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लखनऊ : हीरक जयंती वर्ष के समापन समारोह में राष्ट्रपति बोले, हम लोगों का काफिला रोककर एंबुलेंस को निकाले

Fri, 27 Aug 2021 02:39 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 27 Aug 2021 02:39 PM IST
सार

लखनऊ में कैप्टन मनोज पाण्डेय सैनिक स्कूल के हीरक जयंती वर्ष के समापन समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैं राष्ट्रपति होने के साथ-साथ एक संवेदनशाील नागरिक हूं। मुझे  जानकारी मिलती है कि कई शहरों में मेरी यात्रा के दौरान आम जनता को असुविधा होती है।

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Lucknow: In the closing ceremony of the Diamond Jubilee year, the President said, we stopped the convoy of people and took out the ambulance
समारोह का शुभारंभ करते राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखनऊ में कैप्टन मनोज पाण्डेय सैनिक स्कूल के हीरक जयंती वर्ष के समापन समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैं राष्ट्रपति होने के साथ-साथ एक संवेदनशाील नागरिक हूं। मुझे  जानकारी मिलती है कि कई शहरों में मेरी यात्रा के दौरान आम जनता को असुविधा होती है। मुझे भी इसकी चिंता है और पीड़ा है। इसलिए मेरे 2-3 सुझाव हैं। तय समय से बहुत पहले, ट्रैफिक ना रोका जाए, 10-15 मिनट पहले तक तो ठीक है।

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एंबुलेंस आदि बिना रुकावट निकल सकें, इसके लिए कोई समाधान खोजना चाहिए। यहां बात सिर्फ मेरी ही नहीं, अन्य लोग भी हैं, जिनके लिए ट्रैफिक रोका जाता है। जरूरत हो तो हम लोगों का काफिला रोककर भी एंबुलेंस को निकाल सकते हैं। हालांकि प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए ऐसा करता है लेकिन हम सबको मिलकर समाधान खोजना चाहिए। इस जिम्मेदारी के लिए सिर्फ प्रशासन पर ही निर्भर नहीं रहा जा सकता। हम देखते हैं कि हर आदमी एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में रहता है। सभी लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए प्रशासन का सहयोग करें।
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मुख्यमंत्री योगी ने राष्ट्रपति का स्वागत अभिनन्दन करते हुए कहा आज ये स्कूल कई मायने में प्रतिमान गढ़ रहा है। इस विद्यालय के संस्थापक पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सम्पूर्णानन्द ने 1960 के कालखंड में इस बात की परिकल्पना की थी कि सैनिक स्कूल होने चाहिए। 1962 में युद्ध हुआ था, उस वक्त उस राजनेता ने ही दूरदर्शिता से इसे भांप लिया था कि देश को इसकी जरूरत होगी। इसलिए हमारी सरकार ने संकल्प लिया कि देश को सैनिक स्कूलों की आवश्यकता है।
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सिर्फ सेना ही नहीं देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी हम देश को सेवाएं दे सकें। संपूर्णानंद की इस परिकल्पना को हमने साकार किया और इस प्रदेश के पांचवे सैनिक स्कूल का शिलान्यास गोरखपुर में किया। इस सैनिक स्कूल का नाम 2017 मे कारगिल युद्ध के नायक कैप्टन मनोज पांडेय के नाम पर रखा और उस राष्ट्रनायक को सम्मान दिया। 2018 में ही इस बात का निर्णय कर लिया कि बालिकाओं के भी सैनिक स्कूलों में प्रवेश होना चाहिए, यही परिकल्पना देश के प्रधानमंत्री मोदी ने भी की। महिला सशक्तिकरण के रूप को साकार करने का कार्य हो रहा है। इस सैनिक स्कूलों में एक भारत श्रेष्ठ भारत की संरचना को लगातार निरंतर अग्रसर है। आज के इस हीरक जयंती के समारोह मे राष्ट्रपति द्वारा समय दिया गया। इसके लिए धन्यवाद है। ये देश का पहला ऐसा सैनिक स्कूल है, जो राज्य द्वारा संचालित हो रहा है। 

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