फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   LUCKNOW NEWS

Lucknow News: भू-माफिया के इशारे पर नाचे एलडीए के अफसर, कर दिया नदी की जमीन का सौदा

Wed, 27 Sep 2023 02:19 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Sep 2023 02:19 AM IST
विज्ञापन
LUCKNOW NEWS

विज्ञापन

लखनऊ। गोमती नदी में स्थित मलेशेमऊ के खसरा संख्या-673क की 6070 वर्गमीटर जमीन का एलडीए से समायोजन कराने का ठेका एक भू-माफिया ने तीन करोड़ रुपये में लिया था। यह भू-माफिया गोमतीनगर के विभूतिखंड में एक जमीन के समायोजन के मामले में जेल भी जा चुका है। ताजा मामला सामने आने पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी चल रही है।

नदी की जमीन के समायोजन में गोलमाल की कहानी लंबी है। मेसर्स राज गंगा डवलपर्स के पार्टनर संचित अग्रवाल ने सबसे पहले 30 अक्तूबर 2006 को गोमतीनगर के मलेशेमऊ गांव के खसरा संख्या-673क के 6070 वर्गमीटर के बदले जमीन के समायोजन का आवेदन किया। यह फाइल 2015 तक पड़ी रही। वर्ष 2015 में समायोजन की फाइल तेजी से दौड़ने लगी। इस दरम्यान समायोजन का काम पूर्व वीसी सतेंद्र सिंह के हाथ में था।
विज्ञापन




सूत्रों का कहना है कि पूर्व वीसी सत्येंद्र के इशारे पर ही अर्जन के पूर्व अमीन राम प्रताप सिंह ने खसरा संख्या-673क की जमीन गोमती नदी में न होने की रिपोर्ट पेश की थी। यहीं नहीं अमीन ने खसरा संख्या-673 ख की जमीन को नदी में होने का दावा किया था। इस जमीन के समायोजन के बदले में मिले भूखंड भी महंगे रेट में बिक गए। इनके खरीदार भी फंस गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सूत्रों का यह भी कहना है कि इस समायोजन को पूर्व वीसी अक्षय त्रिपाठी ही निरस्त करने जा रहे थे। पर, तब भू-माफिया से सांठगांठ रखने वाले एलडीए के एक अफसर ने बड़े राजनेता का मामला होने का झांसा देकर उनसे फाइल को किनारे करवा दिया था।



जितेंद्र कटियार ने कुछ ज्यादा ही तेज दौड़ाई फाइल

मेसर्स राज गंगा डवलपर्स के पार्टनर संचित अग्रवाल की समायोजन की सुस्त फाइल की रफ्तार बढ़ाने में पूर्व उपसचिव जितेंद्र कटियार की भी अहम भूमिका रही। समायोजन के पक्ष में कटियार ने लंबी-चौड़ी नोटिंग की थी। इससे उनके भी इस फर्जीवाड़े में शामिल होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।



पूर्व अधिशासी अभियंता भूपेंद्र वीर सिंह भी सवालों के घेरे में

मेसर्स राज गंगा डवलपर्स को नदी की जमीन के बदले में 100 करोड़ कीमत की जमीन देने के वक्त एलडीए के पूर्व अधिशासी अभियंता भूपेंद्र वीर सिंह के पास अर्जन, मानचित्र एवं संपत्ति इकाई की जिम्मेदारियां थीं। उन्होंने भी इस फर्जीवाड़े में अहम भूमिका निभाई। कुछ साल पहले ही सेवानिवृत्त हुए भूपेंद्र की कारगुजारियों को फाइल खुद बता देती है।




यह आपराधिक मामला है...फिर क्यों नहीं दर्ज कराया केस

मौजूदा वीसी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने 100 करोड़ की जमीन समायोजन को तो निरस्त कर दिया...। भूखंडों को कब्जे में लेने की बात भी कही। यह सब आपराधिक मामला है, फिर भी अब तक केस नहीं दर्ज कराया। इसको लेकर सवाल खड़े खड़े हो रहे हैं।



समायोजन के फर्जीवाड़े के प्रमुख किरदार, जिसकी गवाही फाइल खुद देती है

- सतेंद्र सिह, तत्कालीन वीसी



- जितेंद्र कटियार, तत्कालीन उपसचिव

-नितिन मित्तल, तत्कालीन मुख्य नगर नियोजक



- भूपेंद्र वीर सिंह, तत्कालीन अधिशासी अभियंता

- राम प्रताप सिंह, तत्कालीन अमीन अर्जन इकाई
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed