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Lucknow News: व्यक्ति के फिनायल पीने पर आधे घंटे के भीतर अस्पताल ले जाए
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व्यक्ति के फिनायल पीने पर आधे घंटे के भीतर अस्पताल ले जाए
- केजीएमयू में टॉक्सिकोलॉजी पर कार्यशाला हुई, विशेषज्ञ ने साझा की जानकारी
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। कई दफा लोग आवेश में आकर घरों में रखी फिनायल पी लेते हैं। इससे उनकी
जान खतरे में पड़ जाती है। ऐसा होने पर बिना देरी किए आधे घंटे के अंदर मरीज को अस्पताल ले जाए। समय पर इलाज से मरीज की काफी हद तक जान बचाई जा सकती है। यह जानकारी केजीएमयू में फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा ने दी। शुक्रवार को केजीएमयू के कलाम सेंटर में टॉक्सिकोलॉजी पर कार्यशाला हुई।
फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा ने कहा कि कई लोग गलती या फिर गुस्से में फिनाइल पी लेते हैं। डिटरजेंट पी लेते हैं। इससे पेट को गंभीर नुकसान हो सकता है। पेट की परतों में सुराख हो सकता हैं। ऐसे मरीजों का समय पर इलाज जरूरी है। इसका दवाओं से इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि कीटनाशक पीने से भी पेट को नुकसान होता है। कीटनाशक के प्रभाव को कम करने के लिए मुंह के रास्ते पेट तक पाइप डाली जाती है। जिसमें पानी भरा जाता है। जिसे कुछ देर बाद निकाल दिया जाता है। ऐसा तब तक किया जाता है जब तक पानी साफ न निकले। जबकि मिट्टी का तेल (कैरोसिन) पीने ने फेफड़ों को नुकसान होता है। खाने की नली के भी क्षतिग्रस्त होने की आशंका रहती है। उन्होंने बताया कि टॉक्सिकोलॉजी यूनिट में लैब में खून व यूरीन की जांच से जहर के प्रकार का पता लगाया जाता है। जहर ने कितना शरीर पर असर किया है? उसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में हर दिन जहर या दूसरे घातक पदार्थों को पीने के बाद दो से तीन मरीज आ रहे हैं। जिन्हें मेडिसिन विभाग में भर्ती कर इलाज मुहैया कराया जा रहा है।
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- केजीएमयू में टॉक्सिकोलॉजी पर कार्यशाला हुई, विशेषज्ञ ने साझा की जानकारी
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। कई दफा लोग आवेश में आकर घरों में रखी फिनायल पी लेते हैं। इससे उनकी
जान खतरे में पड़ जाती है। ऐसा होने पर बिना देरी किए आधे घंटे के अंदर मरीज को अस्पताल ले जाए। समय पर इलाज से मरीज की काफी हद तक जान बचाई जा सकती है। यह जानकारी केजीएमयू में फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा ने दी। शुक्रवार को केजीएमयू के कलाम सेंटर में टॉक्सिकोलॉजी पर कार्यशाला हुई।
फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा ने कहा कि कई लोग गलती या फिर गुस्से में फिनाइल पी लेते हैं। डिटरजेंट पी लेते हैं। इससे पेट को गंभीर नुकसान हो सकता है। पेट की परतों में सुराख हो सकता हैं। ऐसे मरीजों का समय पर इलाज जरूरी है। इसका दवाओं से इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि कीटनाशक पीने से भी पेट को नुकसान होता है। कीटनाशक के प्रभाव को कम करने के लिए मुंह के रास्ते पेट तक पाइप डाली जाती है। जिसमें पानी भरा जाता है। जिसे कुछ देर बाद निकाल दिया जाता है। ऐसा तब तक किया जाता है जब तक पानी साफ न निकले। जबकि मिट्टी का तेल (कैरोसिन) पीने ने फेफड़ों को नुकसान होता है। खाने की नली के भी क्षतिग्रस्त होने की आशंका रहती है। उन्होंने बताया कि टॉक्सिकोलॉजी यूनिट में लैब में खून व यूरीन की जांच से जहर के प्रकार का पता लगाया जाता है। जहर ने कितना शरीर पर असर किया है? उसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में हर दिन जहर या दूसरे घातक पदार्थों को पीने के बाद दो से तीन मरीज आ रहे हैं। जिन्हें मेडिसिन विभाग में भर्ती कर इलाज मुहैया कराया जा रहा है।
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