृत आदेश जारी कर याची से सभी छह केसों के लिए एक ही जमानतनामा लिए जाने का आदेश ट्रायल कोर्ट को दिया । यह सभी मामले एक ही कंपनी द्वारा जमाकर्ताओं के खिलाफ किए गए अपराधो से संबंधित हैं। कोर्ट ने इस मुद्दे पर सांविधानिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जेटीआरआई जैसे संस्थानों को इन पर गहन शोध करना चाहिए। इनमें बंदियों की समाजिक व अर्थिक स्थिति और जमानत दाखिल करने की क्षमता, जमानत मंजूर होने पर जमानतनामे न दाखिल कर पाने की वजह से रिहाई न हो पाना आदि मसलों को शामिल किया जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed