{"_id":"624343547e508e4ba84e9c5d","slug":"lucknow-mafia-mukhtar-ansari-lodged-in-banda-jail-will-get-medical-facilities-and-security-relatives-and-lawyers-will-be-able-to-meet","type":"story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ : बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को मिलेगी चिकित्सा सुविधा व सुरक्षा, परिजन व वकील कर सकेंगे मुलाकात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ : बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को मिलेगी चिकित्सा सुविधा व सुरक्षा, परिजन व वकील कर सकेंगे मुलाकात
Tue, 29 Mar 2022 11:05 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 29 Mar 2022 11:05 PM IST
सार
कोर्ट ने मुख्तार अंसारी की उस मांग को स्वीकार करने से मना कर दिया, जिसमें मुकदमे की सभी कार्यवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराने की मांग की गई। कोर्ट ने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की कार्यवाही कराना न्यायालय के विवेक पर निर्भर है।
विज्ञापन
मुख्तार अंसारी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को चिकित्सीय सुविधा और सुरक्षा दी जाएगी। परिजन और वकील भी जेल मैन्युअल के मुताबिक उससे मुलाकात कर सकेंगे। यह आदेश एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम अंबरीश कुमार श्रीवास्तव ने मुख्तार अंसारी की अर्जी पर मंगलवार को बांदा जेल के अधीक्षक को दिया है। इसमें कहा गया है कि जेल मैन्युअल व सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया कराना सुनिश्चित करें।
विज्ञापन
गौरतलब है कि बांदा जेल से 28 मार्च को पेशी पर आए मुख्तार अंसारी की ओर से जेल अधिकारियों की शिकायत करते हुए पीएम-एमएलए कोर्ट में अर्जी दी गई थी। इसमें कहा गया था कि जेल में उसे दवाएं और मेडिकल परीक्षण की सुविधा नहीं दी जा रही है। उनके वकीलों को भी उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। मुख्तार ने अर्जी में जेल की सीसीटीवी फुटेज मंगाने की मांग भी की थी।
विज्ञापन
कोर्ट ने अर्जी पर उक्त आदेश बांदा जेल अधीक्षक को दिया। हालांकि कोर्ट ने मुख्तार अंसारी की उस मांग को स्वीकार करने से मना कर दिया, जिसमें मुकदमे की सभी कार्यवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराने की मांग की गई। कोर्ट ने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की कार्यवाही कराना न्यायालय के विवेक पर निर्भर है। जबकि सीसीटीवी फुटेज की मांग भ्रामक होने के कारण स्वीकार करने योग्य नहीं है।
विज्ञापन