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पराबैंगनी किरणों से सिर्फ आधे घंटे में संक्रमण मुक्त हो रही मेट्रो, इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाली देश की पहली मेट्रो
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लखनऊ मेट्रो देश की पहली ट्रेन सेवा है, जिसे पराबैंगनी किरणों के जरिये संक्रमण मुक्त किया जा रहा है। न्यूयॉर्क की तरह लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने भी कोरोना से बचाव के लिए हाईटेक तकनीक का प्रयोग शुरू कर दिया है। नई तकनीक पुरानी व्यवस्था से करीब चालीस प्रतिशत सस्ती है। शुक्रवार को यूपीएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने प्रजेंटेशन कर इसकी जानकारी साझा की।
यूपीएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने बताया कि लखनऊ मेट्रो ने सैनिटाइजेशन उपकरण बनाने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर यूवी लैंप विकसित की है, जो पराबैंगनी कीटाणुनाशक विकिरण प्रणाली पर काम करती है। इस उपकरण में 254 नैनो-मीटर तक की शॉर्ट वेवलेंथ वाली अल्ट्रवॉयलेट-सी किरणों के जरिए सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट किया जाता है। ये किरणें इन सूक्ष्म जीवों के डीएनए व न्यूक्लिक एसिड को नष्ट कर देती हैं। इस उपकरण को बीते साल अक्तूबर में डीआरडीओ से मंजूरी भी मिल चुकी है। एमडी कुमार केशव का कहना है कि यूवी लैंप से सैनिटाइजेशन सोडियम हाइपोक्लोराइट की तुलना में बेहद सस्ता है। एक आंकड़े के मुताबिक यूवी लैंप के जरिए सैनिटाइजेशन से लागत 40 गुना तक कम हो जाएगी।
रिमोट से होता है संचालन
एमडी ने कहा कि यूपीएमआरसी में प्रयोग किए जा रहे इस उपकरण के जरिए 30 मिनटों में ही एक मेट्रो ट्रेन के सभी कोच सैनिटाइज किए जा सकते हैं। रिमोट के जरिए संचालित इस उपकरण को ऑन करने के एक मिनट बाद मशीन से रेडिएशन निकलना शुरू होता है। चिकित्सा क्षेत्र में ऑपरेशन थियेटर को सैनिटाइज करने के लिए इसी किस्म के उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है।
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टोकन से की थी शुरुआत
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी प्राथमिकता है। जब हमने रेडिएशन के जरिए टोकन सैनिटाइज करने की शुरूआत की थी, तब यात्रियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। अब हम पूरी ट्रेन को पराबैंगनी किरणों के जरिए सैनिटाइज करने की प्रक्रिया शुरू की है।
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यूपीएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने बताया कि लखनऊ मेट्रो ने सैनिटाइजेशन उपकरण बनाने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर यूवी लैंप विकसित की है, जो पराबैंगनी कीटाणुनाशक विकिरण प्रणाली पर काम करती है। इस उपकरण में 254 नैनो-मीटर तक की शॉर्ट वेवलेंथ वाली अल्ट्रवॉयलेट-सी किरणों के जरिए सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट किया जाता है। ये किरणें इन सूक्ष्म जीवों के डीएनए व न्यूक्लिक एसिड को नष्ट कर देती हैं। इस उपकरण को बीते साल अक्तूबर में डीआरडीओ से मंजूरी भी मिल चुकी है। एमडी कुमार केशव का कहना है कि यूवी लैंप से सैनिटाइजेशन सोडियम हाइपोक्लोराइट की तुलना में बेहद सस्ता है। एक आंकड़े के मुताबिक यूवी लैंप के जरिए सैनिटाइजेशन से लागत 40 गुना तक कम हो जाएगी।
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रिमोट से होता है संचालन
एमडी ने कहा कि यूपीएमआरसी में प्रयोग किए जा रहे इस उपकरण के जरिए 30 मिनटों में ही एक मेट्रो ट्रेन के सभी कोच सैनिटाइज किए जा सकते हैं। रिमोट के जरिए संचालित इस उपकरण को ऑन करने के एक मिनट बाद मशीन से रेडिएशन निकलना शुरू होता है। चिकित्सा क्षेत्र में ऑपरेशन थियेटर को सैनिटाइज करने के लिए इसी किस्म के उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है।
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टोकन से की थी शुरुआत
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी प्राथमिकता है। जब हमने रेडिएशन के जरिए टोकन सैनिटाइज करने की शुरूआत की थी, तब यात्रियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। अब हम पूरी ट्रेन को पराबैंगनी किरणों के जरिए सैनिटाइज करने की प्रक्रिया शुरू की है।