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आईआईटीआर की पोस्ट मानसून रिपोर्ट: लखनऊ के चारबाग-चौक की हवा सबसे ज्यादा जहरीली

Sat, 05 Nov 2022 04:12 PM IST
लखनऊ ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sat, 05 Nov 2022 04:12 PM IST
सार

आईआईटीआर की पोस्ट मानसून रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ में पिछले साल के मुकाबले सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले सूक्ष्मकण पीएम 2.5 में 56.7 प्रतिशत तो पीएम 10 में 20.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। लखनऊ में हवा के साथ ही वायु प्रदूषण भी मानक से अधिक है।

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IITR post monsoon report on pollution in Lucknow.
कोहरे और धुंध का डेरा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

चारबाग और चौक जैसे मिश्रित भू-उपयोग और घनी आबादी वाले इलाकों की हवा सबसे अधिक खराब है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक इन इलाकों में नेशनल एंबियंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (नैक्स) के मानकों से तीन गुना से भी अधिक प्रदूषण रिकॉर्ड हुआ है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से देखें तो प्रदूषण का स्तर आठ गुना तक अधिक है। हवा की तरह ही शोर भी मानक से अधिक शहर के अलग-अलग इलाकों में है।

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निदेशक डॉ. एन भास्करन के मुताबिक लखनऊ के नौ स्थलों पर आईआईटीआर की एनवायरमेंट मॉनिटरिंग डिवीजन की टीम ने 23 से 25 अक्तूबर और उसके बाद 27 से 31 अक्तूबर के बीच प्रदूषण की निगरानी की। इसमें अलग-अलग समय पर हवा के नमूने लेकर जांच की गई। । हवा के नमूनों में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले सूक्ष्मकण पीएम2.5, पीएम10, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, हैवी मेटल्स की जांच कराई गई। पिछले साल की तुलना में पीएम2.5 में 56.7 फीसदी तो पीएम 10 में 20.5 फीसदी की बढ़ोतरी पाई गई। हालांकि, सल्फर डाई ऑक्साइड व नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड मानक से कम मिले हैं।
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5.4 फीसदी बढ़ गए वाहन, सीएनजी की खपत डेढ़ गुना
राजधानी में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आईआईटीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल के मुकाबले 2022 में 5.4 फीसदी वाहन बढ़े हैं। आरटीओ के आंकड़ोें के मुताबिक एक साल के अंदर 1.36 लाख नए वाहन सड़कों पर आए। इनमें सबसे अधिक 34.7 फीसदी टैक्सी कारों की संख्या बढ़ी है। एसयूवी, कार, बाइक भी सबसे ज्यादा बिकने वाले वाहनों में शामिल हैं। वाहन बढ़े तो पेट्रोल की खपत 4.43 फीसदी बढ़ गई। सीएनजी की बात करें तो इसकी खपत 157.98 फीसदी बढ़ी है। हालांकि, डीजल की खपत में 11 फीसदी की कमी आई है। ऐसा डीजल वाहनों की मांग घटने और सीएनजी की बढ़ने की वजह से हो सकता है।


तीन सालों में सबसे ज्यादा प्रदूषण
प्रदूषण का स्तर तीन साल की तुलना में सबसे अधिक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि दीपावली के बाद हवा में मौजूद कण पूरी तरह छंट नहीं सके हैं। ऐसे में करीब एक सप्ताह बाद तक हवा में प्रदूषण बना रहा। इसकी वजह से भी हवा अधिक जहरीली होने की आशंका है।

प्रदूषण कम करने के लिए दिए सुझाव
- शहर के सुनियोजित विकास पर जोर दिया जाए।
- प्रदूषण के आकलन की तकनीक और एडवांस करने की जरूरत है।
- वाहनों के धुएं के अलावा सड़क पर उड़ती धूल प्रदूषण की बड़ी वजह है। सड़कों की हालत दुरुस्त की जाए ताकि जाम नहीं लगे।
- पुराने वाहनों को सख्ती से उपयोग से बाहर किया जाए।
- सड़कों के किनारे पौधरोपण बढ़ाया जाए।
- छतों और बिल्डिंगों के बाहर हरियाली बढ़ाने पर जोर हो, इससे तापमान को कम रखने में मदद मिलेगी।
- वाहनों में गैर जरूरी हॉर्न के उपयोग पर सख्ती हो।
- अधिक ट्रैफिक, मुख्य बाजारों में हवा में प्रदूषण कम करने वाले एयर प्योरीफिकेशन डिवाइसेज का उपयोग शुरू हो।

जानिए कहां हवा में कितना घुला है जहर
स्थान -- पीएम10 -- पीएम2.5
आवासीय
अलीगंज -- 192 -- 119
विकासनगर -- 171 -- 108
इंदिरानगर -- 214 -- 143
गोमतीनगर -- 205 -- 132

व्यावसायिक
चारबाग -- 330 -- 192
आलमबाग -- 209 -- 138
अमीनाबाद -- 214 -- 145
चौक -- 306 -- 189

औद्योगिक
अमौसी 149 189
(सभी आंकड़े माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर में दिए गए हैं।)
ध्वनि प्रदूषण: कानफोडू हो रहा शोर
स्थान -- दिन -- रात
आवासीय
अलीगंज -- 68.9 -- 61.7
विकासनगर -- 71.2 -- 59.3
इंदिरानगर -- 73.8 -- 63.8
गोमतीनगर -- 70.0 -- 71.2

व्यावसायिक
चारबाग -- 79.5 -- 81.9
आलमबाग -- 73.5 -- 68.1
अमीनाबाद -- 78.5 -- 71.2
चौक -- 80.4 -- 69.5

औद्योगिक
अमौसी -- 82.5 -- 81.2

(दिन व रात के मानक आवासीय में 55 व 45, व्यावसायिक में 65 व 55, औद्योगिक में 75 व 70 डेसिबल हैं। सभी जगह मानक से अधिक शोर दिन व रात के समय मिला है।)

इस टीम ने किया सर्वे
परियोजना प्रमुख डॉ. जीसी किस्कू, सह परियोजना प्रमुख एएच खान व डॉ. बी श्रीकांत, क्षेत्र समन्वयक डॉ. एन मणिक्कम, तकनीकी सहयोग प्रदीप शुक्ला, सुशील सरोज व एसएचएन नासिर, शोध छात्र एसएस कालीकिंकर महंता, हरीओम प्रसाद, अंकित कुमार, प्रिया सक्सेना, परियोजना सहायक अब्दुल अतीक सिद्दीकी, रवि सिंह, अभिषेक वर्मा, मो. मुजम्मिल, अभिषेक कुमार तिवारी, स्वप्निल राज, अनुज कुमार, मुर्शिद खान।

शहर में कोहरे और धुंध का डेरा
पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से मौसम में बदलाव नजर आ रहा है। शुक्रवार सुबह की शुरुआत कोहरे के साथ हुई। पर, इसके बाद दिन भर धुंध का असर दिखा। धुंध के लिए प्रदूषण को जिम्मेदार माना जा रहा है। वहीं दिन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हुआ। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र केवरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि सुबह 8 बजे तक कोहरा रहा। इस दौरान लगभग एक किमी. तक दृश्यता प्रभावित रही। शनिवार तक हल्का कोहरा व धुंध रहने की आशंका है। इसके बाद सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ से छह और सात नवंबर को बादल छाए रहने के आसार हैं। इस सबसे तापमान में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है।

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