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लखनऊ : विभाग पर अवमानना की कार्रवाई हुई तो कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही होने पर अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होगी

Thu, 07 Apr 2022 10:22 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 07 Apr 2022 10:22 PM IST
सार

विभाग के खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण के लिए प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने दिशानिर्देश जारी किए है।

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Lucknow: If there is contempt action on the department, then the responsibility of the officer-employee will be fixed if the proceedings of contempt of court are taken.
कोर्ट। - फोटो : amar ujala

विस्तार

बेसिक शिक्षा विभाग के खिलाफ न्यायालयों में दर्ज मामलों में समय पर प्रत्यावेदन निस्तारित नहीं होने के कारण अदालत की ओर से अवमानना की कार्यवाही करने और न्यायालय के निर्णय का समय पर पालन या अपील नहीं होने पर न्यायालय की ओर से विभाग के खिलाफ आदेश पारित करने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। विभाग के खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण के लिए प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने दिशानिर्देश जारी किए है।

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विभाग की ओर से अवमानना प्रकरणों की समीक्षा में सामने आया है कि 60 प्रतिशत अवमानना के मामले ऐसे हैं जिनमें न्यायालय की ओर से समय सीमा में मामले के निस्तारण के आदेश के बाद भी विभाग की ओर से मामले को निस्तारित नहीं किया जाता है। जब याची की ओर से अवमानना दाखिल की जाती है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी प्रत्यावेदन के निस्तारण की आख्या प्राप्त की जाती है या अवमानना में प्रतिशपथ पत्र दाखिल किया जाता है।
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प्रमुख सचिव ने इसे सरासर अनुचित माना है। यह भी सामने आया है कि यदि किसी निर्णय के खिलाफ अपील करनी है तो उसकी समय सीमा बीत जाने के बाद अपील का प्रस्ताव शासन में प्रस्तुत किया जाता है। प्रमुख सचिव ने माना है कि इससे न्यायालय के समक्ष असहज स्थिति उत्पन्न होने से विभाग का पक्ष कमजोर होता है।
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प्रमुख सचिव ने न्यायालय की ओर से मामले का निस्तारण के आदेश जारी करने के बाद समयबद्ध प्रत्यावेदन निस्तारण करने और अपील के लिए भी समय पर निर्णय लेकर कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। उन्होंने महाधिवक्ता की वेबसाइट पर प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने और लंबित वादों के समय पर निस्तारण के लिए महाधिवक्ता, मुख्य स्थाई अधिवक्ता और विभागीय पैरोकार से समन्वय स्थापित कर प्रतिशपथ पत्र दाखिल कर वेबसाइट पर सूचना अपलोड करने के निर्देश दिए है।

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