Lucknow News : मदरसों में अवकाश को लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप, चेयरमैन और सदस्य के बीच विवाद
मदरसा बोर्ड के डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने मदरसों की अवकाश तालिका जारी स्पष्ट किया था कि मदरसों में साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार ही रहेगा। ऐसे में मदरसों में साप्ताहिक अवकाश रविवार को होने की अटकलों पर विराम लग गया था।
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मदरसा शिक्षा परिषद की 2023 की अवकाश तालिका जारी होने के बाद मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तिखार अहमद जावेद और बोर्ड के सदस्य कमर अली के विवाद खुल कर सामने आ गया है। मदरसों के साप्ताहिक आवकाश और वार्षिक अवकाश लेकर उठे विवाद ने मदरसा प्रबंधन की परेशानी बढ़ा दी है।
मदरसा बोर्ड के डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने मदरसों की अवकाश तालिका जारी स्पष्ट किया था कि मदरसों में साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार ही रहेगा। ऐसे में मदरसों में साप्ताहिक अवकाश रविवार को होने की अटकलों पर विराम लग गया था। इसके अलावा मदरसों में वार्षिक अवकाश 43 की जगह इस बार 36 कर दी गई थी। अवकाश तालिका में कक्षाओं का समय एक अप्रैल से 30 सितंबर तक सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक, मध्यावकाश सुबह 11 गजे से 11.30 बजे तक और एक अक्टूबर से 31 मार्च तक मदरसों का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे व मध्यावकाश दोपहर 12 बजे से 12.30 बजे तक रखा गया। अवकाश तालिका जारी होने के बाद से विवाद उठने लगा।
मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तिखार का आरोप है कि बोर्ड के सदस्य लगातार झूठे बयान देकर असहजता की स्थिति पैदा कर रहे हैं। उनका कहना है कि मदरसा विनियमावली 2016 में संशोधन के सिलसिले में बीती 20 दिसंबर को संपन्न हुई बैठक मदरसों से जुड़े हितधारकों के साथ थी जिसमें बोर्ड के सभी सदस्य भी मौजूद थे। बैठक बोर्ड की नही थी न ही किसी तरह के फैसला लेने के लिये थी। बैठक सिर्फ हितधारकों से सुझाव लेने के लिये बुलाई गई थी। उनका कहना है कि बोर्ड के सदस्य कमर अली ने बैठक में मदरसों में शुक्रवार के बदले रविवार को छुटटी को लेकर किसी भी प्रकार का कोई सुझाव नही दिया लेकिन मीडिया में लगातार झूठा बयान देने से मदरसों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने इससे बोर्ड के लिये भी असहजता पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि उनके कृत्यों से लगने लगा है कि उनका मानसिक संतुलन बिड़ रहा है और उन्हें उचित इलाज की जरुरत है।
मदरसा बोर्ड के सदस्य कमर अली का आरोप है कि मदरसा बोर्ड की साल 2023 की अवकाश तालिका जारी करने में बोर्ड के सदस्यों की सहमति नही ली गई है। साप्ताहिक अवकाश को लेकर तय हुआ था कि बोर्ड की आगामी बैठक में इस पर फैसला लिया जाएगा लेकिन बैठक का इंतजार नही किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अवकाश तालिका में मदरसों के सालाना अवकाश 43 की जगह इस बार 36 कर दिये गये जबकि शीतकालीन अवकाश 11 के बजाये 10 किये गये है।
मदरसों में सालाना अवकाश रमजान और ईद उल फित्र के लिये दी जाती है। रमजान के महीने में तरावीह पढ़ाने के लिये उलमा को दूसरे प्रदेशों में भी जाना पड़ता है। उनका कहना है कि कई उलमा ने फोन करके इस पर आपत्ति जताई थी। इसके अलावा उलमा मदरसों की टाइमिंग को लेकर भी नाराज है। दोपहर तीन बजे तक मदरसों की कक्षाओं का समय किये जाने से मदरसों के बच्चों को नमाज में परेशानी होगी। उनका आरोप है कि बोर्ड के चेयरमैन अपनी नाकामियों और गलतियों को छिपाने के लिये व्यक्तिगत आरोप लगा रहे हैं।