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Lucknow News : हाईकोर्ट के फैसले से 60-70 हजार कार्मिकों में पुरानी पेंशन की आस जगी

Fri, 03 Nov 2023 03:31 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 03 Nov 2023 03:31 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अप्रैल, 2005 के पहले चयनित लेखपालों के लिए पुरानी पेंशन का हकदार बताने से उत्तर प्रदेश के 60-70 हजार कार्मिकों व शिक्षकों में आस जगी है।

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Lucknow News: High Court's decision revives hope of old pension among 60-70 thousand employees
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अप्रैल, 2005 के पहले चयनित लेखपालों के लिए पुरानी पेंशन का हकदार बताने से उत्तर प्रदेश के 60-70 हजार कार्मिकों व शिक्षकों में आस जगी है। वे इसी तरह के आधारों पर लंबे समय से पुरानी पेंशन दिए जाने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार भी 22 दिसंबर 2003 से पहले विज्ञापित या अधिसूचित पदों पर शामिल हुए कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम का विकल्प दे चुका है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अप्रैल 2005 के पहले चयनित लेखपालों पुरानी पेंशन का लाभ देने का हकदार बताया है। इससे पहले केंद्र सरकार ने भी केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम के तहत ऐसे कर्मचारियों को एनपीएस (नई पेंशन स्कीम ) से ओपीएस (पुरानी पेंशन स्कीम) में आने का विकल्प प्रदान किया था, जिनकी भर्ती का विज्ञापन 22 दिसंबर 2003 से पहले निकाला गया था। ऐसे कर्मियों को 31 अगस्त तक किसी एक विकल्प का चयन करने की मोहलत दी गई थी। यहां बता दें कि केंद्र सरकार ने अपने यहां एक जनवरी 2004 या उसके बाद नियुक्त कार्मिकों के लिए नई पेंशन स्कीम लागू की, जबकि यूपी में यह एक अप्रैल 2005 या उसके बाद नियुक्त कार्मिकों के लिए ओपीएस बंद करके एनपीएस लागू की।
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बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग जुटा रहा ब्यौरा
उत्तर प्रदेश में 22 फरवरी 2004 को प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर करीब 38 बेसिक शिक्षकों का चयन हुआ था। इसके अलावा प्राथमिक व माध्यमिक विभाग में ऐसे शिक्षक भी हैं, जिनका चयन एक अप्रैल 2005 से पहले हो चुका था, लेकिन कार्यभार उसके बाद ग्रहण किया। इस तरह से करीब 45-50 हजार शिक्षक हैं, जो पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ मांग रहे हैं। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों का ब्यौरा जुटाना भी प्रारंभ कर दिया है।
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ये पहले शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया को मानते हैं ओपीएस का आधार
शिक्षकों की तरह ही राजस्व, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, एसजीपीजीआई, केजीएमयू समेत तमाम प्रमुख विभागों व राज्य विश्विद्यालयों में ऐसे कार्मिक हैं, जिनके चयन की प्रक्रिया एक अप्रैल 2005 से पहले शुरू हो चुकी थी, लेकिन ज्वाइनिंग उसके बाद हुई। इस कटऑफ डेट के बाद उत्तराखंड से यूपी आने वाले कार्मिक और एक सरकारी नौकरी छोड़कर दूसरी नौकरी ज्वाइन करने वाले कार्मिक भी पुरानी पेंशन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना कि पहले वाले राज्य या विभाग में उन्हें ओपीएस का लाभ मिलता था, जो जारी रहना चाहिए। इन सब कार्मिकों की संख्या 15-20 हजार के बीच बताई जा रही है।

केंद्र की तर्ज पर यहां भी मिले लाभ
जो लाभ केंद्र ने अपने कार्मिकों को दे दिया, उसे राज्य में भी लागू किया जाना चाहिए। इस मुद्दे को हम हर फोरम पर उठाएंगे।-अतुल मिश्रा, महामंत्री, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद

7 नवंबर को शासन से वार्ता
केंद्र के कहने पर ही यूपी सरकार ने पुरानी पेंशन की सुविधा को वापस लिया था। अब जिन कार्मिकों को केंद्र ने ओपीएस का विकल्प दे दिया, उन्हें राज्य में भी यह हक मिलना चाहिए। 7 नवंबर को शासन से हमारी वार्ता भी है, जिसमें इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। -हरिकिशोर तिवारी, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद


क्या है ओपीएस व एनपीएस में अंतर
पुरानी पेंशन स्कीम में वेतन से कोई कटौती नहीं होती, लेकिन नई पेंशन स्कीम में कर्मचारियों के वेतन से 10 फीसदी कटौती होती है। पुरानी पेंशन स्कीम में सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी खजाने से वेतन की आधी राशि जीवन भर पेंशन के रूप में दी जाती है, जबकि एनपीएस में पेंशन शेयर बाजार पर निर्भर है। इसलिए रिटायरमेंट के बाद कितनी राशि पेंशन के रूप में मिलेगी, इसकी पहले से जानकारी नहीं रहती है।

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