लखनऊ केजीएमयू धर्मांतरण मामला: एसटीएफ की जांच में बड़े रैकेट का खुलासा,हो रहा था धर्म परिवर्तन का गंभीर प्रयास
Lucknow KGMU conversion case: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटीके भीतर बड़े पैमाने पर चल रहे धर्मांतरण रैकेट का एसटीएफ की जांच में खुलासा हुआ है।
विस्तार
एसटीएफ की जांच में सामने आए प्रमुख नाम और मामले
एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, केजीएमयू के गांधी वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ नफीस पर एक पीड़िता को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक व मानसिक शोषण करने और धर्म परिवर्तन कराकर निकाह करने का गंभीर आरोप है। इसी तरह एक अन्य नर्सिंग स्टाफ पुरखान पर भी एक पीड़िता का शोषण करने और उसे धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का मामला सामने आया है। जांच में रेजिडेंट डॉक्टर आदिल का नाम भी शामिल है, जिन पर दो पीड़िताओं को शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने का आरोप है और इनमें से एक पीड़िता की शिकायत पर कैंसरबाग थाने में मुकदमा भी दर्ज किया जा चुका है।
इसके अलावा पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर समीउद्दीन नायक पर एक जूनियर महिला डॉक्टर को प्रेमजाल में फंसाने, अपनी शादी की बात छिपाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप है, जिससे प्रताड़ित होकर पीड़िता ने 17 दिसंबर 2025 को नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या की कोशिश की थी। इस मामले में 23 दिसंबर को थाना चौक में शिकायत दर्ज कराई गई थी जिसके बाद नौ जनवरी 2026 को आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया था। रेडियोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रिजवान पर भी दो महिला डॉक्टरों को प्रेमजाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का आरोप है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के संविदा कर्मचारी शफकत अली खान पर भी एक पीड़िता को धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए प्रेरित करने का आरोप है, जिसकी शिकायत के बाद एक आंतरिक जांच कमेटी भी गठित की गई थी।
वरिष्ठ अधिकारियों और फैकल्टी की संदिग्ध भूमिका
जांच रिपोर्ट में संस्थान के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और फैकल्टी सदस्यों की संदिग्ध भूमिका पर भी बड़े सवाल उठाए गए हैं। पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश बाबू और एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुभाष कुमार पर पीड़ितों की शिकायतों पर कोई कार्रवाई न करने और आरोपियों का पक्ष लेने के आरोप हैं। साथ ही पैथोलॉजी विभाग की बायोकेमिस्ट्री लैब के प्रभारी डॉ. वाहिद अली पर कुछ आरोपी डॉक्टरों का समर्थन करने और नए मुस्लिम छात्र-छात्राओं को संगठित करने का आरोप लगाया गया है।
एसटीएफ की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में पहले 'इस्लामिक स्टूडेंट ग्रुप' और बाद में 'इस्लामिक मेडिकल ग्रुप' बनाया गया था, जिसमें केजीएमयू के कुछ डॉक्टर भी शामिल थे। इसके अलावा मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर उस्मान कौसर, बायोकेमिस्ट्री विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अहमद और डॉ. कलीम की भूमिका का भी उल्लेख है। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि पीड़िताओं को विरोध या शिकायत करने पर उनके करियर को बर्बाद करने और परीक्षा में फेल कराने की धमकियां दी जाती थीं।
शासन की ओर से कार्रवाई के कड़े निर्देश
एसटीएफ ने गत 25 अगस्त को अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी, जिसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 30 अक्तूबर को केजीएमयू के कुलसचिव को पत्र भेजकर केजीएमयू अधिनियम-2002 और परिनियमावली-2011 के प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। शासन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट भी तलब की है।