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Lucknow News : मेडिकल परीक्षा की कॉपियों में हेराफेरी के मामले में डेविड मारियो समेत तीन गिरफ्तार

Sat, 22 Jul 2023 12:20 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sat, 22 Jul 2023 12:20 AM IST
सार

डेविड मारिया डेनिस ने कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति विनय कुमार पाठक के खिलाफ बीते नवंबर माह में कमीशनखोरी का मुकदमा दर्ज कराया था। इस प्रकरण की जांच एसटीएफ कर रही थी, जिसे बाद में राज्य सरकार की संस्तुति पर सीबीआई ने टेकओवर कर लिया था।

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Lucknow News: David Mario in custody of ED in case of rigging in copies of medical examination
प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : social media

विस्तार

आगरा विश्वविद्यालय में एमबीबीएस और बीएएमएस परीक्षा की कॉपियां बदलने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने परीक्षा संबंधी कार्य करने वाली कार्यदायी संस्था डिजिटेक्स टेक्नोलॉजी के मालिक डेविड मारियो डेनिस, छात्रनेता राहुल पाराशर और टेंपो चालक देवेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने तीनों को बृहस्पतिवार को सम्मन देकर सुबह 11 बजे तलब किया था। पूछताछ के बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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बताते चलें कि आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में एमबीबीएस और बीएएमएस परीक्षा की कॉपियां बदलने वाले गिरोह के खिलाफ ईडी ने मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। बीती 28 जून को ईडी ने आरोपियों के आगरा, लखनऊ, कानपुर, कासगंज, फिरोजाबाद, दिल्ली के ठिकानों पर छापे मारकर कई अहम सुबूत जुटाए थे। परीक्षा कराने वाली संस्था डिजिटेक्स टेक्नोलॉजीस के संचालक डेविड मारियो डेनिस के लखनऊ के जानकीपुरम स्थित आवास और गोखले मार्ग स्थित प्रिंटिंग प्रेस को भी खंगाला गया था। डेविड मारियो को कई बार ईडी कार्यालय में तलब कर पूछताछ भी की।
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कुलपति के आदेश पर दर्ज हुआ था मुकदमा
इस प्रकरण में आगरा विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति विनय कुमार पाठक के निर्देश पर गणित विभाग के अध्यक्ष एवं आचार्य संजीव कुमार ने 27 अगस्त को हरिपर्वत थाने पर परीक्षा केंद्र सेंट जोंस कॉलेज से परीक्षा कराने वाली एजेंसी के पास कॉपियां ले जाने वाले टेंपो चालक देवेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में पुलिस ने जांच के बाद आगरा निवासी देंवेंद्र सिंह, भीकम सिंह, शैलेंद्र बघेल उर्फ शैलू, उमेश, मथुरा निवासी छात्रनेता राहुल पाराशर, फिरोजाबाद निवासी शिवकुमार दिवाकर, कासगंज निवासी पुनीत, कानपुर निवासी अतुल, जौनपुर निवासी दुर्गेश कुमार को गिरफ्तार किया था।
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रास्ते में बदल जाती थी कॉपियां
आगरा पुलिस की जांच में सामने आया था कि परीक्षा केंद्रों से कॉपियां एकत्र करने के बाद उनको एजेंसी भेजा जाता था। इसे लेकर जाने वाला टेंपो चालक देवेंद्र एजेंसी पर पहुंचने से पहले छात्र नेता राहुल पाराशर को दे देता था। इसके बाद कॉपियों में हेराफेरी की जाती थी। वहीं, पुलिस की चार्जशीट में कानपुर निवासी इंजमाम का नाम भी सामने आया था।

डेविड मारिया के कुलपति विनय कुमार पाठक पर दर्ज कराया था कमीशनखोरी का मुकदमा
ईडी की गिरफ्त में आए डेविड मारिया डेनिस ने कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति विनय कुमार पाठक के खिलाफ बीते नवंबर माह में कमीशनखोरी का मुकदमा दर्ज कराया था। इस प्रकरण की जांच एसटीएफ कर रही थी, जिसे बाद में राज्य सरकार की संस्तुति पर सीबीआई ने टेकओवर कर लिया था। बताते चलें कि मेडिकल परीक्षा की कॉपियां बदलने का मामला सामने आने के दौरान विनय पाठक आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति थे। उनके आदेश पर ही इसका मुकदमा दर्ज हुआ था।

 

5000 छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया था मारियो की कंपनी ने

आगरा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एमबीबीएस और बीएएमएस की परीक्षा की कॉपियां बदलने का मामला सामने आने के बाद करीब 5000 छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया था। इस प्रकरण की जांच बीते दिनों एसटीएफ ने भी शुरू की थी, हालांकि यह परवान नहीं चढ़ सकी। वहीं, आगरा पुलिस की शुरुआती जांच में परीक्षा कराने वाली कार्यदायी संस्था के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिला था।

आगरा पुलिस ने अदालत में दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में डेविड मारिया और उनकी कंपनी डिजिटेक्स टेक्नोलॉजी को आरोपी नहीं बनाया था। वहीं दूसरी ओर बीते तीन महीने से इस मामले की गोपनीय तरीके से पड़ताल कर रही ईडी लगातार मारियो के खिलाफ सुबूत जुटा रही थी। ईडी ने उसे बीते दो माह के दौरान आधा दर्जन से अधिक बार पूछताछ के लिए बुलाया था। बृहस्पतिवार को तलब किए गए मारियो को 24 घंटे तक लगातार पूछताछ के बाद गिरफ्तार करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा छात्रनेता राहुल पाराशर और टेंपो चालक को भी गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को आगरा पुलिस ने भी गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उनको जमानत मिल गई थी।

शिकायत पर वीसी ने कराया था चेक
दरअसल, कॉपियां बदलने की शिकायत एक छात्रनेता ने तत्कालीन वीसी विनय पाठक से की थी। उन्होंने अपने प्रति-कुलपति को जांच करने भेजा, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। फिर वीसी ने गणित विभाग के अध्यक्ष को प्राइवेट गाड़ी से टेंपो का पीछा करने को कहा। टेंपो छलेसर स्थित कार्यदायी संस्था के कार्यालय पर जाने के बजाय एक गली में मुड़ गया, जहां पर कॉपियां बदलने के लिए उतारी जाने लगी। इसका खुलासा होने पर वीसी ने तत्काल मुकदमा दर्ज करने को कहा। इस प्रकरण में एसआईटी का भी गठन हुआ था, जिसने जांच में पाया था कि डिजिटेक्स टेक्लोनॉजीस को बीते कई सालों से परीक्षा कराने का काम दिया जा रहा था।

कोड भी बदल देते थे
जांच में सामने आया कि डिजिटेक्स टेक्नोलॉजीस के संचालक और कर्मचारी छात्रनेता राहुल पाराशर के घर पर आने वाली कॉपियों को बदल देते थे। इनके स्थान पर नई कॉपियां लिखी जाती थी, जिसमें नया बार कोड भी डाला जाता था। वहीं, कार्यदायी संस्था परीक्षा केंद्रों से कॉपियां मिलने के समय में भी हेराफेरी करती थी। वह परीक्षा के दिन कॉपियां मिलना दर्शाती थी, जबकि ये कॉपियां कई दिन बाद उसके पास पहुंचती थी। इसी दौरान सारा खेल होता था।

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