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Lucknow: लखनऊ में एमआई बिल्डर पर आयकर विभाग की टीम का छापा, 15 ठिकानों पर छापेमारी

Wed, 23 Oct 2024 02:12 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 23 Oct 2024 02:12 PM IST
सार

राजधानी लखनऊ के एमआई बिल्डर पर बुधवार को आयकर विभाग की टीम ने छापा मारा है। टीम ने 15 ठिकानों पर छापेमारी की है।

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Lucknow: IT team raid on MI builder in Hazratganj.
आयकर विभाग ने की छापेमारी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

 

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आयकर विभाग ने बुधवार को राजधानी में प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी एमआई बिल्डर्स के 15 ठिकानों पर छापा मारा। इस दौरान करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी के पुख्ता सुराग मिले हैं। आयकर विभाग की लखनऊ और वाराणसी की 25 टीमों ने एमआई बिल्डर्स के गोमतीनगर, गोमतीनगर विस्तार, बाराबंकी रोड, हजरतगंज स्थित कार्यालयों और आवासों को एक साथ खंगाला।

सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों एमआई बिल्डर्स द्वारा आयकर रिटर्न दाखिल करने में तमाम अनियमितताएं सामने आई थीं। हजरतगंज निवासी धनप्रकाश बुद्धिराजा ने भी एमआई बिल्डर्स के कर्ताधर्ता मोहम्मद कादिर अली के खिलाफ आयकर विभाग की जांच इकाई में शिकायत की थी। आयकर विभाग ने सभी तथ्यों की जांच के बाद एमआई बिल्डर्स के ठिकानों को खंगालने का फैसला किया। छापेमारी में मोहम्मद कादिर अली का गोमतीनगर के विपुल खंड स्थित आवास भी शामिल है, जहां अधिकारी लगातार छानबीन कर रहे हैं। अधिकारियों ने एमआई बिल्डर्स के गोमतीनगर विस्तार और सुल्तानपुर रोड स्थित कई प्रोजेक्ट्स में भी तलाशी ली है। साथ ही एमआई बिल्डर्स को भवन सामग्री मुहैया कराने वाले कई सप्लायरों के ठिकानों पर भी दस्तावेज खंगाले गए हैं।

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ब्यूरोक्रेट्स द्वारा निवेश करने का शक
सूत्रों के मुताबिक एमआई बिल्डर्स का करीबी संबंध बसपा सरकार में बेहद प्रभावशाली एक ब्यूरोक्रेट से होने का पता चला है, जिसकी काली कमाई कंपनी के प्रोजेक्ट्स में निवेश होने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा छापे में कई बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं। अधिकारियों को शक है कि ये कई ब्यूरोक्रेट्स की बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज हैं। वहीं कुछ न्यायिक अधिकारियों द्वारा भी कंपनी के प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के प्रमाण मिले हैं।

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संदिग्ध लेन-देन की भी मिली जानकारी
छापे में एक ठिकाने से कुछ रजिस्टर मिले हैं, जिनमें करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी हाथ लगी है। इन रजिस्टर में कोड वर्ड में लाखों रुपये की एंट्री दर्ज है। यह पता लगाया जा रहा है कि ये रकम किस काम के बदले दी गई थी। कई जगह एलडीए और आवास विकास के अधिकारियों को भी रकम देने का ब्योरा दर्ज है। आशंका जताई जा रही है कि इसे कमीशन के रूप में दिया गया था।

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