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Lucknow News : चुनाव आयोग ने रालोद का राज्य पार्टी का दर्जा छीना, छह प्रतिशत वोट बैंक हासिल करने में नाकाम
Tue, 11 Apr 2023 12:17 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 11 Apr 2023 12:17 AM IST
सार
केंद्रीय निर्वाचन आयेाग ने राष्ट्रीय लोक दल को राज्य स्तर की पार्टी का दर्जा बरकरार रखने का कई बार मौका दिया। आयोग ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से रालोद के राज्य स्तर की पार्टी के दर्जे की समीक्षा करनी शुरू की थी।
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रालोद प्रमुख चौधरी जयंत सिंह।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
भारत निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रीय लोक दल की राज्य स्तर की पार्टी का दर्जा वापस ले लिया है। उप्र विधानसभा में नौ विधायकों वाली रालोद के लिए निकाय चुनाव से पूर्व हुआ यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है। बताते चलें कि रालोद की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजीत सिंह ने की थी। वर्तमान में चौधरी अजीत सिंह के बेटे चौधरी जयंत सिंह पार्टी की बागडोर संभाल रहे हैं।
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सोमवार को केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने रालोद का राज्य स्तर की पार्टी का दर्जा वापस लेने का आदेश जारी कर दिया। आयोग के मुताबिक विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेने वाले दल को कुल वोटों का न्यूनतम छह प्रतिशत हासिल करने पर राज्य स्तर के दल की मान्यता दी जा सकती है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने आठ सीटों पर जीत हासिल की थी, हालांकि उसे महज 2.85 प्रतिशत वोट ही हासिल किया था। इसी तरह वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में रालोद के हिस्से में काेई सीट नहीं आई थी। उसे महज 1.69 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे।
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वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव उसे एक सीट पर जीत हासिल हुई थी, हालांकि वोट 1.78 प्रतिशत ही मिले थे। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी रालोद के खाते में कोई सीट नहीं आई। उसे चुनाव में 0.86 प्रतिशत वोट मिले थे। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने 2.33 प्रतिशत वोट पाकर नौ सीटों पर जीत हासिल की थी। आयोग के राज्य स्तर की पार्टी का दर्जा वापस लेने के बाद रालोद पंजीकृत गैरमान्यता प्राप्त राजनैतिक दल बन चुका है। बताते चलें कि रालोद ने उपचुनाव में खतौली सीट पर जीत हासिल की थी, जिसके बाद विधानसभा में उसके सदस्यों की संख्या नौ हो चुकी है।
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रालोद को कई बार दिया मौका
केंद्रीय निर्वाचन आयेाग ने राष्ट्रीय लोक दल को राज्य स्तर की पार्टी का दर्जा बरकरार रखने का कई बार मौका दिया। आयोग ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से रालोद के राज्य स्तर की पार्टी के दर्जे की समीक्षा करनी शुरू की थी। आयोग ने रालोद को 18 जुलाई 2019 में कारण बताओ नोटिस देकर स्पष्टीकरण भी मांगा था। हालांकि पार्टी की ओर से इसका कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद आयोग को कोविड-19 महामारी के प्रकोप की वजह से राजनैतिक दलों के दर्जे की समीक्षा के कार्य को स्थगित करना पड़ा था। तत्पश्चात आयोग ने 16 दिसंबर 2021 को सुनवाई का दौर फिर से शुरू किया। इसके तहत 27 दिसंबर 2021 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा गया। वहीं 20 मार्च 2023 को आयोग के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान पार्टी ने विधानसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को दर्शाते हुए अपना पक्ष रखा था।
खतरे में पार्टी सिंबल
रालोद की राज्य स्तर की मान्यता का दर्जा खत्म होने के बाद उसका चुनाव चिन्ह (हैण्ड पंप) पर भी खतरा मंडराने लगा है। अधिकारियों के मुताबिक राज्य स्तर की पार्टी का दर्जा वापस होने के बाद संबंधित पार्टी का चुनाव चिन्ह मुक्त हो जाता है। उसे रालोद या काेई भी दल हासिल करने के लिए आयोग में अनुरोध कर सकता है।