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लखनऊ : पशुपालन विभाग में टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी मामले में आरोप तय
Fri, 10 Sep 2021 11:14 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 10 Sep 2021 11:14 AM IST
सार
इस मामले में आरोपी बनाए गए पूर्व डीआईजी अरविंद सेन एवं आरोपी अनिल राय की ओर से कोर्ट में उन्हें आरोप से मुक्त और डिस्चार्ज किए जाने की मांग वाली अर्जी दी गई है। इस पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने 13 सितंबर की तारीख तय की है।
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अरविंद सेन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश रमाकांत प्रसाद ने पशुपालन विभाग में टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोपियों आशीष राय, रूपक राय, दिलबहार व सुनील उर्फ मोंटी गुर्जर पर आरोप तय कर दिए गए हैं। इस मामले में आरोपी बनाए गए पूर्व डीआईजी अरविंद सेन एवं आरोपी अनिल राय की ओर से कोर्ट में उन्हें आरोप से मुक्त और डिस्चार्ज किए जाने की मांग वाली अर्जी दी गई है। इस पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने 13 सितंबर की तारीख तय की है।
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कोर्ट ने आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के आरोपों के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 419, 420, 468, 471 एवं 120बी के तहत आरोप तय किया किया है। कोर्ट में सरकारी वकील प्रभा वैश्य एवं विशेष अधिवक्ता अभितेश कुमार के अनुसार इंदौर के व्यापारी और मामले के वादी मंजीत सिंह भाटिया ने हजरतगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अप्रैल 2018 में उनके छोटे भाई के दोस्त वैभव शुक्ला अपने साथी संतोष शर्मा के साथ उनके इंदौर स्थित आवास पर आए और बताया कि पशुपालन मंत्री के करीबी और उपनिदेशक पशुपालन एसके मित्तल आपको पार्टी हित में गेहूं, शक्कर, आटा और दाल की सप्लाई देना चाहते है।
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कुछ दिन बाद आरोपी टेंडर फॉर्म लेकर आए और वादी व उनकी पत्नी के हस्ताक्षर कराए। साथ ही टेंडर में रेट उपनिदेशक के द्वारा भरने की बात कही। सप्लाई कार्य के लिए आरोपियों ने वादी से 9.72 करोड़ रुपये लिए और टेंडर मिलने की सूचना दी, लेकिन उसे टेंडर नहीं मिला। बाद में यह पता चला कि जो व्यक्ति एसके मित्तल के नाम से मिलता था, वह आशीष राय नाम का जालसाज है। उसने अपने साथी सुनील गुर्जर उर्फ मोंटी गुर्जर, रूपक राय, संतोष मिश्रा, अमित मिश्रा, उमाशंकर तिवारी, रजनीश दीक्षित, डीवी सिंह, पशुपालन मंत्री के निजी सचिव धीरज कुमार, राज्यमंत्री पशुपालन के कार्यालय के समीक्षा अधिकारी उमेश कुमार मिश्र और अनिल राय समेत अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर कूटरचित व फर्जी दस्तावेज तैयार करके करोड़ों की धोखाधड़ी की है। इस मामले में विवेचक ने उक्त आरोपियों के अतिरिक्त अन्य 10 लोगोें के खिलाफ न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया है।
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