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Lucknow News : भगोड़े तस्करों की तलाश में पूरे प्रदेश में खुफिया टीमों का जाल
Sun, 07 Apr 2024 11:20 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sun, 07 Apr 2024 11:20 PM IST
सार
इस बीच जांच में गिरफ्तार शेष तस्करों के पास एक के अलावा किसी के पास सोना नहीं मिला। आशंका है कि उनकी मोडस आपरेंडी 50 ग्राम सोना पकड़वाने के एवज में 3.12 करोड़ की सिगरेट बाहर निकालने की थी।
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लखनऊ एयरपोर्ट
- फोटो : amar ujala
विस्तार
भगोड़े तस्करों की तलाश में 29 ठिकानों पर मारे गए छापों की कार्यवाही रविवार को पूरी हो गई। कुछ तस्करों की रेंंज रुड़की के आसपास पाई गई है। उनकी धरपकड़ के लिए प्रदेश और उत्तराखंड में खुफिया टीमों का जाल बिछा दिया गया है। सोमवार को गिरफ्तार किए गए छह तस्करों मे से एक से पूछताछ की अनुमति मिली है।
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इस बीच जांच में गिरफ्तार शेष तस्करों के पास एक के अलावा किसी के पास सोना नहीं मिला। आशंका है कि उनकी मोडस आपरेंडी 50 ग्राम सोना पकड़वाने के एवज में 3.12 करोड़ की सिगरेट बाहर निकालने की थी। भगोड़े तस्करों के पास सोना है या नहीं, इसका खुलाासा पूछताछ के बाद ही हो सकेगा। इस बीच इस लापरवाही में एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
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कस्टम टीम की हिरासत में और हिरासत से भागे सभी 35 तस्कर सोने के साथ साथ सिगरेट की तस्करी में लिप्त हैं। पिछले छह महीने में सिगरेट तस्करी में तेजी की ये एक बड़ी वजह है। दरअसल प्रदेश में विदेशी सिगरेटों की मांग पिछले पांच साल में तीन गुना से भी ज्यादा हो गई है। इनमें से 80 फीसदी सिगरेट तस्करी के रास्ते यूपी और अन्य राज्यों में पहुंच रही हैं। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के हर छोटे से छोटे जिलों में विदेशी सिगरेट के सप्लायरों का सिंडीकेट हावी है इसीलिए इनकी उपलब्धता गांव-देहात तक है।
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कुछ समय पहले नोएडा एसटीएफ ने हापुड़ में छाप मारकर 75 लाख रुपये की विदेशी सिगरेट सीज की थीं। ये सिगरेट एक कैंटर में लदे 30 हजार से ज्यादा डिब्बों में भरी हुई थीं। जांच में पता चला कि ये सिगरेट इंडोनेशिया से स्मगलिंग कर के लाई जा रही थीं। जांच में पुलिस ने पाया कि सिगरेट को ट्रक के टायरों के नीचे छिपाकर ले जाया जा रहा था। गिरफ्तार दो आरोपियों की पहचान संभल के रवि और बुलंदशहर सिकंदराबाद निवासी मुजम्मिल के रूप में हुई। पूछताछ में पता चला कि दोनों आरोपी असम से गुहाटी, गौरखपुर, लखनऊ, सीतापुर, शाहजहांपुर और मुरादाबाद के रास्ते हापुड़ पहुंचे थे।
सिगरेट की खपत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यह दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। मांग की आपूर्ति के लिए बाहर से सिगरेट आयात भी की जाती है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में सिगरेट पर लगने वाली ड्यूटी को 16% बढ़ाने का ऐलान किया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि डीजल, पेट्रोल और आयरन-स्टील के बाद सरकार को सबसे ज्यादा टैक्स सिगरेट जैसे तंबाकू उत्पादों से मिलता है।
डीआरआई की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में 93 करोड़ रुपए की अवैध सिगरेट जब्त की गई जो 23-24 में 300 करोड़ से ज्यादा हो गई। विदेशी सिगरेट में सबसे ज्यादा तस्करी गरम गुडांग की हो रही है। गुडांग गरम इंटरनेशनल एक देशी इंडोनेशियाई लौंग सिगरेट ब्रांड है। इस सिगरेट में अधिक निकोटीन और टार होता है और यह अधिक हानिकारक है। सिगरेट के धुएं में मौजूद जहरीले रसायन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा एस्से,डनहिल,मॉन्ड, मैनचेस्टर ब्रांड की सिगरेटों की भी धड़ल्ले से तस्करी हो रही है।
आंख में धूल झोंककर सिगरेट की तस्करी
विदेश से आने वाले कंटेनर को चेक करने के अलग-अलग नोटिफिकेशन हैं। जब भी कोई नई कंपनी पहला कंटेनर मंगवाती है तो डीआरआई उसे पूरी तरह जांच करके क्लियरेंस देती है। बाद में मंगाए जाने वाले कंटेनरों में रेंडम चेकिंग सिस्टम शुरू होता है। नोएडा व गुड़गांव की एक फर्म का खेल पकड़ा था। जिसमें पहले कांच के उत्पादों कंटेनर मंगवाकर जांच कराई गई। फर्म ने दूसरे कंटेनर में ही विदेशी सिगरेट भरवाकर मंगवा ली। डीआरआई को संदेह है कि सिगरेट की तस्करी में लिप्त कारोबारी नई-नई फर्म बनाकर इसी तरह तस्करी कर रहे हैं।