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Lucknow-Kanpur Highway: नौ महीने बाद लखनऊ-कानपुर हाईवे पर सोनिक के पास डायवर्जन खत्म
Fri, 04 Jul 2025 09:06 AM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, उन्नाव/लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, उन्नाव/लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 04 Jul 2025 09:06 AM IST
सार
कानपुर-लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास एक्सप्रेसवे क्रॉस कर रहा है। ऐसे में यहां पर अंडरपास का काम 20 अक्तूबर 2024 को शुरू हुआ था। संस्था ने दो माह का काम पूरा करने में नौ माह का समय लगा दिया।
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
कानपुर-लखनऊ हाईवे पर गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माणाधीन अंडरपास को लेकर सोनिक मोड़ पर लागू रूट डायवर्जन नौ माह बाद खत्म हो गया है। बृहस्पतिवार को हाइवे की बंद लेन को खोल दिया गया। इसके साथ ही दोनों लेन से वाहन फर्राटा भरने लगे।
मेरठ से प्रयागराज के बीच बन रहा गंगा एक्सप्रेसवे उन्नाव के 76 गांवों से निकल रहा है। कानपुर-लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास एक्सप्रेसवे क्रॉस कर रहा है। ऐसे में यहां पर अंडरपास का काम 20 अक्तूबर 2024 को शुरू हुआ था। निर्माण के लिए हाईवे की दोनों लेन पर 32 गर्डर रखे जाने थे। सोनिक मोड़ के पास से बसीरतगंज के बीच 200 मीटर में वाहनों के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया था।
इस दौरान एक लेन को बंद करके दूसरी लेन से ही दोनों तरफ के वाहनों को निकाला जाता था। इसी कारण अक्सर यहां पर जाम के हालात बने रहते थे। कार्य नवंबर 2024 तक पूर्ण करना था, लेकिन कार्यदायी संस्था की लापरवाही और सुस्ती से लगातार समय बढ़ता गया और लोगों को जाम का झाम झेलना पड़ा। संस्था ने दो माह का काम पूरा करने में नौ माह का समय लगा दिया।
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मेरठ से प्रयागराज के बीच बन रहा गंगा एक्सप्रेसवे उन्नाव के 76 गांवों से निकल रहा है। कानपुर-लखनऊ हाईवे पर सोनिक मोड़ के पास एक्सप्रेसवे क्रॉस कर रहा है। ऐसे में यहां पर अंडरपास का काम 20 अक्तूबर 2024 को शुरू हुआ था। निर्माण के लिए हाईवे की दोनों लेन पर 32 गर्डर रखे जाने थे। सोनिक मोड़ के पास से बसीरतगंज के बीच 200 मीटर में वाहनों के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया था।
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इस दौरान एक लेन को बंद करके दूसरी लेन से ही दोनों तरफ के वाहनों को निकाला जाता था। इसी कारण अक्सर यहां पर जाम के हालात बने रहते थे। कार्य नवंबर 2024 तक पूर्ण करना था, लेकिन कार्यदायी संस्था की लापरवाही और सुस्ती से लगातार समय बढ़ता गया और लोगों को जाम का झाम झेलना पड़ा। संस्था ने दो माह का काम पूरा करने में नौ माह का समय लगा दिया।
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