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लखनऊ: डॉक्टर की गैरमौजूदगी में प्रसव, नवजात की मौत, बाढ़ राहत शिविर से सीएचसी पहुंची थी महिला
Sat, 10 Oct 2026 07:53 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Sat, 10 Oct 2026 07:53 PM IST
सार
बाढ़ से प्रभावित इटौंजा क्षेत्र के आठ गांवों की आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती बढ़ गई है। राहत शिविर से सीएचसी की दूरी करीब पांच किलोमीटर है। ऐसे में बाढ़ के बीच रात में आपात स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अहम सवाल है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
विस्तार
लखनऊ के इटौंजा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में शुक्रवार रात महिला डॉक्टर की गैरमौजूदगी में नर्सिंग स्टाफ ने प्रसव कराया। जन्म के कुछ देर बाद नवजात की तबीयत बिगड़ गई। उसे रामसागर मिश्र अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में मौत हो गई। परिजनों ने मामले की शिकायत करने की बात कही है।
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दुघरा निवासी पंकज के मुताबिक, गांव में बाढ़ का पानी भरने के बाद वह परिवार के साथ गुराही गांव के पास राहत शिविर में तिरपाल के नीचे रह रहे हैं। शुक्रवार देर रात करीब 3:30 बजे उन्होंने प्रसव के लिए पत्नी को इटौंजा सीएचसी में भर्ती कराया। वहां नर्सिंग स्टाफ हेमलता और ईएमओ डॉ. राजेंद्र की मौजूदगी में सुबह 5:55 बजे प्रसव हुआ। बेटे के जन्म के बाद उसे सांस लेने में परेशानी हुई। इसके बाद उसे रामसागर मिश्र अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।
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बाढ़ प्रभावित आठ गांवों के लिए चुनौती
बाढ़ से प्रभावित इटौंजा क्षेत्र के आठ गांवों की आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती बढ़ गई है। राहत शिविर से सीएचसी की दूरी करीब पांच किलोमीटर है। ऐसे में बाढ़ के बीच रात में आपात स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अहम सवाल है।
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एक ही महिला डॉक्टर पर जिम्मेदारी
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि केंद्र पर एक ही महिला डॉक्टर मधु श्री तैनात हैं। उन्होंने शुक्रवार को ओपीडी ड्यूटी पूरी की थी, जिसके बाद वह चली गईं। उनकी अनुपस्थिति में नर्सिंग स्टाफ ने प्रसव कराया। अधीक्षक के अनुसार, नवजात के पेट में गंदा पानी जाने से सांस लेने में परेशानी हुई थी। उसे रेफर किया गया, लेकिन परिजन निर्णय नहीं ले पा रहे थे।